33689 पदों की भर्ती का है मामला: गहलोत सरकार ने प्रदेश के 12 लाख बेरोजगारों के सपनों व उम्मीदों पर फेरा पानी,
नियमित विधालय सहायक भर्ती – 2015 के पद पर दे रही हैं अस्थाई संविदा नियुक्ति
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सुखराम मीणा/दिव्यांग जगत
जयपुर- (सुखराम मीणा) – राजस्थान प्रदेश के युवाओं के लिए 33689 हजार पदों पर शिक्षा सहायक भर्ती/विधालय सहायक भर्ती निकाली गई थी। इसमें एक साल के अनुभव के लिए 10, दो साल पर 20 व 3 साल पर 30 अंक देने का प्रावधान था। बोनस अंकों को लेकर विवाद हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और भर्ती को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी भी मिल गयी थी साथ ही डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए शिक्षा विभाग द्वारा मेरिट लिस्टे भी जारी कर दी गयी थी लेकिन सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति के कारण भर्ती को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका उसके बाद। तत्कालीन सरकार ने 13 दिसंबर 2014 को शिक्षा सहायक भर्ती रद्द कर इसके स्थान पर 33,493 पदों पर विद्यालय सहायक के नाम से नई भर्ती की घोषणा की।
सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे विद्यार्थी मित्रों सहित 12 लाख उन अभ्यर्थियों को झटका लगा है, जिन्होंने विद्यालय सहायक भर्ती के लिए आवेदन किया था। सरकार ने हाल में विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया है कि यह भर्ती रद्द हो चुकी है। दूसरी ओर, अभ्यर्थी यह समझ रहे थे कि इस भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उम्मीद कर रहे थे कि उनके हक में फैसला आ सकता है। बता दें कि पांच साल पहले 21 जुलाई, 2015 को राज्य सरकार ने संविदा पर काम कर रहे विद्यार्थी मित्रों व अन्य के समायोजन के लिए यह भर्ती निकाली थी। इसमें 33,493 पद थे। इन पदों के लिए 12,03,013 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
इन पदों को अब राजस्थान के इतिहास की सबसे बड़ी फर्जी भर्ती पंचायत सहायक 2017 के कार्मिको को पुन: किया जा रहा है समायोजित-
गौरतलब है की पूर्ण पूर्ववर्ती सरकार बीजेपी द्वारा राजस्थान के संविदा कार्मिकों के लिए पंचायत सहायक भर्ती 2017 का आयोजन किया गया था-
मुख्य बिंदु पंचायत सहायक भर्ती के –
01.- पंचायत सहायक भर्ती 2017 मे 33 जिलों में 33 जिलों में अनुसार अपने अपने हिसाब से नियम बनाये गए थे।
02.- प्रदेश में संविदा कार्मिको को कोई नीयत बोनस अंक का प्रावधान नही किया गया।
03.- भर्ती का जिम्मा PEEO को दिया गया था, अपने चेहतो के अनुसार नियम बनाये गए।
04.- बीजेपी सरकार की भर्ती होने के कारण राजनीति व भाई भतीजा वाद हावी रहा।
05.- 3-4 चरणो मे भर्ती प्रक्रिया का होना वो भी प्रत्येक बार अलग अलग प्रक्रिया से।
06.- पंचायत सहायक भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता कम से कम 12 वीं पास रखी गई थी फिर भी इसमें दसवीं पास लगभग 100 से अधिक लोगों का चयन किया गया जो आज भी अपनी संविदा नौकरी कर रहे हैं।
07.- PEEO व पूर्णवृत्ति सरकार द्वारा चयन के स्पष्ट नियमो द्वारा योग्य अनुभव धारियों को दर किनार कर अयोग्य लोगो को चयन।
08.- पहले विज्ञप्ति मे उम्र की बाध्यता अधिकतम 40 साल थी उसके बाद भी 40 साल से ज्यादा आयु के लोगो का चयन
09.- धांधली व फर्जी भर्ती होने के कारण आज 1200 से 1500 ग्राम पंचायतों मे खाली पद पड़े है व सैकड़ो मामले न्यायलय व उच्च न्यायालयों मे पेंडिंग पड़े है।
सबसे खास और अहम बात-
राजस्थान के इतिहास की यह पहली भर्ती है जिसमें SC/ST/OBC व विधवाओं के साथ दिव्यांगजनों को 0.1 प्रतिशत भी आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। जबकि हाल ही में विद्या संबल योजना जो कि 93 हजार पदों पर की जा रही थी। उसे सिर्फ राजस्थान सरकार द्वारा इसलिए रोक दिया गया की उसमें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा था।
12 लाख युवा इसलिए है सरकार से आक्रोशित-
राजस्थान के युवाओं का कहना है की राजस्थान सरकार ने जो नियमित भर्ती विद्यालय सहायक 33689 पदों पर निकाली थी उसमें एक एक आवेदन कर्ता ने 33 – 33 जिलो से आवेदन किया था और सरकार के पास फीस के रूप में करोड़ों रुपए जमा है तो उस भर्ती में जिन लोगों ने आवेदन किया है। उन्हीं को मौका मिलना चाहिए क्योंकि उनके पास सरकार का करोड़ों रुपए जमा है।
फैक्ट फाइल-
विधालय सहायक भर्ती – 2017 के फीस का विवरण-
सामान्य के लिए 275 रुपए शुल्क, रिजर्व कैटेगिरी के लिए 175 रुपए
इस भर्ती में सामान्य, ओबीसी और एमबीसी (क्रीमीलेयर) के लिए शुल्क 275 रुपए, एससी, एसटी, ओबीसी (नॉन क्रीमीलेयर) के लिए 175 रुपए निर्धारित किया गया था। आवेदनों से ही सरकार के खाते में 25 करोड़ रुपए जमा हो गए। एफडी के हिसाब से इस राशि का पांच साल का ब्याज ही पांच करोड़ रुपए बन रहा है।
फैक्ट फाइल-
- विद्यालय सहायक भर्ती के आवेदनों से ही आए 25 करोड़ रुपए!
