क्राइम न्यूज
तिरिया चरित्रम पुरुशस्य भाग्यम
देवो ना जानामि कुते मनुष्य:
भरतपुर के पवन शर्मा हत्याकांड का पर्दाफाश
इश्क मे पागल महिला ने अपने सुहाग को प्रेमी के साथ मिलकर मार नदी मे फेका
आज जैल मे सीखचों के पीछे पडी पश्चाताप के बहा रही है आंसू
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर । पुरानी कहावत है कि औरत के मन को समझ पाना देवताओं के भी वश की बात नहीं है , फिर भला आम आदमी की औकात ही क्या है .. ये हेरतंगेज कहानी राजस्थान के भरत पुर जिले की है जहां एक अतृप्त विवाहिता ने आत्म तुष्टि के लिए सारी हदें पार कर लीं..और अपने ही हाथों अपनी हरी भरी गृहस्थी खुद ही उजाड़ दी और आज जेल के सींखचों के पीछे बैठ कर पश्चाताप के आंसू बहाने के सिवा कुछ भी नहीं बचा है । उसकी जिन्दगी में….प्रस्तुत है रूह तक कंपा देने वाली सनसनी खेज वारदात की सच्ची कहानी ….
राजस्थान के भरतपुर जिले के चिकसाना थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नौह निवासी हर प्रसाद शर्मा के शादी शुदा जवान पुत्र पवन शर्मा के रहस्यमय परिस्थितियों में घर के शयन कक्ष से देर रात ग़ायब हो जाने से परिवार ही नहीं क्षेत्र के अन्य लोग भी अचंभित हो गए और तरह तरह के कयास लगाये जाने लगे कि अपने शयन कक्ष से कोई कैसे ग़ायब हो सकता है । पर य़ह भी एक हकीकत थी जिसे झुठलाया नहीं जा सकता था । गुमशुदा व्यक्ति पवन शर्मा के परिवार ने वालों को उसकी पत्नी टीना ने बताया कि देर रात किसी का फोन आया था । जिसके बाद काम धंधे के लिए जाने की बात कह कर पवन कहीं चला गया है । काम होते ही वापस आ जाएगा । उसकी बात पर यकीन कर के घर वाले कुछ नहीं बोले हालांकि आधी रात को काम धंधे के लिए कहीं चले जाने की बात उनके गले से नहीं उतरी पर और कोई चारा भी नहीं था । लेकिन 4-5 दिन गुजर जाने के बावजूद पवन वापस नहीं आया तो पिता हर प्रसाद शर्मा ने थाने में पुत्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए जाने लगे । जिस पर पहले तो टीना ने उन्हें यह कह कर रोकने का प्रयास किया कि काम धंधे के लिए गए हैं , गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई तो पुलिस परेशान कर सकती है । फिर कुछ सोच कर उसने ससुर के साथ थाने जाकर पवन की गुमशुदगी दर्ज करवा दी । पुलिस ने गुमशुदा पवन का हुलिया पहने गए वस्त्रों सहित अन्य जरूरी जानकारी लेकर गुमशुदगी दर्ज कर ली और पवन को तलाशने की कोशिश शुरू कर दी । लेकिन दिन के साथ ही 4-5 माह बीत जाने के बावजूद भी पवन की खबर नहीं मिल पाने से उसके घर वाले निराश हो चुके थे । कई देवी देवताओं के मन्दिर भी जाकर आये पर समय निकलने के साथ अब तो देवी देवताओं के प्रति भी उनका विश्वास खत्म होने लगा था । जबकि पुत्र वधू टीना अपने हाल में मस्त रहती । घर का काम काज ससुराल वाले कर लेते और वह अपने कमरे में पलंग पर बैठ कर कुछ न कुछ खाती रहती या फिर अपना मन पसन्द टीवी शो “क्राइम पेट्रोल ” देखती रहती । उसकी ननद अंजना उससे बातचीत करना चाहती पर वह बहाने बाजी कर उससे पिण्ड छुड़ा लेती। घर वालों से भी वह बहुत कम बात करती थी। बच्चों को उसने पहले ही पवन के दादा दादी के पास बेहतर पढ़ाई कराने के बहाने भेज दिया था । इस लिए कोई जिम्मेदारी तो थी नहीं । इस मिली आज़ादी से मनमानी कर रहीं थी । बस एक काम वह जरूर कर रहीं थीं । वह य़ह कि सभी व्रत उपवास और धार्मिक कार्यों मे घर वालों के