दिव्यांग बेटियों की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी के लिए बने कानून
हिसार। सेल्फी विद डॉटर दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचीं 6 राज्यों की बेटियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश में दिव्यांग लड़कियों की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी के लिए कानून बनाने की मांग की। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचीं उत्तर प्रदेश के बरेली की रिदम शर्मा ने साइन लैंग्वेज में अपना भाषण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने विकलांगों के लिए दिव्यांग शब्द की खोज कर उन्हें नई पहचान दी है।
सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के संस्थापक सुनील जागलान ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब उनके ऑनलाइन म्यूजियम में 10 हजार से अधिक दिव्यांग लड़कियों की सेल्फी आई हैं। एसडब्ल्यूडी के बेसलाइन सर्वे के अनुसार सामान्य लड़कियों के मुकाबले दिव्यांग लड़कियां अधिक यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं। देश के कई राज्य तो ऐसे हैं जहां इन लड़कियों की शारीरिक कमी को गाली जैसे सांकेतिक शब्दों का प्रयोग करके दिव्यांगता का अहसास कराया जाता है।
नूंह की अंजुम इस्लाम ने कहा कि गुरुग्राम जैसे विकसित जिले की नजदीकी होने के बावजूद नूंह में लड़कियों को पढ़ने की इजाजत नहीं है। कविता सिंह ने कहा कि दिव्यांग लड़कियों को उनकी दिव्यांगता का अहसास करवाना बंद किया जाए। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ की किरण सुवालका ने कहा कि उनके राज्य में आज भी रूढ़ीवादी सोच बरकरार है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वन टीचर वन कॉल संस्था की दीपमाला पांडे, राजस्थान से दर्जी ऑनलाइन के सेठा सिंह रावत आदि मौजूद रहे।
राज्यपाल का संदेश
प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने सेल्फी विद डॉटर दिवस के अवसर पर प्रदेश भर की बेटियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि इस साल यह दिवस दिव्यांग लड़कियों को समर्पित किया गया है जोकि हमारे समाज का अभिन्न अंग हैं। इस अभूतपूर्व प्रयास के लिए मैं आपको हार्दिक मुबारकबाद प्रदान करता हूं।