बैसाखी छूटी और 12 साल के बच्चे के ठीक हो गए पैर
1987 की बात है। महाराष्ट्र के नासिक का 7वीं कक्षा में पढ़ने वाले 12 साल का पंकज परसराम पुरिया दिव्यांग था। बैसाखी के सहारे चलता था। दादी और पिता कई डॉक्टरों के पास लेकर घूमते रहे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद वे मन में विश्वास लेकर खाटूश्यामजी पहुंचे। यहां उनकी मुलाकात आलू सिंह से हुई। आलू सिंह ने उन्हें कहा- बाबा का भंडारा लो। वे प्रसाद लेकर बैठ गए। आलू सिंह ने पंकज को आवाज लगाकर अपने पास बुलाया।
पंकज आने लगा तो आलू सिंह ने कहा बैसाखी वहीं छोड़कर आओ। पंकज नहीं आया। आलू सिंह ने 4 बार आवाज लगाई तो पंकज ने घबराते हुए बैसाखी छोड़ी और धीरे-धीरे कदम बढाए। आलू सिंह हाथ पकड़कर पंकज को बाबा श्याम के धोक लगाने के लिए ले गए। महंत मोहनदास बताते हैं खाटू से जाने के बाद पंकज के पिता ने बॉम्बे अस्पताल में उसके पैरों की जांच कराई। वहां डॉक्टर झुनझुनवाला भी देखकर हैरान हो गए और बोले कि ये चमत्कार है। तब से पंकज परिवार के साथ बाबा के दर्शनों के लिए खाटू आते हैं। 73 साल की उम्र में आलू सिंह का निधन हो गया।
बाबा श्याम के सिर्फ देश ही नहीं दुनियाभर में लाखों भक्त हैं। मेले में ये भक्त अलग-अलग तरीकों से अपनी आस्था प्रकट करते हैं। कोई पैदल यात्रा करते श्याम दरबार में आता है तो कोई पेट पलायन आकर धोक लगाता है। कोई मेले के दौरान भूखा-प्यासा रहता तो कोई दूसरों को भोजन कराता है, जल सेवा करता है।
7 साल से गायब बेटा कीर्तन में मिला
आलू सिंह का जन्म 1916 में खाटू में हुआ था। वे बाबा श्याम के परम भक्त थे। 1972 की बात है। सरदारशहर के रामनिवास उन्हें एक कीर्तन में असम के डिबरूगढ़ ले गए। खाटू के रहने वाले मालीराम शर्मा भी कीर्तन में थे। तभी एक महिला के रोने की आवाज आई। कारण पूछा तो पता चला, उसका बेटा 7 साल से गायब है। पुलिस में भी रिपोर्ट लिखाई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आलू सिंह ने कहा- रात 1 बजे तेरा बच्चा कीर्तन में आ जाएगा। लोगों ने आलू सिंह को खरी खोटी सुनाई कि उन्होंने बिना कुछ सोचे-समझे महिला को कैसे कह दिया कि उसका बेटा मिल जाएगा। आलू सिंह बोले- मुझे नहीं पता मैंने ऐसा क्यों बोला, इसमें बाबा की मर्जी होगी।
रात को कीर्तन शुरू होने से पहले ही लोग पहुंच गए। आलू सिंह को देखकर महिला रोने लगी- मेरा बेटा कहां है, अभी तक मुझे नहीं मिला। आलू सिंह उठे और कीर्तन में बैठे एक युवक का हाथ पकड़कर लाए, उसकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी। युवक को महिला के पास ले जाकर बोले- ये ले तेरा बेटा, जितना दुलार करना है कर लें। लापता युवक के मिलने की बात पर वहां पर पुलिस भी पहुंच गई थी। पुलिस के एक बडे़ अधिकारी भी पहुंचे। वे अधिकारी आज भी बाबा श्याम के दर्शनों के लिए आते हैं।
बाबा से बोले- मेरी एक आंख की रोशनी ले लो, इसके जीवन में उजाला कर दो
ऐसी कहानी है कि श्यामबहादुर एक बार बाबा श्याम के दर्शनों के लिए आए, उसी दौरान एक व्यक्ति भी वहां पहुंचा जो देख नहीं सकता था। उसने रोते हुए बाबा श्याम के आगे हाथ जोड़कर कहा-मेरी आंखों की रोशनी लौटा दो। वहीं खड़े श्यामबहादुर ने प्रतिमा की ओर देखकर कहा-बाबा ये बड़ी उम्मीद लेकर आया है। भले मेरी एक आंख ले लो, लेकिन इसे रोशनी दे दो।
महंत मोहनदास बताते हैं कि क्षणभर बाद ही श्याम बहादुर को दाहिनी आंख से दिखना बंद हो गया और दृष्टिहीन भक्त को एक आंख से नजर आने लगा। श्याम बहादुर का 1951 देहांत हाे गया था। उनका परिवार आज भी बाबा के दर्शनों के लिए आता है।
साभार। दैनिक भास्कर