भारत के पशुओं पर कहर बन टूट रही ‘लम्पी’, राजस्थान में सैकड़ों गायों की मौत,
दिव्यांग जगत / बाड़मेर / रघुवीर शर्मा
पशु धन सायक ओर गोभक्त निभा रहे है अपना फर्ज
आवारा पशुओं को पकड़ कर कररहे है ईलाज
बाड़मेर सेड़वा तहसील के ओगाला गांव में में पशुधन सहायक अपनी हर समय सेवा दे रहे है और तो ओर जो आवारा पशु हैं उनका भी गांव वालों की मदद से पकड़ कर इलाज करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं जिसमे सुनील परिहार पशुधन सहायक हिंगलाज परिहार पशुधन सहायक ओर गणपत बिश्नोई, दिनेश बिश्नोई, बाबूलाल बिश्नोई, श्रवण बिश्नोई, धर्माराम पुनिया, महेश दान चारण, आसुलाल प्रजापत, दे रहे हैं अपनी सेवा
लम्पी का क्या है लक्षण
भारत में सबसे पहले यह बीमारी साल 2019 में पश्चिम बंगाल में देखी गई थी. इस वायरस का अभी तक कोई टीका नहीं है, इसलिए लक्षणों के आधार पर दवा दी जाती है. लम्पी त्वचा संबंधी बीमारी के संक्रमण में आने के बाद पशु दूध देना कम कर देते हैं. ऐसे में बहुत से परिवार जिनकी जीविका दूध उत्पादन से चल रही थी, उनके सामने परेशानी खड़ी कर दी है. बीमारी के जानकार बताते हैं कि जानवरों की इस बीमारी से पशुपालकों में खौफ बना हुआ है.
संक्रमण से बचाव के उपाय
1.लम्पी के संक्रमण से पशुओं को बचाने के लिए अपने जानवरों को संक्रमित पशुओं से अलग रखना चाहिए.
2.अगर गोशाला या उसके नजदीक किसी पशु में संक्रमण की जानकारी मिलती है, तो स्वस्थ पशु को हमेशा उनसे अलग रखना चाहिए.
3.रोग के लक्षण दिखने वाले पशुओं को नहीं खरीदना चाहिए. मेला, मंडी और प्रदर्शनी में पशुओं को नहीं ले जाना चाहिए.
4.गोशाला में कीटों की संख्या पर काबू करने के उपाय करने चाहिए.
5.मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी, पिस्सू और चिंचडी का उचित प्रबंध करना चाहिए.
6.रोगी पशुओं की जांच और इलाज में उपयोग हुए सामान को खुले में नहीं फेंकना चाहिए.
7.अगर गोशाला या उसके आसपास किसी असाधारण लक्षण वाले पशु को देखते हैं, तो तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल में इसकी जानकारी देनी चाहिए.
8.एक पशुशाला के श्रमिक को दुसरे पशुशाला में नहीं जाना चाहिए,
9.पशुपालकों को भी अपने शरीर की साफ-सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए.