बड़ा खुलासा : पूरा सिस्टम ही दिव्यांग,3 लाख दिव्यांग परेशान

आरटीआई में खुलासा : सिस्टम दिव्यांग,एक भी स्कूल में स्पेशल टीचर नहीं

• डायरेक्टर ने पिछले माह लोक शिक्षण आयुक्त को लिखा पत्र

• प्रदेश के तीन लाख से अधिक दिव्यांगों को अभी नहीं मिल रहा लाभ

भोपाल। दिव्यांगों को भी सामान्य बच्चों की तरह पढ़ाई का अधिकार है। कोविड प्रोटोकॉल के बाद भोपाल सहित प्रदेश के सभी स्कूल खुल गए है, लेकिन तीन लाख से अधिक दिव्यांग स्टूडेंट मुख्यधारा से जुड़ नहीं पा रहे हैं। वजह भी दो है। पहली, उनके लिए अभी तक आवासीय स्कूल खोलने के आदेश पर अमल नहीं हुआ है। दूसरी, स्पेशल बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होना है। समाजसेवियों का कहना है कि ऐसी लापरवाही के लिए जवाबदेह स्कूल शिक्षा विभाग के पास इस संवेदनशील मुद्दे के लिए न सोच है और न ही इच्छाशक्ति।

इस मामले में आयुक्त निशक्तजन ने तीन बार स्कूल शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग को पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने 29 अप्रैल 2008 को नि:शक्त महापंचायत बुलाई थी, जिसमें उन्होंने कई घोषणाएं की थी। उन पर अब तक अमल नहीं हुआ। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के किसी भी स्कूल में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के एक भी विशेष शिक्षक नहीं है। दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश दिए थे कि स्कूलों में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। लेकिन नया शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद भी विशेष शिक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू भर हुई है। बच्चे मोबाइल स्रोत के भरोसे: विशेष शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण शर्मा का कहना है कि सीएम ने घोषणा की थी कि प्रदेश के जिस स्कूल में मूक-बधिर, दृष्टिबाधित बच्चों की संख्या 8 से अधिक होगी।

डायरेक्टर ने पिछले माह लोक शिक्षण आयुक्त को लिखा पत्र

राज्य शिक्षा केंद्र ने पिछले महीने आयुक्त लोक शिक्षण को एक पत्र लिखा था। संचालक धनराजू एस. द्वारा आयुक्त को लिखे गए पत्र में दिव्यांग बच्चों की समावेशित शिक्षा के लिए सेल बनाने और विशेष शिक्षकों की नियुक्ति का जिक्र किया गया है। इसी पत्र में स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव के 25 अप्रैल के पत्र का भी हवाला दिया गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की रिट पिटिशन का भी हवाला दिया गया है।

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