साथ जरूर शामिल होती रहती थी। पवन की गुमशुदगी के बाद घर वालों की नज़र मे वह दुखियारी बन चुकी थी । इसलिए हर कोई उससे सहानुभूति रखता था…अक्टूबर के महीने की 18 तारीख थी । हर प्रसाद शर्मा को नींद नहीं आ रही थी। जवान पुत्र के असमय वियोग ने उन्हें उम्र से कहीं ज्यादा वृद्ध बना दिया था । जीवन बोझ लगने लगा था । बस पुत्र के वापस आने की उम्मीद मे ही जिन्दा थे ,देर रात हर प्रसाद शर्मा पानी पीने के लिए उठे तो पुत्र वधू के कमरे से किसी पुरुष की आवाज़ आती सुन उन्हें लगा कि शायद भगवान ने उसकी पुकार सुन ली है और बेटा वापस आ गया है । कौतूहल वश उनके कदम पुत्र के कमरे की तरफ बढ़ चले लेकिन थोड़ी दूर जाकर ही उन्हें रुकना पड़ा , कमरे के अन्दर पड़ोसी भोगेन्द्र उनकी पुत्र वधू के साथ आपत्तिजनक हालत में था और बहू टीना का हाथ पकड़ कर कह रहा था…जानू..किस्मत अच्छी थी जो अपना काम भी हो गया..और…किसी को पता भी नहीं चला…. मस्त रहो तुम अब अपन ऐश करेंगे……. सुनकर अपमान और शर्म और दुःख से आहत हो कर हर प्रसाद ने कमरे को बाहर से ताला लगा दिया और थाने में सूचना देने चल पड़े । परन्तु जब तक पुलिस पहुंचती भोगेन्द्र उर्फ भोला ने फोन कर अपने पिता दिनेश चंद और भाई को बुला लिया । उन दोनों ने हर प्रसाद के परिवार वालों से लड़ झगड़ कर कमरे का ताला तोड़ कर भोगेन्द्र उर्फ़ भोला को आजाद करा लिया और अपने साथ लेते गए । भोगेन्द्र उर्फ भोला उसी रात को दिल्ली चला गया । इधर हर प्रसाद शर्मा के सामने जो पुत्र वधू की सच्चाई उजागर हुई थी उससे हर प्रसाद शर्मा बुरी तरह टूट गए थे फिर भी हिम्मत करके उन्होंने पापियों को दण्ड दिलाने का निर्णय लिया और 20 नवम्बर 2022 को थाने पहुच कर लिखित शिकायत की । जिसमें घटना की जानकारी देते हुए पुत्र वधू तथा उसके प्रेमी भोगेन्द्र उर्फ़ भोला द्वारा अपने पुत्र पवन की हत्या अथवा उसे ग़ायब किए जाने का आरोप लगाते हुए पुख्ता तर्क दिए। साथ ही दोनों आरोपियों के बीच चल रहे अवैध सम्बन्धों की बात बतायी ,साथ ही उन दोनों से अपने परिवार वालों को जान का खतरा बता कर सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही आरोपियों के खिलाफ कार्यवाई किए जाने की मांग की । जिसके बाद चिकसाना थानाधिकारी विनोद कुमार मीणा ने मामले की गंभीरता देखते हुए प्रकरण संख्या /22 धारा 302,201 के अन्तर्गत दर्ज करवाने के साथ ही हत्या के ऐंगल से मामले की जांच शुरू की और जिला पुलिस अधीक्षक भरतपुर श्याम सिंह के आदेश तथा सहायक पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय आई पी एस. के निर्देशन में पुलिस टीम गठित की गई । जिसमें सहायक उप निरीक्षक बलबीर सिंह , सहायक उप निरीक्षक महेन्द्र सिंह , हेड कांस्टेबल कैलाश चंद और सिपाही पुष्पेद्र सिंह , उदय वीर सिंह तथा योगेन्द्र सिंह को शामिल किया गया था । इस पुलिस टीम ने प्रकरण के विवेचना अधिकारी तथा चिकसाना थानाधिकारी विनोद कुमार मीणा के नेतृत्व में कार्यवाही शुरू कर हत्याकांड के आरोपी भोगेन्द्र उर्फ़ भोला और टीना को हिरासत मे लेकर गहनता पूर्वक मनोवैज्ञानिक ढंग से पूछ तांछ की साथ ही साक्ष्य एकत्रित किए गए । पुलिस की पूंछ ताछ से घबरा कर टीना और भोगेन्द्र उर्फ़ भोला ने हत्या को अंजाम देना क़बूल किया । जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया । अभियुक्तों के क़बूल नामे के बाद जो कहानी उजागर हुई उसके अनुसार…….
