गजब का प्रेम : सुरजा बन जाएंगी आखें और प्रेमचंद पांव

प्रेम की ताकत ऐसी कि सुरजा बन जाएंगी आखें और प्रेमचंद पांव

उदयपुर. ‘नहीं बस्ती किसी और की सूरत अब इन आंखों में, काश कि हमने तुझे इतने गौर से न देखा होता, चाहे तू मुझे कभी मिले या न मिले. लेकिन मेरे हिस्से की भी सारी खुशी तुझे मिले’ कुछ ऐसा ही प्यार सुरजा मीणा और प्रेमचंद मीणा का है. सुरजा बचपन से पोलियोग्रस्त है, जबकि प्रेमचंद दृष्टिहीन. लेकिन दोनों एक-दूसरे का साथ जीवन भर निभाने के लिए तैयार हैं.

उदयपुर के टटाटिया गांव के रहनेवाले प्रेमचंद बताते हैं कि सुरजा मीणा और उनकी बात फोन से शुरू हुई थी. दोनों लगातार बात करते रहते थे और एक दूसरे के संपर्क में थे. बातचीत का यह सिलसिला कब मोहब्बत में बदल गया, उन्हें भी नहीं पता चला. अब ये जोड़ा शादी के लिए तैयार हो गया. प्रेमचंद का कहना है कि वह देख नहीं सकते लेकिन उन्हें सुरजा में अपना जीवन दिखता है.

सुरजा का कहना है कि प्रेमचंद की आंखें नहीं हैं. लेकिन उनका मन बहुत ही सुंदर है. वह मेरी हर परेशानी को खुद समझ जाते हैं. मैं बचपन से ही पोलियो ग्रस्त हूं. जिसकी वजह से चल नहीं सकती. ऐसे में हम एक-दूसरे का सहारा बनेंगे. प्रेमचंद मेरी आंखों से दुनिया देखेंगे और मैं उनके पांवों के बल पर चलूंगी.

आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस जोड़े ने नारायण सेवा संस्थान के दिव्यांग और निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में अपना पंजीकरण करवाया. अब इस 25 व 26 फरवरी को शादी की रस्में पूरी की जाएंगी. फिर हम दोनों जीवनसाथी के रूप में एक-दूसरे का सहारा बनेंगे.

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