जब एक दिव्यांग लड़के ने लड़ी प्यार की लड़ाई, समाज से टक्कर लेकर बसाया घर
करौली: आज हम बात करते हैं राजस्थान के एक ऐसे शहर करौली की जिसे बृज भूमी भी कहा जाता है. जहां भगवान कृष्ण को अनेकों रूप में पूजा जाता है और कृष्ण की अलग अलग लीला आम जन के मुख से सुनने को मिलती हैं.
इसी क्रम में भगवान की रास लीला व प्रेम प्रसंग काफ़ी मशहूर हैं, प्रेम व प्रेमी युगलों की इस नगरी में प्रेम विवाह का बहुत महत्व है. हालांकि, कुछ विचारधाराओं की वजह से प्रेमी जोड़ों को प्रेम विवाह करने में पारिवारिक मंज़ूरी नहीं मिलती है. फिर भी युगल सभी सामाजिक बंधनों को तोड़ कर प्रेम विवाह करते हैं.
ऐसे ही एक युगल जोड़े से हम आपको मिला रहे हैं. ये हैं करौली दीवान परिवार के कुंवर कौशलेन्द्र सिंह एवं उनकी पत्नी पूजा कंवर जिन्होंने परिवार समाज के सभी बंधनों को तोड़कर प्रेम विवाह किया. शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के वाबजूद कौशलेन्द्र सिंह अपने प्रेम की ख़ातिर समाज व परिवार से टकरा गए और पूजा कंवर से शादी की.
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आज इस प्रेमी युगल के तीन बच्चे हैं और हंसता खेलता खुशहाल परिवार है. कौशलेन्द्र सिंह का मानना है की प्रेम से सम्बंध टूटते नहीं बल्कि जुड़ते हैं. वहीं दूसरी ओर उनकी पत्नी पूजा कंवर का कहना है कि आपसी समझौते के बाद ही जीवन चल पाता है. उसी प्रकार पति पत्नी का रिश्ता भी गाड़ी के दो पहियों के समान होता है. जिस प्रकार गाड़ी को चलाने के लिए दोनों पहियों का बैलेंस समान रखा जाता है. उसी प्रकार पति पत्नी का रिश्ता भी छोटे-मोटे तनाव को भुलाकर आपसी समझौते के साथ जीना चाहिए.
आज से 12 साल पहले जब हम दोनों ने परिवार से दूर होकर प्रेम विवाह किया तो हमारे परिवार ने भी हमारा साथ छोड़ दिया था. लेकिन फिर शादी के 2 साल बीत जाने के बाद हमारे परिवार ने भी हमें अपना लिया. और आज हम अपने तीन बच्चों के साथ खुशहाली से जीवन यापन कर रहे हैं.