भरतपुर राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरहद पर बसा एक बड़ा शहर है जिसे उत्तर प्रदेश के लोग राजस्थान का प्रवेश द्वार भी कहते हैं..बृज क्षेत्र के लोग अलग अलग क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त कर चुके हैं, और एक बड़ा तबका खेती किसानी से जुड़ा हुआ है। इसी भरतपुर जिले के चिकसाना थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव नौह मे ब्राह्मणों का एक परिवार है हर प्रसाद का ।इनके बड़े बेटे पवन शर्मा की शादी की उम्र निकलती जा रहीं थी परन्तु बांका छोरा होने के बावजूद बदकिस्मती से अभी तक उसके योग्य कन्या नहीं मिल पाने से माता पिता और घर वाले चिंता ग्रस्त रहते थे । सौभाग्य वश उनके लड़के के लिए उत्तर प्रदेश के महा नगर कानपुर से एक रिश्ता आया । जिसे देख कर हर प्रसाद ने पवन की जोड़ी का रिश्ता मानते हुए शादी की तैयारी कर ली और वर्ष 2015 मे पवन की शादी कानपुर निवासी टीना (काल्पनिक नाम) के साथ हो गयी । महा नगर की रहने वाली स्वच्छद स्वभाव की टीना को थोड़ी बहुत परेशानी हुई लेकिन भरतपुर के निकट गांव होने के कारण वह धीरे-धीरे वहाँ के रंग में रच बस गई । हँसी खुशी के साथ पति पत्नी का समय बीता और 5 वर्ष में टीना दो बच्चों की माँ बन गयी । बड़ा बेटा कार्तिक और छोटी बेटी कृतिका । जिन्हें पढ़ाई के लिए थोड़ी दूर स्थित बाबा दादी के पास रख कर टीना और पवन पिता के साथ रहने लगे । दर असल पवन और टीना की आयु मे बड़ा फर्क था , जहां टीना 23 की थी वहीं पवन 37 का यानी कि 14 साल बड़ा ये उम्र का अन्तर शुरू मे तो पता नहीं चला परन्तु वक्त गुजरने के साथ ही दांम्पत्य जीवन में आयु बाधा डालने लगी । जहां टीना हिरनी की तरह कुलांचे भर कर दौड़ना चाहती थी । वही दो बच्चों का बाप बनने के बाद पवन धीर गंभीर हो गया था और काम धंधे को लेकर ज्यादा समय गुजारने लगा था । इसी दौरान 2 वर्ष पहले ब्राह्मण परिवार का पड़ोसी भागेन्द्र उर्फ भोला से टीना की जान पहचान हो गयी , जो धीरे-धीरे अंतरंगता मे बदलती गई । 27 वर्षीय भागेन्द्र उर्फ भोला दिल्ली की किसी प्राईवेट फर्म में नौकरी करता था और गांव आता-जाता रहता था । जब से टीना से आंखे चार हुयीं भागेन्द्र उर्फ भोला टीना के आसपास मंडराने लगा और दोनों का प्रेम परवान चढ़ते चढ़ते अनैतिकता की हदों तक पहुच गया । पवन को भोला का बार बार आना अच्छा नहीं लगता , परन्तु अपने दो बच्चों की माँ बन चुकी पत्नी पर वह शक नहीं करके चुप रहता था । जिसका बेजा फायदा उठा कर टीना और भोला मर्यादा की सीमाएं नांघ कर अपवित्र अवैध सम्बंध बनाने लगे । ऐसे ही मई महिने की रात थी जब थकान के कारण पवन जल्दी घर आकर सो गया । देर रात उसकी नींद खुली तो अपनी पत्नी को पड़ोसी भोला के साथ हम बिस्तर देख अवाक् रह गया पर घर की बदनामी के चलते दोनों को कड़ी फटकार लगा कर मामला दबा दिया । लेकिन वासना की आग में जल रहे टीना और भागेन्द्र ने रास्ते के कांटे पवन को ठिकाने लगाने का मन बना लिया था और मौके की तलाश करने लगे । 