तीसरे दिन सुबहु मरीच, अहिल्या उद्धार, फुलवारी ,जनक संदेश का मंचन हुआ

तीसरे दिन सुबहु मरीच, अहिल्या उद्धार, फुलवारी ,जनक संदेश का मंचन हुआ*

रिपोर्टर – भगवत शर्मा
दिव्यांग जगत न्यूज पेपर & चैनल

भगवान नारायण सेवा संस्था रजिस्टर्ड द्वारा श्री कृष्णा ड्रामेटिक क्लब अनाज मंडी के मंच पर तीसरे दिन सुबाहु मारीच, फुलवारी ,जनक संदेश,अहिल्या उद्धार लीला का मंचन हुआ रामलीला के प्रधानभगवान सैनी ने बताया कि रामलीला में मुख्य अतिथि साधु राम सैनी अध्यक्ष अश्विनी यादव (राधा कृष्णा मैरिज पैलेस) के द्वारा सरस्वती मैया के दीप प्रज्वलित कर गणेश पूजन के साथ रिबन काटकर लीला प्रारंभ करवाया रामलीला में हरिओम गर्ग (श्री श्याम आस्था मंडल के प्रधान) तथा रामनारायण चौधरी विशिष्ट अतिथि थे रामलीला के सचिव मनोज निर्मल ने बताया की जब राम लक्ष्मण ताड़का को मार देते हैं तब यह बात सुबाहू मरीच को पता लगती है तो सुबह मारीच ताड़का का बदला लेने के लिए राम लक्ष्मण से युद्ध करने वन में आते हैं और युद्ध करते करते सुबाहु मारा जाता है और मरीच डर कर भाग जाता है वन में रास्ते में अहिल्या रूपी सिला भगवान राम लक्ष्मण को दिखाई देती है तब भगवान विश्वामित्र जी से शीला के बारे में पूछते हैं विश्वामित्र जी कहते हैं कि यह अहिल्या है जो गौतम ऋषि के श्राप के कारण पत्थर की शिला रूप में रह गई है आप इसे अपने चरणों से स्पर्श करके अहिल्या रूप में बना दें तब भगवान चरण स्पर्श से अहिल्या को श्राप मुक्त करते हैं अहिल्या भगवान से प्रार्थना करती है प्रभु आप मुझे परम धाम जाने का आशीर्वाद दें राजा जनक अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए एक स्वयंवर धनुष यज्ञ का आयोजन करते हैं जिसका निमंत्रण विश्वामित्र जी के पास उनका दूत लेकर आता है तभी विश्वामित्र जी राम लक्ष्मण को भी अपने साथ ले जाते हैं वहां विश्वामित्र जी राम लक्ष्मण को फूल लाने के लिए कहते हैं तब राम लक्ष्मण वन में फूल लेने जाते हैं वन में राजा जनक की फुलवारी में फूल तोड़ने जाते हैं तो माली उन्हें रोककर कहता है कि आप इस फुलवारी में नहीं जा सकते आप को जनक नंदिनी की जय बोलनी होगी तब दोनों जनक नंदिनी की जय बोलते हैं और फुलवारी से फूल तोड़ते हैं फुलवारी में उनकी मुलाकात सीता से होती है सीता उन्हें दूर से देख कर चली जाती है राम लक्ष्मण वहां पर विचरण करते हुए कहते हैं की है पुष्प वाटिका बनी मनोहर प्यारी की है पुष्प वाटिका सबसे मनोहर है फिर राम लक्ष्मण फूल तोड़ कर विश्वामित्र जी के पास चले जाते हैं लीला को यहीं पर विराम दिया जाता है, राम- पार्थ कंछल ,लक्ष्मण- ध्रुव वर्मा, विश्वामित्र -पारस गर्ग, सुबहु- जगदीश बिल्ला ,मारीच- महावीर ,अहिल्या -आयुष शर्मा, माली- ईशान मित्तल, सखी- बालवीर, आयुष शर्मा, संदेशवाहक -वासुदेव सिंघल ,मंच संचालक- भारत भूषण तायल आदि कलाकारों ने अपनी कला से सबका मन मोह लिया संजय गौड़, दीपक सेन, राहुल वर्मा ने सभी पात्रों का बड़ा ही मनमोहक मेकअप किया ऐसा लग रहा था मानो भगवान साक्षात रामलीला स्टेज पर आ गए हो रामलीला मंचन में मनोज निर्मल, आलू भाटा, विजय जैन, विकास कटारिया,सुशील चौटाला, जोगिंदर शर्मा, संजय वर्मा ,संजय दुलगच, विष्णु , योगेश कौशिक, मोनू भाटा, होशियार, अरविंद सैनी,मुकेश शर्मा, राकेश साउंड, संजय गौड़, सिंघल, तायल, भारत भूषण कंछल, वासुदेव, गौरव सिंघल, राहुल वर्मा, महावीर, ईशान मित्तल, पप्पी छक्कड़, रामकिशन सेठ जी चक्की वाले उप प्रधान रामलीला कमेटी, आदि सदस्यों का सहयोग रहा

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