राजस्थान में मंत्री एवं आयुक्त दिव्यांग, फिर भी दिव्यांग रहे खाली हाथ

प्रदेश में मंत्री एवं आयुक्त दिव्यांग, फिर भी दिव्यांग रहे खाली हाथ

राजस्थान सरकार में लाखों दिव्यांगजनो की हालत दयनीय हैं। जबकि राजस्थान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मंत्री टीकाराम जूली एवं राजस्थान विशेष योग्यजन आयुक्त उमाशंकर शर्मा,दोनो दिव्यांग हैं। जब दिव्यांगजनो का विभाग संभाल रहे दोनों व्यक्ति दिव्यांग हैं उसके बावजूद भी अगर दिव्यांगजनो को बजट में राहत नही हैं तो यह केवल दिव्यांगजनो के साथ एक मजाक हैं।

प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद उम्मीद बंधी थी कि दिव्यांगों की परेशानियों को देखते हुए राज्य सरकार कोई ना कोई नीति ऐसी बनाएगी जिससे रोजगार से लेकर पेंशन तक की समस्याओं का निस्तारण हो सकेगा लेकिन राज्य सरकार के 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी अभी तक यह उम्मीद बाकी है। सरकार के 3 साल के कार्यकाल का पूरे होने के बाद भी राजस्थान के 15 लाख से अधिक दिव्यांग जनों के लिए कुछ नहीं किया गया है। कई बार के आंदोलन, अनशन और प्रदर्शनों के बावजूद भी सरकार का ध्यान दिव्यांगों की तरफ आकर्षित नहीं हो पाया है। सरकार गठन के साथ दिव्यांगों के लिए पेंशन बढ़ोतरी तो की गई थी लेकिन उसमें भी भेदभाव किया गया। 58 वर्ष से अधिक उम्र वाले दिव्यांगों को पेंशन बढ़ा दी गई लेकिन 58 वर्ष से कम उम्र वालों को सरकार ने दिव्यांग ही नहीं माना। इस मामले पर मुख्यमंत्री के नाम कई बार ज्ञापन भी दिए जा चुके हैं लेकिन किसी प्रकार की कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुई है। राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के लिए 4% आरक्षण की घोषणा की वह लागू भी हुआ लेकिन आज भी कई विभाग उस आदेश को मानने को तैयार नहीं है और दिव्यांगों को 4% आरक्षण नहीं दिया जाता। प्रदेश में मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन स्वरोजगार योजना के तहत दिव्यांग जनों को लोन नहीं दिया जा रहा है जिससे अपने स्वरोजगार का सपना दिव्यांगों के लिए सपना ही बना हुआ है। लाखों दिव्यांग इस योजना का लाभ उठाने से अभी भी वंचित है। कई विभागों में बैकलॉग की भर्तियां लंबे समय से लंबित पड़ी है यदि सरकार इस तरफ ध्यान दें तो हजारों दिव्यांगों को रोजगार मिल सकता है। दिव्यांगों को सरकार की तरफ से दिए जाने वाले स्कूटी वितरण की शर्तें भी इतनी कड़ी है कि दिव्यांगों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। जिन मांगों को लेकर के दिव्यांग आंदोलन कर रहे हैं उनमें प्रमुख मांगे पेंशन बढ़ोतरी, दिव्यांग जनों के लिए रोजगार अवसर पैदा किया जाए, राजनीति में आरक्षण दिया जाए, बैकलॉग की भर्तियां निकाली जाए, रोजगार भत्ता दिया जाए, एक परिवार से 4 सदस्य दिव्यांग होने पर सरकारी नौकरी दी जाए आदि। प्रदेश के दिव्यांग जनों के साथ रोडवेज बसों में अशोभनीय व्यवहार किया जाता है जिसके कारण भी दिव्यांग जन यात्रा करने में संकोच करने लगे हैं।

5000 स्कूटी का सच

राजस्थान के इस बजट में दिव्यांगजनो के लिए 5000 स्कूटी की घोषणा की गई हैं। यह महज एक घोषणा हैं। में इसको घोषणा इसलिए कह रहा हूँ कि पिछले वर्ष जो सरकार ने घोषणा की थी कि वित्तिय वर्ष 2021 – 22 में दिव्यांगों को 2000 स्कूटी वितरित की जाएगी लेकिन वो अभी तक पूरी नही हो पाई हैं। उन 2000 स्कूटी में से अभी तक केवल 400 स्कूटी के आसपास सरकार बांट पाई हैं। ऐसे में प्रदेश के दिव्यांग कैसे विश्वास करें कि सरकार इस बजट में यह 5000 एवं पिछली शेष रही स्कूटी बांट पाएगी ?

अब राजस्थान के दिव्यांगजनो का ध्यान 3 मार्च पर हैं,क्योंकि सरकार का जबरदस्त विरोध राजस्थान के दिव्यांग कर रहे हैं अगर सरकार 3 मार्च को दिव्यांगजनो को पेंशन बढ़ोतरी की घोषणा करती हैं तो यह निश्चित रूप से दिव्यांगजनो के लिए यह एक कल्याणकारी कदम होगा।

इस महंगाई में प्रदेश के दिव्यांग 750 रुपये महीना में कैसे अपना गुजारा कर सकते हैं। महंगाई आसमान को छू चुकी हैं। 6 वर्षों से पेंशन नही बढ़ी हैं। सरकार दिव्यांगों को राहत देंवें।

उत्तम चंद जैन
संपादक
दिव्यांग जगत
7737024290

Author: admin

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