29 मई की रात को टीना ने फोन कर दिल्ली से भागेन्द्र उर्फ भोला को गांव बुलाया तो वह अपने दोस्त उत्तर प्रदेश के एटा जिले के रहने वाले दीप सिंह के साथ गांव नोह रात साढ़े 12 बजे पहुंचा और दीप सिंह को घर के बाहर बाईक पर छोडकर खुद टीना से मिलने घर में घुस गया और रोमांस करने लगा , तभी पवन की नींद खुल गई और अपनी पत्नी को गैर मर्द की बाहों में देख वह अपना आपा खो बैठा और अपने से दस साल छोटे पत्नी के आशिक भोगेन्द्र उर्फ़ भोला से भिड़ गया । लेकिन कद काठी से मजबूत भोगेन्द्र ने नींद से जागे पवन का मुँह दबोच कर उसे काबू में कर लिया और अपने साथी दीप सिंह को बुला कर उस की मदद से पवन को ठिकाने लगा दिया और रजाई के खोल मे लाश लपेट कर बोरे मे भर कर दोनों दोस्तों ने बेड के अंदर बने बाक्स मे रख दी । य़ह प्लान बना कर कि मौका देख कर नहर में फेंक देंगे । अगले दिन “वट सावित्री , व्रत” आया य़ह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र और सलामती केलिए रखती हैं ( ये वही व्रत है जिसने कथा कही जाती है कि कैसे सावित्री अपने पति सत्यवान को यमदेव से बचा कर वापस ले आयीं थीं) टीना ने भी व्रत पूजा की और बाद में उसी बेड पर बैठ कर खीर पूरी खाई जिसके अन्दर बाक्स में उसके मृत पति की लाश बोरे मे भर कर रखी थी और इत्मीनान से फोन से बातचीत करने के बाद सो भी गयी । एक दो दिन से ज्यादा लाश को घर में नहीं रखा जा सकता था क्योंकि गर्मी के दिन थे बदबू फैल कर राज फाश कर सकती थी । लिहाज़ा वापस भोगेन्द्र उर्फ़ भोला अपने दोस्त दीप सिंह के साथ वापस गांव नोह पहुचा और दोनों ने गांव के 2 किलोमीटर दूर
मोटर साइकिल पर बोरा लेजा कर लाश को बड़े पत्थर से बांध कर गिरिराज केनाल (नहर)मे फ़ेंक दिया और दोनों दोस्त वापस दिल्ली लौट गए। जबकि टीना भी कमरे में सो गयी मानो कुछ हुआ ही नहीं हो । सुबह घर वालों ने जब पवन के बारे मे पूछा तो टीना ने बहाना बना दिया कि रात को कोई फोन आया था जिसे सुनकर काम धंधे के लिए जाना बता कर गए है काम होते ही वापस आ जाएंगे… ज़वाब से संतुष्ट होकर ससुरालवाले चुप हो रहे……मगर 4 दिन बीत जाने पर भी पवन वापस नहीं आया तो माता पिता और घर वालों की चिंता बढ़ी और उन्होंने पवन की तलाश शुरू की तथा नहीं मिलने पर थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाने का निर्णय लिया तब टीना बोली कि काम धंधे के लिए गए हैं । पुलिस थाने मे रिपोर्ट दर्ज करा ने पर फ़ालतू ही परेशान होना पड़ेगा । किन्तु बाप का दिल नहीं माना और वह थाने जाने लगा तब भरोसा दिलाने के लिए टीना भी साथ में थाने मे गुमशुदगी दर्ज कराने गयी । इस बीच रोने धोने के साथ ही उसने भी खाना पीना छोडकर घर वालों को जताया कि वह पति के जाने से बेहद दुखी हैं । साथ ही गुमशुदगी दर्ज होने के बाद एक दो महिने तक टीना और भोला ने मोबाईल से बात करना बंद कर दिया पर टीना गांव के समाचार दूसरे फोन से देकर भागेद्र उर्फ भोला को सचेत करती रहीं । खास बात यह रहीं की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस और घर वाले पवन को तलाशते रहे और भागेन्द्र उर्फ भोला तथा टीना वापस मिलने जुलने लगे । फोन पर दोनों के बीच शायरी मे सवाल ज़वाब होते और दोनों एक दूसरे को जानूँ कह कर बुलाते । टीना मोबाईल पर मेसेज मे इश्क का इज़हार करते हुए कहती एक ही बात जमाने की किताबों में नहीं
जो नशा तेरी मोहब्बत में है
वो शराबो में नहीं
प्रेम में पागल भोला कहता–
जरूरत नहीं मुझे किसी और की ..
