8वी-10 वी के एक हजार स्कूलों को सी.सैकण्डरी बनाया, शाला दर्पण मे नाम बदले लेकिन बोर्ड रिकॉर्ड मे अब भी 10 वी स्तर
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर । अजमेर के एक दर्जन सहित प्रदेश के करीब 1 हजार स्कूलों को राज्य सरकार ने अलग-अलग चरणों में 8वीं व 10वीं के स्तर से क्रमोन्नत कर उच्च माध्यमिक स्तर का कर दिया है। सरकार के आदेश की अनुपालना में शाला दर्पण पर इनके नए नाम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हो गए लेकिन शिक्षा बोर्ड और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में सामंजस्य नहीं होने से बोर्ड के पोर्टल पर ये स्कूल अब भी 10वीं के ही बने हुए हैं। इस कारण छात्र-छात्रा की अंक तालिका पर भी स्कूल का नाम उच्च माध्यमिक की जगह माध्यमिक स्कूल ही लिखा जाएगा।
यानी 12वीं तक के स्कूल में पढ़ाई की है, लेकिन मार्कशीट में नाम 10वीं तक के स्कूल का आएगा। अजमेर में राजकीय माध्यमिक विद्यालय बालुपुरा रोड, राजकीय माध्यमिक विद्यालय आदर्श नगर, राजकीय माध्यमिक विद्यालय पीपल का कुआं, राजकीय माध्यमिक विद्यालय मंगल चंद्र संखलेचा, राजकीय ओसवाल जैन माध्यमिक विद्यालय, रा. मा. विद्यालय बड़बाव, रा. मा. विद्यालय खानपुरा, राजकीय माध्यमिक विद्यालय चौरसियावास, राजकीय माध्यमिक विद्यालय कोटड़ा, राजकीय माध्यमिक विद्यालय उसरी गेट सहित विभिन्न स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें क्रमोन्नत कर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का दर्जा दे दिया गया है।
ऐसे ही प्रदेश में अन्य स्कूल हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक प्रथम चरण में राज्य सरकार ने माध्यमिक स्तर के 700 विद्यालयों को उच्च माध्यमिक विद्यालय बनाया था। बाद में अलग-अलग चरणों में करीब 300 उच्च प्राथमिक स्कूलों को भी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्रमोन्नत कर दिया था।
ऐसे खुला मामला
रा. मा. विद्यालय आदर्श नगर की ओर से बोर्ड को शाला दर्पण के अनुसार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आदर्श नगर करने के लिए आग्रह किया। सरकार के आदेश के अनुसार शाला दर्पण पर आदर्श नगर स्कूल का नया नाम इंद्राज हो गया है लेकिन बोर्ड के पोर्टल पर अब भी यह माध्यमिक ही नजर आ रहा है। गत बजट सत्र में जिन विद्यालयों को माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत किया था। एक वर्ष के बाद भी माध्यमिक के रूप में ही प्रदर्शित हो रहे हैं।
कुछ नाम परिवर्तित या संशोधित
सरकारी स्तर पर कुछ विद्यालय का नाम परिवर्तित या संशोधित किया है। कई के आगे दानदाता, भामाशाह अथवा शहीद के नाम पर नामकरण किया है। ऐसी स्थिति में शाला दर्पण शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में ऑनलाइन पोर्टल पर विद्यालय का नया नाम दिखाई दे रहा है, जो कि शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड अनुसार सही है।