मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर । विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत ग्राम पंचायत जोताया के श्रमिक भवन में वैज्ञानिक कृषक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ धर्मेंद्र सिंह भाटी ने कृषि में कीट प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी। राष्ट्रीय बिजीय मसाला अनुसंधान केंद्र अजमेर रामस्वरूप मीणा ने उन्नत बीज, कम रसायन उपयोग की जानकारी दी वही वैज्ञानिक डॉ एन के मीणा ने पशुपालन, आजोला, मेथी, अधिक उपज वाली फसल, उन्नत बीज, कीट नियंत्रण, बीमारियों की जानकारी दी। डॉ महेश कुमार महात्मा ने बी टी कपास बीज बैक्टीरिया,ट्राइकोगामा कार्ड , जीवामृत, आदि के बारे में जानकारी दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ धर्मेंद्र सिंह भाटी ने रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशी रसायनों के बढ़ते दुष्प्रभावों से बचने के लिए किसानों को अपने स्तर पर ही खेत की मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, नेडेफ कम्पोस्ट तैयार करने,रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशियों के खेती में प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ ही जल, जमीन, वनस्पति , जीव जंतुओं के को भी हानि पहुंच रही है अतः हमें इनसे बचने के प्राकृतिक खेती की ओर ध्यान देने पर जोर दिया। सहायक कृषि अधिकारी महिपाल गैना ने खेती में मृदा का उपजाऊपन कायम रखने तथा टिकाऊ खेती के लिए रासायनिक कीट रोग नाशियो एवम् उर्वरकों बीजामृत, जीवामृत, संजीवक, पंचगव्य, मिट्टी के लाभदाई जीवाणु कल्चर , जैविक फफुंदनाशी ट्राईकोडर्मा, हरी खाद, गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, वर्मीवाश ,फेरोमोन ट्रैप, नीम युक्त दवाएं नीमास्त्र , ब्रह्मास्त्र, आग्नेयास्त्र आदि का प्रयोग करना चाहिए।
साथ ही बताया कि गर्मी की गहरी जुताई करने से कीट रोगों के प्रकोप में कमी आती है।कृषि पर्यवक्षक महेश कुमार यादव ने बताया कि द्वारा खरीफ का मौसम में फसल बुवाई की योजना तैयार कर लेनी चाहिए ।
साथ ही खरीफ फसल की उन्नत किस्मों की जानकारी दी। साथ ही कृषि विभाग की अनुदान योजनाओं की जानकारी दी गई। इफको के प्रबंधक निर्भय चौधरी ने तरल यूरिया, डी ए पी के उपयोग तथा डी ए पी, यूरिया की जांच के घरेलू उपाय पर चर्चा की।इस अवसर पर जीवराज भांबी, कुलदीप सिंह राठौड़, पप्पू साहू, हेमराज नारदनिया, कौशल शर्मा, शिव प्रसाद मेवाड़ा,जगदीश जाट, गोगराज पुरी, रणजीत पुरी, गणपतसिंह बडगूजर सहित महिला किसान उपस्थित रहे।