जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एक विश्व एक ह्रदय कार्यक्रम रविवार को होगा आयोजित

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में ‘एक विश्व एक हृदय’ कार्यक्रम रविवार को आयोजित किया जाएगा ।
संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा द्वारा घोषित विश्व ध्यान दिवस (21 दिसम्बर )के उपलक्ष्य में जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉ भीमराव अंबेडकर सभागार में रविवार को प्रातः 9 से 11 बजे तक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा । इसके मुख्य अतिथि जल संसाधन मंत्री, राजस्थान सरकार, माननीय सुरेश सिंह रावत होंगे । मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉक्टर अनिल सांवरिया ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन में शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रसार करना है l
कार्यक्रम में डॉक्टर पार्थ सिंह, मनोचिकित्सक जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, के द्वारा मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला जाएगा।
कार्यक्रम समन्वयक डॉक्टर विकास सक्सेना ने जानकारी दी कि कार्यक्रम के दौरान तनाव, चिंता, निराशा, अवसाद आदि से मुक्ति पाने हेतु कुछ समय रिलैक्सेशन तथा ध्यान का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम में डॉक्टर अनुराधा झा, अमित खंडेलवाल तथा नेहा कपूर के सत्र भी रहेंगे।
ध्यान के परिणामों के प्रभाव के विषय में ज्ञातव्य है कि महर्षि महेश योगी द्वारा ‘महर्षि प्रभाव’ नामक सिद्धांत में पाया गया है कि यदि किसी स्थान की जनसंख्या के 1% लोग सामूहिक रूप से ध्यान करते हैं तो उस स्थान में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे अपराध दर, हिंसा, दुर्घटना, रोग कम होते हैं और सामाजिक व आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
1993 में वॉशिंगटन डी सी में अपराधों में 23.3% की कमी देखी गई थी, जिसे ‘महर्षि प्रभाव’ से जोड़कर देखा गया। महर्षि प्रभाव पर लगभग 50 वैज्ञानिक शोध हुए हैं जो सामाजिक आंकड़ों का उपयोग करके इन प्रभावों को मापने का दावा करते हैं। संक्षेप में, महर्षि प्रभाव सामूहिक ध्यान के माध्यम से विश्व शांति और समाज में सुधार लाने की एक अवधारणा है जो व्यक्तिगत चेतना द्वारा सामूहिक चेतना पर प्रभाव डालने के विचार पर आधारित है। इसी प्रकार का एक अध्ययन अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में किया गया। शोधकर्ता थे डॉक्टर विकास सक्सेना तथा इंजीनियर अंकुर तिलक गहलोत। इस प्रयोग में 12 हफ्ते तक ध्यान का साप्ताहिक प्रशिक्षण दिया गया । इसका उद्देश्य था- ध्यान द्वारा व्यवहार में सकारात्मक रूपांतरण का पता लगाना। परिणाम में पाया गया कि अनेक लोगों के व्यवहार में परिवर्तन आया। साथ ही, कार्य के दौरान विद्युत करंट से होने वाली दुर्घटनाओं में भी काफी कमी देखी गई।

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