बस तुम ही काफी हो जिन्दगी भर के लिए …
जिस पर टीना शायरी में ही ज़वाब देती
तुम दुआ करना ,कोई चाहे तुम्हें मेरी तरह…
हम दुआ करेंगे हमे कोई न चाहे तेरी तरह…
मोबाईल फोन मे टीना का मेसेज था बहुत प्यार करते हैं तुम से सनम…
और वह भोला को भरोसा भी दिलाती रहती थी य़ह कह कर कि..
“जब गर्लफ्रैंड गाली गलौज पर उतर आए ..
तो समझ लीजिए वह आपको मानसिक रूप से पति मान चुकी है…
10 जुलाई को भोला ने मेसेज किया एसे ही काल कर देना जब सब शान्त हो जाय
टीना ने उत्तर दिया हम नहीं कर रहे तुम अपने आप आ जाना…
दो बच्चों की माँ टीना और भोगेन्द्र उर्फ़ भोला का प्रेम पागलपन की हद तक पहुंच चुका था । दोनों को एक-दूसरे से मिले बिना चैन नहीं था ।
ऐसे में 16 अक्टूबर 2022 की देर रात हर प्रसाद पानी पीने के लिए उठे और बहू टीना के कमरे की तरफ से गुजरे तो कमरे से किसी पुरुष के बोलने की आवाज़ सुनाई दी । वह समझे की शायद उनका बेटा वापस आ गया है परन्तु आगे बढ़ते हुए उनके कदम अन्दर का दृश्य देख कर रुक गए । कमरे में बहू के साथ बिस्तर पर आपत्तिजनक हालत मे बैठा भोगेन्द्र उर्फ भोला टीना से कह रहा था कि — जब अब तक नहीं पता चला घर वालों को तो आगे क्या पता चलेगा …… कोई नहीं जान पायेगा इस राज को .. तुम तो अब ऐश करोगी। मेरे साथ…जानूँ….सुनकर पवन के पिता हर प्रसाद का माथा ठनका …अनिष्ठ की आशंका बलवती हो गयी और बहू के कमरे पर बाहर से ताला लगा कर थाने सूचना देने चल पड़े । उधर कमरे में फंसे भागेन्द्र उर्फ भोला ने फोन कर अपने पिता दिनेश और भाई छोटू को बुला लिया उन्होंने पवन के परिजनों से लड़ कर कमरे का ताला तोड़ कर भागेन्द्र को बाहर निकाला और और पुलिस के आने से पहले ही भोगेन्द्र उर्फ़ भोला दिल्ली चला गया । इस घटना के बाद हर प्रसाद ने 20 नवंबर 2022 को भोगेन्द्र उर्फ भोला और पुत्र वधू टीना के विरुद्ध लिखित शिकायत चिकसाना थाने में देते हुए हुए पवन की हत्या कर दिए जाने अथवा उसे ग़ायब कर दिए जाने आरोप लगाया । साथ ही अपने और परिवार वालों की जान को दोनों आरोपियों से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा प्रदान करने तथा दोनों के खिलाफ कार्यवाई किए जाने की मांग की । सब कुछ जानने के बाद थानाधिकारी .विनोद कुमार मीणा ने परिवादी हर प्रसाद की लिखित शिकायत के आधार पर चिकसाना थाने में प्रकरण संख्या 507/22 धारा 302, 201 भा. द . स. के तहत मामला दर्ज कर लिया । साथ ही भरतपुर जिला पुलिस अधीक्षक श्याम सिंह के आदेश एवं सहायक उप अधीक्षक ब्रजेश ज्योति उपाध्याय आई. पी. एस . के निर्देश पर पुलिस टीम गठित की। जिसमें सहायक उप निरीक्षक महेन्द्र सिंह, सहायक उप निरीक्षक बीरबल सिंह, हेड कांस्टेबल कैलाश चंद तथा सिपाही उदय वीर सिंह, योगेन्द्र सिंह एवं पुष्पेद्र सिंह शामिल थे थानाधिकारी विनोद कुमार मीणा के नेतृत्व में कार्यवाही कर घर और नहर से अहम साक्ष्य बरामद कर ज़ब्त किये और ठोस सबूत मिलते ही पवन की पत्नी टीना और उसके आशिक