खुशखबरी: 300 करोड़ से बनेगा पुनर्वास केंद्र, 1000 दिव्यांग रह सकेंगे।
करनाल। प्रदेश सरकार की ओर से दिव्यांगजनों के पुनर्वास के लिए दो नए केंद्र बनाए जाएंगे। इनमें एक करनाल और दूसरा अम्बाला में बनेगा। करनाल में बनने वाला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र 300 करोड़ रुपए से 15 एकड़ में बनेगा, जिसमें 1000 दिव्यांगों के पुनर्वास की व्यवस्था रहेगी। उत्तर भारत में यह सबसे बड़ा दिव्यांग पुनर्वास केंद्र होगा, जो कुटेल गांव के पास बन रही मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ बनेगा। दिल्ली से लेकर जम्मू कश्मीर तक के दिव्यांगों के लिए यह उपयोगी व लाभकारी रहेगा। जबकि दूसरा दिव्यांग पुनर्वास केंद्र अंबाला में पांच एकड़ भूमि पर बनेगा।
इस पर 38 करोड़ रुपए की लागत आएगी। हरियाणा दिव्यांग राज्य आयुक्त राजकुमार मक्कड़ ने बताया करनाल में बनने वाले दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में 21 प्रकार के दिव्यांगों के पुनर्वास की सुविधाएं मुहैया होंगी। यहां पर दिव्यांगों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। वे रविवार को पंचायत भवन में विशाल दिव्यांगजन जागरूकता शिविर में शामिल होने से पहले लोक निर्माण विभाग के विश्रामगृह में मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार दिव्यांगों के विकास के लिए प्रकार से प्रयासरत है।
घरौंडा या करनाल में जल्द संचालित होगा दिव्यांग केंद्र :
हरियाणा दिव्यांग राज्य आयुक्त राजकुमार मक्कड़ ने बताया कि कुटेल में मिली 15 एकड़ की जमीन पर पुनर्वास केंद्र बनने तक मानसिक दिव्यांगता के लिए करनाल या घरौंडा में किराए की बिल्डिंग में दिव्यांग केंद्र संचालित किया जाएगा। यहां पर 31 मार्च तक कक्षाएं स्थापित की जाएंगी।
150 दिव्यांगों के लिए हर समय उपलब्ध होंगे रेडक्रास सोसाइटी के पास उपकरण
राज्य आयुक्त राजकुमार मक्कड़ ने बताया कि प्रदेश में 22 रेडक्रॉस सोसाइटी हैं। अब इनको सरकार ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक सोसाइटी में हर समय 150 दिव्यांगों के लिए सहायक उपकरण मौजूद होने चाहिए। प्रदेश में एक लाख 88 हजार दिव्यांगों को प्रदेश सरकार हर माह ढाई हजार के हिसाब से पेेंशन दे रही हैं।
सीएम सिटी में चार साल से नहीं लगा असेसमेंट कैंप
दिव्यांग राज्य आयुक्त ने सीएम सिटी में पिछले चार साल में दिव्यांगों की दिव्यांगता के लिए असेसमेंट कैंप न लगने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि करनाल में 2018 से अभी तक कैंप न लगना बड़े अफसोस की बात है। अभी तक एक जिले में तीन साल में एक असेसमेंट कैंप लगना होता है।लेकिन अब हर साल यह कैंप लगेगा।
दिव्यांगों को अपना डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट के लिए चक्कर काटने की जरूरत नहीं रहेगी। इसके लिए उनका पंजीकरण गांव में बनी सीएससी पर ही किया जाएगा। असेसमेंट के लिए यह सीएमओ के पास जाएगा। इसके बाद अब न केवल जिला स्तर पर बल्कि प्रत्येक डिविजन पर यह सर्टिफिकेट बनेंगे।
15 हजार बैकलॉग की भर्ती की जाएगी
राज्य आयुक्त ने बताया कि दिव्यांगों के लिए सरकारी नौकरियों में 15 हजार बैकलॉग की भर्ती भी जल्द की जाएगी। सरकार ने दिव्यांगों को वर्ष 1996 से प्रमोशन में आरक्षण देने का प्रावधान किया है। दिव्यांगों की समस्याओं के निवारण के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तीन दिसंबर 2021 को विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर प्रदेश में एक पोर्टल की शुरुआत की है, ताकि दिव्यांगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।