उचित समय है अपने खेतों की मिट्टी जांच व गर्मी में खेतों की गहरी जुताई करने का
दिव्यांग जगत /पंडित पवन भारद्वाज /अलवर
मुंडावर सोडावास कृषि विज्ञान केंद्र गुंता के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं हेड डॉ सुशील शर्मा ने किसानों को कहां की उचित समय है । किसान अपनी खेती की मिट्टी की जांच करावे ताकि आने वाले खरीफ बुवाई के समय फसल वार सिफारिश की गई पोषक तत्व दे सके । मिट्टी जांच के लिए सबसे पहले मिट्टी के नमूने खेतों से गोबर खाद एवं वर्मी कंपोस्ट इत्यादि देने से पहले लेवे ।
मिट्टी के नमूने लेते समय ध्यान देने योग्य बातें हैं कि जिन खेत से नमूने लेने हैं उससे पहले हम चार से पांच भागों में बांट लेते हैं । एवं वैसे जगहों से मिट्टी नहीं लेते हैं जहां पर वृक्ष गड्ढे हो या पुरानी गोबर खाद रखी हो या पानी का जमाव या बहाव होता हो । जिस जगह से मिट्टी लेते हैं वहां पर साफ सफाई कर ले उसके बाद ऊपर से 15 सेंटीमीटर की गहराई तक मिट्टी लेते हैं खेतों के अलग-अलग भागों से मिट्टी के नमूने लेकर एक जगह इकट्ठा कर निकाल लेवे । मिट्टी ज्यादा गीली होने पर उसे छाया में या पंखे के नीचे खुली हवा में सुखा लेते हैं और फिर उसे मिलाकर के नमूना बनाते हैं । एक नमूने में मिट्टी ढाई सौ से 500 ग्राम होनी चाहिए अगर इससे ज्यादा हो तो उसे 2 से चार भागों में बांट कर आमने-सामने की मिट्टी को रखते हैं और शेष मिट्टी को हटा देते हैं । इस तरह से हम दो तीन बार करने के बाद अंत में जब मिट्टी का नमूना ढाई सौ से 500 ग्राम शेष रह जाएं तो उसे एक सांप पॉलिथीन की थैली भरकर रख लेवे । और उसमें अपना नाम पता मोबाइल नंबर व खेतों की पहचान कागज पर लिखकर पॉलिथीन की थैली के ऊपर बांध दें। नमूने को नजदीक के कृषि विभाग जहां पर मिट्टी जांच की सुविधा हो ले जाकर जमा करावे और अपने खेतों की मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्राप्त करें । मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर बुवाई की जाने वाली फसलों में सिफारिश की गई पोषक तत्व देने से अधिक उपज के साथ कम लागत लगती है । संतुलित मात्रा में पोषक तत्व देने से फसल स्वस्थ रहते हैं । जिससे कि फसलों में रोग व कीट कम लगते हैं वह मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है ।
केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डॉक्टर सुनील कुमार ने कहा कि किसानों को गर्मी में खेतों की गहरी जुताई करनी चाहिए । खेतों की गहरी जुताई करने से कीटों का जीवन चक्र प्रभावित होता है क्योंकि कीटों का जीवन चक्र अपरोक्ष रूप से भूमि संरचना रसायनिक संगठन मम्मी तापमान व अन्य सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति पर निर्भर करता है । अतः इनके जीवन में विभिन्न कीट नियंत्रण के उपाय क्रियाओं को अपनाकर कीटों को प्रभावित किया जा सकता है । बहुत से की अपनी कोसावस्था या अन्य कोई अवस्था जमीन में व्यतीत करते हैं अतः उस समय निराई गुड़ाई अथवा जुताई करके उन्हें नष्ट किया जा सकता है । गर्मी में खेतों की गहरी जुताई करने से बाहर के वातावरण में आ जाते हैं और यह अपनी प्राकृतिक शत्रुओं द्वारा अथवा अधिक तापमान के कारण नष्ट हो जाते हैं । यह विधि श्वेत गिटार बिहार हेयरी कैटरपिलर तथा कटवा कीटों के लिए बहुत ही उपयोगी होते हैं । इसके साथ ही समय-समय पर खेतों की मेड़ों को तोड़ने से कीड़ों के अंडे वह कद्दू भर गया कुल के पौधों की जड़ों के चारों तरफ बुराई करने से फल मक्खी वह कद्दू के लाल हीरो की विभिन्न अवस्था नष्ट हो जाती है । गहरी जुताई करने से मिट्टी जनित रोग जैसे उठता जल ग्राम सरसों के तना गलन व सफेद रोली कल मिट्टी में पड़े रहते हैं जो कि अधिक गर्मी के कारण मर जाते हैं । और आने वाले फसल में कीट रोग कम लगते हैं । जिससे फसल उत्पादन लागत कम होता है और फसलों का उत्पादन भी अधिक होता है । गर्मी में गहरी जुताई फसल चक्र व फसल बुवाई से पहले भूमि उपचार आदि करने से रोग व कीट आने वाले फसल में कम लगते हैं । ऐसा केंद्र के विशेषज्ञों ने बताया । सोडावास,,, खेत मे जुताई के नियम