- पांच साल का ब्याज ही पांच करोड़ पार है।
ये है विधा संबल का मामला-
राजस्थान विद्या संबल योजना – राजस्थान में भर्ती होनेवाले 93 हजार शिक्षकों की उम्मीदों को झटका लगा है। शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योजना पर आरक्षण विवाद की वजह से ब्रेक लग गया है। गहलोत सरकार अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में 93 हजार पदों पर शिक्षकों की भर्ती करने जा रही थी। विद्या संबल योजना से बेरोजगार शिक्षित आशान्वित थे। आरक्षण का विवाद शुरू होने पर बीकानेर निदेशालय में माध्यमिक शिक्षा निदेशक गौरव अग्रवाल ने विद्या संबल योजना स्थगित करते हुए रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया। योजना पर लगी रोक शिक्षा विभाग ने आगामी आदेश तक लगाई है।
आरक्षित वर्ग को आरक्षण ना देने से विधा संबल योजना को किया गया स्थगीत-
विद्या संबल योजना के तहत महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यमिक विद्यालय में रिक्त पड़े अध्यापक पदों पर 93 हजार शिक्षक, पीटीआई और लैब तकनीकी सहायकों की भर्ती होनेवाली थी। ओबीसी आरक्षण की विसंगतियों को दूर करने के बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े संगठन मैदान में आ गए। आरोप था कि गहलोत सरकार ने शिक्षक भर्ती योजना में आरक्षण के प्रावधानों का पालन नहीं किया। भविष्य में भर्तियों को सरकार नियमित कर देगी। उन्होंने सीएम गहलोत से आरक्षण नियमों का कड़ाई से पालन करने की मांग की। आरोप लगाए जा रहे थे कि बैकडोर से एंट्री की जा रही है। उन्होंने एतराज जताते हुए संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया।
फैक्ट रिपोर्ट कार्ड रिपोर्ट-
उक्त में संदर्भ में यहां पर सरकार की कथनी और करनी में रात दिन का अंतर नजर आ रहा है। और यही कारण है की राजस्थान प्रदेश का युवा सरकार के खिलाफ आक्रोशित है एक ऐसी भर्ती जो पूर्ण रूप से बिना आधार के और राजनीति से प्रेरित, अस्पष्ट नियमों व मनमर्जी से चयनित युवाओं को तो राजस्थान सरकार नियमित भर्ती के पदों में खपाने की कोशिश कर रही है वो भी उन पदों पर जिसमे युवावो का अभी तक विश्वास कायम है वहीं दूसरी ओर विधा संबल योजना में भर्ती को रोक व स्थगित करके कह रही है कि उसमें आरक्षण संबंधित विसंगतियां हैं। इसलिए उस भर्ती को स्थगित कर दिया गया है। प्रदेश के लाखो युवाओं के यह समझ में नहीं आ रहा कि है की प्रदेश की गहलोत सरकार द्वारा नियमित भर्ती के पदों में दोबारा संविदा कर्मियों को खपाने कोशिश कर रही है। जोकि पूर्ण रूप से बिना नियमों व भाई भतीजा वाद से ग्रसित भर्ती थी। जिसे खुद कांग्रेस सरकार के नेता पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पंचायत सहायक भर्ती की हजार खामियों को उजागर कर पूर्ववर्ती सरकार को कटघरे में खड़ा किया था कि यह भर्ती विद्यार्थी मित्रों व अन्य लोगो के हितो पर कुठाराघात कर राजस्थान के युवाओ के हितो, संविदा कार्मिको व विधार्थी मित्रो के प्रति साजिश की जा रही है जिसमें राजस्थान के लाखो युवावों का भविष्य अंधकार में है। और अब उन्हीं अभ्यर्थियों को नियमित भर्ती के पदों में खपाने की कोशिश गहलोत सरकार द्वारा की जा रही है।
जिसमें देश के 12 से 15 लाख युवावों में भारी आक्रोश है उनका कहना है कि यदि सरकार जबरदस्ती युवावों के सपनो को चकनाचूर करती हैं तो आने वाले लोक सभा व विधान सभा चुनावों में पुरजोर तरीके से कांग्रेस सरकार का विरोध कर उसकी युवाओं के प्रति नकारात्मक सोच और भृष्ट राजनीति तंत्र व युवाओं के हितों पर कुठाराघात उनकी राजनीति में राजस्थान में अंतिम कील साबित होगी।
अभी भी राजस्थान सरकार को चाहिए कि वह जल्दी ही निर्णय लेकर राजस्थान के समस्त संविदा कर्मियों की भर्ती विद्यालय सहायक – 2015 को पूर्ण कर अपने घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करें अन्यथा राजस्थान का युवा सरकार की ओछी मानसिकता को ध्यान में रखते हुए आगामी लोकसभा विधानसभा चुनावों में राजस्थान की कांग्रेस सरकार का सुपड़ा साफ करने में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाएगा और निभाता रहेगा।