विशेष: सेढ़ महामाई शीतला माता का विशाल मेला 03 अप्रैल को ग्राम बबेड़ी में होगा आयोजित

सेढ़ महामाई शीतला माता का विशाल मेला 03 अप्रैल को ग्राम बबेड़ी में होगा आयोजित

गायक कलाकार के संमा के साथ 51 हजार का होगा कुश्ती दंगल कामड़ा

सुखराम मीणा/ दिव्यांग जगत

बानसूर – बानसूर उपखण्ड क्षेत्र के ग्राम बबेड़ी में हर वर्ष की भांति इस वर्ष 03 अप्रैल वार शुक्रवार को सेढ शीतला माता के विशाल और भव्य मेले का आयोजन ग्राम पंचायत बबेड़ी की पहाड़ियों में माता के मंदिर प्रांगण में भव्य और रंगा रंग रागनी प्रोग्राम की प्रस्तुति क्षेत्र के जाने माने गायक कलाकार मनोज कारना एंड पार्टी की तरफ से आयोजित होगा एव साथ ही मेले का मुख्य आकर्षण कुश्ती दंगल का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें देश भर के पहलवान अपना हुनर दिखाएंगे जिसमे अन्तिम एव कुश्ती दंगल का कामड़ा 51 हजार रूपए का होगा। ये उक्त जानकारी समाजसेवी महेन्द्र कुमार गुर्जर ग्राम पंचायत बबेड़ी के द्वारा दी गई एव आयोजन कार्यकर्ताओ द्वारा बताया गया की मेले की सम्पूर्ण तैयारियां पूर्ण रुप से पूरी कर ली गई है जिसमें की शीतला माता के भक्तो के लिए ठंडे पेयजल आपूर्ति सहित पार्किंग स्थल की चौक चौबंद व्यस्था कर ली गई जिस से की किसी भी जात्रियो को कोई असुविधा का सामना नही करना पड़े। आयोजन कर्ता समस्त ग्रामवासी बबेड़ी ओर प्रशासन की तरफ से आमजन से अपील की गई की सभी मेले के आगंतुक मेले की व्यस्थाओ में आयोजनकर्ताओं का सहयोग कर आमजन को राहत प्रदान करें।

ये है शीतला माता के व्रत की प्राचीन कथा एव मान्यता –

शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी, वैशाख, जेष्ठ और आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी पूजन करने का प्रावधान है। इन चारों महीने के चार दिन का व्रत करने से शीतला जनित बीमारियों से छुटकारा मिलता है। इस पूजन में शीतल जल और बासी भोजन का भोग लगाने का विधान है। श्रद्धालु शीतला अष्टमी का व्रत रखकर माता की भक्ति करके अपने परिवार की रक्षा करने के लिए माता से प्रार्थना करते हैं। इस बार मतांतर से 3 अप्रैल को शीतला सप्तमी/ शीतलाष्टमी/बसौरा पर्व मनाया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि शीतला माता भगवती दुर्गा का ही रूप है। भारतीय उपासना पद्धति जहां मनुष्य को आध्यात्मिक रूप से मजबूत करती है वहीं शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर करने का भी इसका उद्देश्य होता है। कहा जाता है कि गर्मी के दिनों में शरीर में अनेक प्रकार के पित्त विकार भी प्रारंभ हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि शीतला अष्टमी का व्रत रखने से छोटी माता का प्रकोप नहीं होता।

इस व्रत में अष्टमी के दिन कलश स्थापित कर माता का पूजन किया जाता है तथा प्रार्थना की जाती है कि- चेचक, गलघोंटू, बड़ी माता, छोटी माता, तीव्र दाह, दुर्गंधयुक्त फोड़े, नेत्र रोग और शीतल जनित सभी प्रकार के दोष शीतला माता की आराधना, पूजा से दूर हो जाएं। इस दिन शीतला स्त्रोत का पाठ शीतल जनित व्याधि से पीड़ितों के लिए हितकारी है। स्त्रोत में भी स्पष्ट उल्लेख है कि शीतला दिगंबर है, गर्दभ पर आरूढ है, शूप, मार्जनी और नीम पत्तों से अलंकृत है। इस अवसर पर शीतला मां का पाठ करके निरोग रहने के लिए प्रार्थना की जाती है।

कथा विधि संकलन एव सहयोग –
सुखराम मीणा (बसई चौहान)
पत्रकार दिव्यांग जगत
सहयोगी – महेन्द्र कुमार गुर्जर (समाजसेवी)
अटल सेवा केन्द्र – ग्रां. प. – बबेड़ी

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