बाड़मेर- बाड़मेर में 2004 में मिले तेल के खजाने ने बाड़मेर के दुबई बनाने का सपना ऐसा दिखाया कि राज्य-केन्द्र के मुखिया भी यह कहने लगे कि बाड़मेर दुबई बन जाएगा,लेकिन बाड़मेर को दुबई बनाने के लिए अभी किया कुछ नहीं गया है। बैठे बैठाए और हाथ धरे दुबई बनने का सपना देखना खुद को मुगालते में रखना है। जरूरी है कि सरकारें इसके लिए प्रयास प्रारंभ करें। 3000 से 5000 करोड़ प्रति वर्ष तेल से राजस्व मिल रहा है। 43129 करोड़ की रिफाइनरी तैयार हो रही है और 1200 करोड़ का टर्न ओवर जैसलमेर के पर्यटन से हो रहा है। दुबई केवल एक शहर की परिकल्पना नहीं हों, बाड़मेर-जैसलमेर और जोधपुर तीनों को अब एक इकाई बनाकर दुबई का सपना देखने की जरूरत है। पत्रिका के नजरिए से देखिए कैसे बना सकते है हम इस मरूभूमि को दुबई- दुबई बनने की चार ताकतें बाड़मेर में दुबई बनने की पहली ताकत है तेल और कोयला। प्रचुर मात्रा में उपलब्ध तेल ने ही बाड़मेर को दुबई बनने का सपना दिखाया है। केन्द्र व राज्य सरकार इस पॉवर पर केन्द्रित होकर कार्य करें तो बाड़मेर आर्थिक संपन्नता का सिरमौर होगा। पर्यटन का विकास बाड़मेर-जैसलमेर और जोधपुर को जोड़कर हों और मारवाड़ को पर्यटन की आर्थिक राजधानी बनाया जाए। जोधपुर और जैसलमेर का पर्यटक वाया बाड़मेर निकले। चौथी ताकत है रोजगार और बसावट जिसने दुबई जाने और रहने को लोगों को मजबूर किया है,यही ताकत बाड़मेर में अब तेल के बूते आ रही है। 1. तेल 2004 में विश्व की सबसे बड़ी खोज मंगला के बाद बाड़मेर अब देश का सबसे यंग ऑयल फील्ड है जो बाड़मेर को दुबई बनाने की सबसे बड़ी ताकत है। तेल ने ही बाड़मेर को प्रदेश की आर्थिक राजधानी बनाया है। अब – 1.75 लाख बैरल तेल प्रतिदिन उत्पादन – 500 कुएं खोदे – 50 करोड़ दे रहे प्रतिदिन राजस्व – 3111 वर्ग किमी है क्षेत्र – 20 प्रतिशत देश का उत्पादन – 02 पर है बाड़मेर का उत्पादन(बाम्बे हाई नंबर 01) 2030 – 5.50 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन हों – 1000 कुएं खोदे जाए – 100 करोड़ प्रतिदिन देंगे – 6111 वर्ग किमी होगा क्षेत्र – 75 प्रतिशत होगा देश का उत्पादन – 01 होगा बाड़मेर(बॉम्बे हाई को पछाड़ेंगे) 2. कोयला ऊर्जा के क्षेत्र में कोयला बाड़मेर की दूसरी बड़ी ताकत है। यहां लिग्राइट आधारित पॉवर प्लांट से प्रतिदिन 1080 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। प्रदेश के करीब आधे हिस्से को बाड़मेर बिजली आपूर्ति करने की ताकत रखता है। अब – 1080 मेगावाट बिजली का उत्पादन – 08 इकाइयां कार्य कर रही है – 11 करोड़ सालाना राजस्व -6714578 मेट्रिक टन है उत्पादन 2030 – 2160 मेगावाट होगा बिजली उत्पादन – 16 इकाइयां कार्य करेगी – 30 करोड़ होगा सालाना राजस्व – 3 गुणा बढ जाएगा उत्पादन 3. पर्यटन समुद्र और रेगिस्तान से घिरे दुबई को सपनों की नगरी बनाने