में लाचार जरूर हूँ,लेकिन हिम्मत नही हारी,दिव्यांग की जुबानी

मेहनत का कोई विकल्प नहीं,दिव्यांग बीरा राम की कहानी

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत

अजमेर । अजमेर जीआरपी लाइन में रहने वाले बीरा राम 5 वर्ष की आयु से ही पोलियो ग्रस्त है और उन्होंने अपनी दिव्यांगता को अपनी मेहनत के बूते हरा दिया है । वह पांच 6 सालों से घूम घूम कर पलटन बाजार एवं कुंदन नगर चौराहे पर सब्जी का ठेला लगाकर अपने चार बच्चों पत्नी एवं मां का लालन पोषण कर रहे हैं । सरकारी सहायता के रूप में मात्र 750 रुपये प्रतिमाह पेंशन राशि उन्हें मिलती है ।


पूछने पर उन्होंने बताया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता ।
मैं लाचार जरूर हूं , लेकिन हिम्मत नहीं हारी । किसी के आगे हाथ फैला कर भीख मांगने से अच्छा है कि मैं मेहनत कर अपने बीवी बच्चों और मां का लालन पोषण करूं । उन्होंने दूसरे माता-पिता को भी संदेश दिया है कि अपने बच्चों को पोलियो की सही समय पर खुराक पिलाकर अपंगता से बचाए । एवं भीख मांगने वाले लोगों से कहा कि मेहनत कर रोजी-रोटी कमाए भीख मांग कर जिल्लत की जिंदगी ना जिए ।

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