भोगेन्द्र उर्फ़ भोला को पुलिस ने हिरासत में ले कर गहनता पूर्वक मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछ ताछ की । जिसके दोरान टीना और भोगेन्द्र उर्फ़ भोला टूट गए और प्रेमी युगल ने पवन शर्मा की हत्या को अंजाम देने की वारदात क़बूल कर ली …….. पुलिस ने मृतक के कमरे में उसके बेड से खून से सना रजाई का खोल ,प्लास्टिक की रस्सी,के अतिरिक्त हत्याकांड में प्रयुक्त बाईक बरामद कर ली । साथ ही अभियुक्त भोगेन्द्र उर्फ़ भोला को अदालत से रिमांड पर ले कर तस्दीक कराने के बाद गोताखोरों की मदद से नहर के गंदे पानी से मृतक का करीब 6 माह पुराना शव जो करीब करीब नष्ट हो चुका था । उसकी हड्डिया और शव से बँधा बड़ा पत्थर आदि बरामद कर ज़ब्त कर लिया । साथ ही नहर से मिले मृतक पवन की पेंट , शर्ट और कपडों की जेबों से पवन तथा टीना के आधार कार्ड ज़न आधार कार्ड भी बरामद कर सबूत हेतु ज़ब्त कर लिए और हत्याकांड के बाद फ़रार हो गए भोगेन्द्र उर्फ़ भोला के साथी दीप सिंह निवासी एटा जिला उत्तर प्रदेश की तलाश की और पुलिस टीम की मदद से उसे भी गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया । साथ ही 21 नवंबर से 4 दिन के पुलिस रिमांड पर चल रहे भोगेन्द्र उर्फ भोला को भी रिमांड अवधि पूर्ण होने तथा सभी वांछित साक्ष्य बरामद कर लेने के बाद 24 नवम्बर 2022 को अदालत मे पेश किया गया । जहां से कोर्ट के आदेश पर “पवन शर्मा हत्याकांड ” के दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा मे जेल भेज दिया गया ,जबकि मृतक की पत्नी टीना को पहले ही पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया था । इस प्रकार कथा लिखे जाने तक पवन शर्मा हत्याकांड के सभी तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया था। चिकसाना थाने की पुलिस टीम ने पवन शर्मा हत्याकांड के अनुसन्धान मे सहयोग के साथ ही फ़रार आरोपी दीप सिंह को पकड़ने में और हत्याकांड में प्रयुक्त बाईक तथा अन्य वांछित साक्ष्य बरामद करवाने मे त्वरित तथा सराहनीय भूमिका निभाते हुए अत्यंत कम समय में ही ” पवन शर्मा हत्याकांड” का पर्दाफाश करने मे सफ़लता दिलाई और सभी मुजरिमो को जेल में बंद कराया । हालांकि मामला न्यायालय के विचाराधीन है लेकिन दुःखद बात य़ह कि टीना की नासमझी या यूँ कहिये कि, टीवी के क्राइम पेट्रोल जेसे शो लगातार देखने के कारण उपजी शातिराना हरकतों के कारण उसकी हरी भरी गृहस्थी तो उजड़ी ही बल्कि दो निर्दोष मासूम बच्चे अनाथ हो गए । हर प्रसाद शर्मा का परिवार उस घड़ी को कोस रहा है जब टीना पनौती के रूप में पवन शर्मा की पत्नी बन कर आयी थी । जिसने घर आबाद करने के बजाए बर्बाद कर दिया और बूढे माँ बाप सहित निरीह बच्चों की आँखों में ना सूखने वाले आंसू भर दिए … वहीं क्षेत्र की महिलाएं भी महा नगर से आयी करम खोड़ली बहू टीना को कोसते नहीं अघा रहीं हैं ।जिसके कारनामों ने व्रत उपवास की सनातन परम्पराओं तक का मज़ाक बना कर रख दिया..