मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग (CSTT), नई दिल्ली द्वारा
सोमवार को जेएलएन मेडिकल कॉलेज अजमेर के सेमिनार हॉल में सिंधी भाषा में चिकित्सा शब्दावली की 5 दिवसीय ऐतिहासिक राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई ।
कार्यक्रम के पूर्व मां सरस्वती के समक्ष प्रधानाचार्य डॉ अनिल सामरिया ने दीप प्रज्ज्वलन करते हुए स्थानीय और बाहर से आए विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए शुभकामनाएं दी । उन्होंने हर्ष व्यक्त किया हमारे मेडिकल कॉलेज के लिए यह गौरव का अवसर है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन से अजमेर को शिक्षा, चिकित्सा एवं भाषा विकास के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।
इसके लिए मेडिकल कॉलेज की तरफ से डॉ दीपा थदानी अति प्रधानाचार्य और सीनियर प्रोफेसर को कार्यशाला बैठक के सुचारू एवं सफल आयोजन हेतु समन्वयक का दायित्व दिया गया है।
शब्दावली आयाेग नई दिल्ली से जय सिंह रावत, सहायक निदेशक एवं योजना प्रभारी अधिकारी ने उद्बोधन देते हुए जानकारी दी कि भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा, चिकित्सा एवं तकनीकी ज्ञान को सशक्त बनाने की दिशा में यह वर्कशॉप की जा रही है। हर महीने पांच दिवसीय कार्यशाला 13 महीने तक चलेगी और आयुर्विज्ञान से संबंधित लगभग 40,700 शब्दों में से प्रथम चरण में लगभग 3,000 महत्वपूर्ण अंग्रेजी हिंदी तकनीकी शब्दों की सिंधी भाषा में शब्दावली तैयार होगी । डॉ दीपा थदानी ने जानकारी दी कि कार्यशाला में डॉ. गुरुदास खिलनानी पूर्व डीन गुजरात अडानी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, भुज, डॉ जयराम रावतानी प्रोफेसर मारवाड़ यूनिवर्सिटी जोधपुर, डॉ. कमलेश तनवानी अतिरिक्त प्रधानाचार्य और प्रोफेसर, बायोकैमिस्ट्री विभाग, डॉ. महेंद्र खन्ना सहायक प्रोफेसर ,डॉ. मनोहर गुरनानी वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ. माया गुरनानी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, भाषा विशेषज्ञों में एस.पी.सी. राजकीय एसपीसी राजकीय महाविद्यालय से डॉ. चंदर प्रकाश दादलानी विभागाध्यक्ष, सिंधी विभाग, डॉ. हासो दादलानी सेवानिवृत्त प्रोफेसर, डॉ. परमेश्वरी पमनानी सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर, सिंधी विभाग डॉ पुष्पा कोडवानी तथा सुरेश श्रीचंदानी सिंधी (देवनागरी लिपि) डेटा विशेषज्ञ के रूप में ,राजस्थान सिन्धी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष और रिटायर्ड डिप्टी सीएमएचओ डॉ लाल थदानी भाग ले रहे हैं । डॉ दीपा थदानी ने कहा कि सिंधी भाषा में चिकित्सा शब्दावली का निर्माण देशभर के लाखों सिंधी भाषी विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
सिंधी विभाग, डॉ. हासो दादलानी सेवानिवृत्त प्रोफेसर ले जानकारी दी कि भारतीय संविधान में 22 अल्प भाषाओं को मान्यता मिली हुई है और भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सभी भाषाओं के विकास के लिए 7000 करोड़ निर्धारित किया हुआ है ।
प्रारंभिक सत्र में सर्जरी विभाग के सीनियर प्रोफेसर और पूर्व प्रधानाचार्य डॉक्टर श्याम भूतड़ा , डॉ दिग्विजय सिंह रावत विशेष रूप में उपस्थित रहे । प्रधानाचार्य और जय सिंह रावत का विशेषज्ञों ने सिन्धी पखड़ और मोतियों की माला पहनाकर जय झूलेलाल के उद्घोष के साथ स्वागत किया और एक परिवार एक पेड़ नारे को सार्थक करते हुए पौधा भेंट किया । डॉ ज्योत्सना चांदवानी ने कार्यक्रम का संचालन किया । डॉ कमलेश तनवानी ने आभार व्यक्त किया । राष्ट्रगान के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ और विधिवत् कार्यशाला शुरू हुई ।