राजकीय उप स्वास्थ्य केंद्र अणतपुरा में , 3 हजार की आबादी वाले प्रखंड में चल रहा है झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे इलाज

राजकीय उप स्वास्थ्य केंद्र अणतपुरा में , 3 हजार की आबादी वाले प्रखंड में चल रहा है झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे इलाज

मोना कुमावत

अणतपुरा | कस्बे समर्पित ग्राम पंचायत अणतपुरा में 6महिने से दुवाई ना के बराबर है ओर लोगों को लेनी पड़ी रहे झुला छाप डाक्टरों की सरण ग्रामीण ने बताया कि गांवों में भी प्रारंभिक चिकित्सा के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाएं गए है। इन केंद्रों पर वर्तमान की सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने का दावा कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का यह दावा तहसील मुख्यालय पर दम तोड़ती नजर आ रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों व आवश्यक उपकरणों के न होने से मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा हैं। फलस्वरूप मरीजों को झुला बजारो डाक्टरों के पास जाकर उपचार कराने को बाध्य होना पड़ रहा है। । ऐसे में लोगों को प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्रों में कहां से बेहतर सुविधा मिलेगी। कई प्रखंडों के प्रमुख, उपप्रमुख, मुखिया व जनप्रतिनिधियों से बात करने पर पता चला कि सरकार गांवों से लेकर शहर के हर छोर पर ग्रामीणों के सुविधा के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र तो खोल रही है लेकिन वहां अणतपुरा में न तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति कर रही है और न ही उचित दवाएं उपलब्ध करा रही है। उपस्वास्थ्य केंद्रों पर यह सारी सुविधाएं नहीं होने के कारण लोगों को दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए लेकिन वर्तमान में कई केंद्रों में एक चिकित्सक ही पदस्थ है। वहीं कहीं एक नर्स के भरोसे ही स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। स्वास्थ्य केंद्र भी जर्जर हालत में : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य लेकिन अब तक कई गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का निर्माण नहीं कराया जा सका। हालाकि कई केंद्रों में वार्ड व ओटी का भी निर्माण कराया गया था। लेकिन वर्तमान में भवन जर्जर हो गया है। एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बरसात के समय भवन से पानी भी टपकता है। स्वास्थ्य केंद्र में विभिन्न रोगों का उपचार कराने के लिए रोजाना सैंकड़ों मरीज आते हैं। मरीजों को परेशानी उस समय होती है

इन कहाना है

इस उप स्वास्थ्य केन्द्र में गांव अणतपुरा, दीपुपरा, नाड़ा वालीं ढाणी, आई दान का बास, गीदा का बास, भुवाना बाबा की ढाणी, ज्ञाना बाबा की ढाणी नाड़ा वालीं ढाणी सहित आसपास के गांव सम्मिलित है| इमरजेंसी मे 40किलोमीटर दुर जाना पड़ता है दुवाई के लिए जैसे डिलीवरी केस, और भी विभिन्न बीमारियों के लिए दूर का सफर करना पड़ता है फुलेरा, जोबनेर, जयपुरिया पकड़ना पड़ता है| 

महंगी खरीदनी पड़ती है दवा

गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र होते हुए भी उन्हें छोटी से छोटी बीमारी के लिए भी गांव से बाहर जाना पड़ता है। उनका कहना है कि बाहर स्टोर से महंगी दवा भी खरीदनी पड़ती है जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। -गोपाल लाल यादव(समाजसेवी)

महिलाओं को होती है ज्यादा परेशानी

गांव निवासी माल चंद जांगिड़ ने बताया कि अस्पताल चालू होने से कोई फायदा नहीं है कारण महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र पर एक डाक्टरी तैनात हैं लेकिन सही सुविधा नहीं मिलने से महिलाओं को झेलना पड़ा रहा परेशान यदि इस उप स्वास्थ्य केन्द्र में सुविधा तो महिलाओं की छोटी मोटी बीमारी का इलाज संभव बन सके।

नहीं मिल रहा लाभ

उपस्वास्थ्य केंद्र का ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। उपस्वास्थ्य केंद्र के चालू होने के बाद भी ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपस्वास्थ्य केंद्र में सही समय से दुवाई का नहीं मिलना ओर यदि सही समय पर दवाई मिलते तो आम जनता को बहुत फायदा हो सकता है -गोपाल लाल शर्मा

जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं

गांव निवासी पांचू राम कुमावत ने कहना है कि सरकार से मिलने वाले धन का नीचे वाले लोग बंदरबांट कर रहे हैं। जनता की सुध लेने वाला कोई अधिकारी नहीं है और ना ही उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान दिया जा रहा है। -आनंदी लाल कुमावत (समाजसेवी)

कस्बे में प्राइवेट चिकित्सक के यहां जाना पड़ता है। दवा लेने जाने में महिलाओं को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि उपकेंद्र में डॉक्टर व दवाई उपलब्ध हो जाए तो बीमारी से पीड़ित लोगों को प्राइवेट चिकित्सक का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। -पांचू राम कुमावत

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