जिला कलेक्टर से साथ वीसी को लेकर चर्चा के दौरान अचानक तहसीलदार के ऊपर गिरी छत की गाटर व पंखा,घायल
मुकेश पोटर/ दिव्यांग जगत
अलवर – तहसीलदार के ऑफिस में छत पर लगे लकड़ी के गाटर गिर गए। इस दौरान छत का पंखा तहसीलदार के ऊपर गिर गया। जिससे तहसीलदार को सिर में चोट आई है। तहसीलदार को अलवर रेफर किया गया है। घटना अलवर के रामगढ़ कस्बे के तहसील परिसर में बुधवार सुबह 11 बजे हुई।छत का पंखा तहसीलदार के सिर पर गिरा, जिससे तहसीलदार को चोट आई है।छत का पंखा तहसीलदार के सिर पर गिरा, जिससे तहसीलदार को चोट आई है।घायल हुए तहसीलदार उमेश चंद शर्मा ने बताया कि वो ऑफिस में नायब तहसीलदार खेमचंद सैनी, एलडीसी ललित कुमार के साथ आज होने वाली जिला कलेक्टर से साथ वीसी को लेकर चर्चा कर रहे थे।अचानक छत में लगी लकड़ी की दोनों गाटर नीचे आकर गिर गई। दोनों लकड़ी की गाटर मेरे दोनों तरफ गिरे, मैं बीच में रह गया। इसी बीच छत का पंखा मेरे सिर के ऊपर गिर गया। गनीमत रही कि नायब तहसीलदार खेमचंद और एलडीसी ललित कुमार साइड में थे, जो बाल-बाल बच गए।तहसीलदार के ऑफिस में लगे लकड़ी के गाटर ऑफिस की टेबल पर गिर गए।तहसीलदार के ऑफिस में लगे लकड़ी के गाटर ऑफिस की टेबल पर गिर गए।तहसीलदार ने बताया कि बिल्डिंग के जर्जर होने की शिकायत मैंने पहले उच्च अधिकारियों को भेज रखी है,लेकिन आज अचानक हादसा हो गया।हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तहसीलदार को रामगढ़ सीएचसी पहुंचाया।सिर में चोट ज्यादा होने से उन्हें रामगढ़ से अलवर रेफर किया गया।कर्मचारियों का कहना है कि ऑफिस में हर कमरे के हालात ऐसे ही है।कर्मचारियों का कहना है कि ऑफिस में हर कमरे के हालात ऐसे ही है।नायब तहसीलदार लालचंद वर्मा ने बताया कि हादसा बड़ा था, लेकिन टल गया।वरना लकड़ी की मोटी गाटर यदि सिर पर आकर गिरती तो बड़ा हादसा हो सकता था।केवल पंखे से ही तहसीलदार के चोट लगी है,बाकी हम दोनों कर्मचारी सुरक्षित है। हादसे के बाद तहसील के कर्मचारियों में भय का माहौल हैं। क्योंकि पूरी बिल्डिंग में इसी तरह का हालत है।रजिस्ट्रार कार्यालय में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारी ओम प्रकाश मीणा ने बताया कि तहसीलदार के चेंबर में हादसा होने के बाद सभी कर्मचारियों में भय माहौल है,क्योंकि तहसील में सभी कमरों की हालत तहसीलदार के चैंबर जैसी है। रजिस्ट्रार कार्यालय की छत की पट्टियों से चुना झड़ता है।कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसलिए कमरे में बैठने से भी डर लग रहा है।वहीं वरिष्ठ सहायक राकेश मीणा ने बताया कि पूरी तहसील की बिल्डिंग खंडहर हो चुकी है। कमरों में बैठने से भी डर लगता है।कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।तहसील एलडीसी धर्मवीर गुर्जर ने बताया कि ये बिल्डिंग आजादी से पहले बनी थी।उस समय तहसीलदार को नजीर बोलते थे।