मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नसीराबाद में चल रहे भारतीय भाषा शिविर के चौथे दिन छात्रों और शिक्षकों ने केरल की समृद्ध खान-पान परंपरा और मसालों की अनूठी दुनिया से परिचय प्राप्त किया। दिन का विषय था: “केरल के मसाले एवं पारंपरिक भोजन”, जिसे छात्रों ने न केवल जानने-समझने का प्रयास किया, बल्कि विभिन्न माध्यमों से प्रस्तुत भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत केरल की पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों द्वारा संबोधन और “केरला कुजीन” विषयक परिचय से हुई। इसके पश्चात एक लघु फिल्म के माध्यम से उपस्थितजनों को केरल के मसाले जैसे काली मिर्च, दालचीनी, इलायची, जायफल, और करी पत्ते की खेती, उपयोग ,औषधीय गुणों व मलयाली भाषा में उनके नाम का उच्चारण से अवगत कराया गया।
खान-पान की झलकियों में ‘सांभर’, ‘अवियल’, ‘पुट्टु-कडाला करी’, ‘अप्पम’, ‘एरिश्ट्टू’ और ‘पायसम’ जैसी पारंपरिक व्यंजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। विद्यार्थियों ने इन व्यंजनों के बारे में जानकारी देते हुए रंग-बिरंगे पोस्टर, मॉडल्स और चार्ट्स प्रस्तुत किए।
विद्यालय की प्राचार्य आर. सी. मीणा ने छात्रों के उत्साह और रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा, “भाषा और संस्कृति एक-दूसरे की पूरक हैं। ऐसे शिविर बच्चों को विविधता में एकता का वास्तविक अनुभव कराते हैं।”
शिविर मे मलयालम भाषा की शिक्षिका श्रीमती वरना बीजू द्वारा शिविर में उपस्थित कर्मचारी छात्रों को केरल का प्रसिद्ध इडली, सांभर ,नारियल की चटनी का अल्पाहार कराया गया।
भारतीय भाषा शिविर के प्रभारी रंजीत कुमार ने बताया की यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक शैक्षिक एवं सांस्कृतिक उत्सव सिद्ध हो रहा है, जिसमें भारत की भाषाई विविधता के साथ-साथ क्षेत्रीय खान-पान, पहनावा और जीवनशैली को भी जानने का अवसर मिल रहा है।