के लिए एक नक्शा बना और फिर समुद्र में होटलें और पर्यटन स्थल, बुर्ज खलीफा जैसी बड़ी इमारत, स्वच्छता के साथ शहर का निर्माण और इतने मानक तय किए गए कि यह विश्व की पसंद बन गया। तेल और पर्यटन की आमदनी अब दुबई में लोगों को आकर्षित करती है। यहां सुरक्षा को लेकर नियम कायदों की पालना इतनी है कि 123 देशों के लोग यहां बसकर खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे है। तेल के बाद पर्यटन राजधानी बने मरूभूमि बाड़मेर में तेल के खजाने ने जोधपुर को भी निहाल किया है। जोधपुर संभागीय मुख्यालय है और रिफाइनरी क्षेत्र से महज 100 किमी दूर है। बाड़मेर केन्द्र बिन्दु और बाड़मेर का पड़ौसी जिला है जैसलमेर। जैसलमेर में 8 लाख सैलानी, बाड़मेर में 10 लाख धार्मिक पर्यटन नाकोड़ा-आसोतरा-जसोल और जोधपुर में भी 10 लाख से अधिक सैलानी आ रहे है। इन सबके लिए एक कॉरीडोर बनाकर तीनों ही जिलों में अब पर्यटन के द्वार खोलने की दरकार है। यों हों पर्यटन का रोड़ मैप- जैसलमेर और बाड़मेर में हवाई कनेक्टिविटीजैसलमेर में हवाई सेवाओं का विस्तार हों और बाड़मेर में प्रस्तावित हवाई सेवा शीघ्र प्रारंभ की जाए। – जैसलमेर और बाड़मेर के लिए लंबी दूरी की रेलें – रेगिस्तान के इस इलाके को देखने के लिए होटल उच्च स्तर के बनाने को उद्यमियों को प्रेरित किया जाए।- रेगिस्तान के गांव देखने को लोग पहुंचे इसके लिए कला-संस्कृति और पुरातन संस्कृति से जुड़े गांवों को तैयार किया जाए यों बने रूट मैप- -जोधपुर पर्यटन के सभी स्थलों को जोड़ा जाए – बाड़मेर में रिफाइनरी, आसोतरा, जसोल, नाकोड़ा, कनाना की गैर, तिलवाड़ा का मेला स्थल, सिवाना का दुर्ग, किराडू के मंदिर, महाबाद के धोरे, रोहिड़ी के धोरे, रेलवे शहीद स्थल, बायतु में तेलक्षेत्र, बॉर्डर टूरज्मि, बाड़मेर का वॉर म्युजियम, देवका के सूर्य मंदिर सहित सभी स्थलों का रूटमैप बने जो आगे जाकर जैसलमेर तक जुड़े – जैसलमेर आने वाले पर्यटकों को भी वाया बाड़मेर जोधपुर तक ले जाने के लिए रेल सुविधा, बस सुविधा का मार्ग दिया जाए 4. रोजगार और बसावट दुबई में तेल के बूते रोजगार का सृजन हुआ तो लोग यहां पर्यटन के लिए ही नहीं आए यहीं के होकर रह गए। देश-विदेश से लोग दुबई जाकर आर्थिक मजबूूती का सपना देख रहे है, यही मजबूती बाड़मेर को देनी होगी। रोजगार के अवसरों की विपुल संभावनाएं बाड़मेर में है बस इसको आर्थिक राजधानी के तौर पर विकसित करने की दरकार है। रोजगा सृजन के ये है आधार – 43129 करोड़ की रिफाइनरी पचपदरा – 6000 करोड़ का पेट्रो केमिकल कॉम्पलैक्स पचपदरा – 1200 कारखानों का पॉपलीन शहर बालोतरा – मंगला टर्मिनल तेल क्षेत्र बायतु – 25000 महिलाओं का हैण्डीक्राफ्ट उद्योग बाड़मेर – 1080 मेगावाट का पॉवर प्लांट भादरेस – 75000 घनफीट गैस क्षेत्र गुड़ामालानी – 50 हजार कुओं का सिंचित क्षेत्र संपूर्ण जिला