झड़वासा में मनाया किसान खेती दिवस
जैविक और परम्परागत खेती से रहेगा देश और देश का किसान स्वस्थ
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर । नसीराबाद क्षेत्र के ग्राम झड़वासा के किसानों ने सरपंच भँवर सिंह गौड के मुख्य आतिथ्य में बुधवार को मनाया किसान खेती दिवस।
झड़वासा के किसान उगमाराम जाट व कृषक मित्र तेजमल जाट के खेत पर भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तत्वाधान में किसानों को अभी रबी फसल में चने की बीजाई से लेकर कटाई तक यानी लगभग चौदह सोमवार तक किसानों को एक चने की फसल की पुरी जानकारी दी । जिसमे कृषि निदेशक, वैज्ञानिकों और अनुसंधान अधिकारियों द्वारा किसान खेती दिवस पर सभी फसलों की किसानों को जानकारियां दी गई।
बुधवार को मुख्यत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग भारत सरकार के सहायक वनस्पति संरक्षक राजेश चौधरी, उपनिदेशक कृषि एटीसी मनोज शर्मा, उपनिदेशक सीआईपीएमसी जयपुर डॉ. वसुधा गौतम, श्री राम डिडेल पौध सरंक्षण सीआईपीएमसी, नरेंद्र कुमार कृषि अनुसधान एटीसी अधिकारी (कीट), सुरेन्द्र सिंह ताखर, दिनेश स्वामी , कृषि पर्यवेक्षक रामेश्वर गेना और सुभाष खोजा ने संयुक्त रूप से चने से लेकर सभी फसल उत्पादन में किसानों को जैविक विधि से खेती करने के बारे में खुलकर बताया की रसायनों का उपयोग कम से करने या इसका उपयोग ना ही करने की किसानों को सलाह दी।
उक्त सभी कृषि अधिकारियों ने जैविक और प्रधानमंत्री द्वारा बताई गई परम्परागत खेती करने पर जोर देते हुए जानकारी दी की हम सभी किसानो को कम लागत और अधिक उत्पादन के लिए सभी फसलों और सब्जियों में बाजारू दवाइयों का ना के बराबर उपयोग करते हुए जैविक और परम्परागत खेती की और ज्यादा ध्यान देना होगा तब हम किसान व अपने परिवार सहित पुरे देश को स्वस्थ रख सकते है।
किसानों को ग्रीष्मकालीन जुताई के साथ साथ गोबर खाद व केंचुआ खाद का उपयोग कर परम्परागत तरीके से भूमि व बीज उपचार सहित रोग और दुश्मन कीट नियंत्रण पर भी बल दिया।
इस अवसर पर कृषि निदेशकों, वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओ ने खड़ी फसल का निरीक्षण भी किया।
इस मौके पर कृषक मित्र तेजमल जाट ने सभी कृषि अधिकारियों सहित उपस्थित किसानों का साफा पहनाकर सम्मान भी किया।
इस मौके पर किसान गोपाल , मिठ्ठू जाट, हीरा जाट, हगामी लाल मोटिस, वीरेंद्र सिंह राठौड़, शंकर जाट, गोरधन जाट, गोपाल खारोल, नोरत बैरवा, बजरंग माली, सत्यनारायण मेघवंशी, रतन मेघवंशी, ब्रम्हा, रामराय, अमर चंद, पुखराज, धर्मराज, बाबूलाल, कांता जाट, मंगला खारोल, कृष्णवतार गुर्जर एवं सभी कई महिला पुरुष किसान मौजूद थे ।