मार्क्सवादी विचारक महादेव चतुर्वेदी ने लिया सन्यास,
महादेव चतुर्वेदी से बने अब मार्क्सवादी चिंतक बाबा महादेव ।
भारत कुमार शर्मा/दिव्यांग जगत
नारायणपुर:-मार्क्सवादी विचारक व चिंतक तथा महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य महादेवी चतुर्वेदी ने जीवन के 75 वर्ष पूरे कर आज संयास आश्रम में प्रवेश किया ।
संयास आश्रम में प्रवेश के दौरान उन्होंने एक समारोह भी आयोजित किया ।
जिसमें उनके परिवार से रिश्तेदार ,मित्र , व अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
संयास आश्रम में प्रवेश करने के उपरांत उन्होंने अपने सन्यास लेने की अवधारणा को भी बताया ।
उन्होंने कहा कि सन्यास आश्रम भारतीय संस्कृति का एक पार्ट है सनातन धर्म में जीवन के चार भाग किए हैं ब्रह्मचर्य ,ग्रहस्थ,वानप्रस्थ व संन्यास ।
उन्होंने कहा कि मेरा जो सन्यास है वह कुछ अलग से हटकर है सन्यासी का मतलब यह नहीं कि आप घर परिवार छोड़कर वन व जंगलों में रहने लग जाए ।सन्यासी का मतलब है खुद को भीतर से मोड़ना है उन्होंने कहा कि अब मैं सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर निष्काम भाव से जीवन जीना चाहता हूं
उन्होंने कहा कि मैं जीवन भर नास्तिक रहा हूं और विवेक के आगे ईश्वरीय शक्ति नहीं होती है मैं माया मोह काम क्रोध इन बुराइयों से दूर रहकर जीना चाहता हूं सन्यास मोक्ष प्राप्त करने का एक आश्रम है
राम राम, राधे राधे भजने से मोक्ष प्राप्त नहीं होती है मोक्ष तो मोह त्यागने से ही प्रसप्त होती है उन्होंने कहा कि मार्क्सवादी विचारों का मेरे जीवन में प्रभाव रहा है और मेरे लिए मार्कस ही मेरे आराध्य है