आपकी भी जा सकती हैं सरकारी नौकरी,अगर आपने किया हैं यह काम ?

फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों से 12 जनों की गई नौकरी
फर्जी दिव्यांगो को होनी चाहिए जेल
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बांसवाड़ा। कृषि पर्यवेक्षक भर्ती में कई अभ्यर्थियों ने दिव्यांगता के फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नियुक्तिया ले ली। विभागीय जांच में इसकी पुष्टि हुई है। जांच में 12 अभ्यर्थियों के दिव्यांगता के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इन अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। फिलहाल दस्तावेजों की जांच चल रही है, जिसमें फर्जी प्रमाण पत्रों के और भी मामले सामने आ सकते हैं। जिन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं, विभाग अब उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कराने की भी तैयारी कर रहा है। जांच में सामने आया है कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए अभ्यर्थियों ने अपने सर्टिफिकेट में दिव्यांगता को ज्यादा दर्शाया। विभाग ने एसएमएस अस्पताल जयपुर में अभ्यर्थियों की दोबारा जांच कराई तो प्रमाण पन्नों में दर्शाई गई दिव्यांगता में अंतर पाया गया। दरअसल, भर्ती में विशेष योग्यजन के लिए 87 पद आरक्षित थे, जिसमें से एमआईडी/एमडी की श्रेणी में 20 फ्द थे। विभाग ने अभी तक एमआईडी/एमडी की श्रेणी के ही इन 20 अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र की जांच की, जिसमें से ही 12 फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले सामने आ गए।
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वंचितों को राहत नहीं… जगह रहेगी खाली, वेटिंग लिस्ट नहीं आएगी
फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच की मांग वे ही अभ्यर्थी कर रहे थे, जो कुछ अंकों से नौकरी लगने से रह गए। ऐसे अभ्यर्थियों ने प्रमाण पत्रों की जांच की मांग की ताकि उनकी नियुक्ति निरस्त होने पर उनका नम्बर आ सके। लेकिन विभाग ने साफ कर दिया है कि खाली हुए यदों पर वेटिंग लिस्ट नहीं आएगी। अभ्यर्थियों के फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर विशेष योग्यजन आरक्षण का लाभ लेने को लेकर भास्कर ने 15 अप्रैल 2022 को खुलासा किया । इसके बाद विभाग ने कमेटी बनाकर जांच की।
गड़बड़ी सामने आने के बाद 2 बड़े सवाल
- फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद चयन करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की विज्ञप्ति में लिखा है कि 40% या उससे अधिक विशेष योग्यजन को भर्ती में आरक्षण का लाभ मिलेगा, लेकिन 30% वालों को भी लिया।
- स्थायी प्रमाण पत्र वाले ही इस आरक्षण के पात्र माने गए। सवाल है कि आखिर इन अभ्यर्थियों को फर्जी प्रमाण-पत्र बनाकर किसने दिए। प्रमाण पत्र बनाने वाले मेडिकल टीम और सीएमएचओ से प्रमाणित करवाया गया या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
दिव्यांगता में अंतर आने पर हमने एसएमएस हॉस्पिटल में दोबाय जांच करई। जांच में फर्जीवाडा सामने आने पर चयन निरस्त कर दिया।
- हरेंद्र कुमार शर्मा; अतिरिक्त निदेशक, कृषि विभाग






