मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ (Tikamgarh) जिले में दर्द बयां कर देने वाली दास्तांन सामने आऊ हैं. जहां के रहने वाले है धर्मदास पाल. खबरों के अनुसार वे जन्मजात ही दोनों हाथों से दिव्यांग (Disabled Person) हैं. इसके बावजूद उन्होंने शारीरिक कमी को कभी जीवन में रुकावट नहीं बनने दिया. उन्होंने अपने पैरों से ही हाथों का काम किया.यहां तक कि लैपटॉप चलाने के अलावा बोर्ड पर बच्चों को भी पढ़ा लेते हैं. बता दें कि नार्मल इंसान की तरह वह सभी काम पैरों की मदद से करते हैं. जहां पर वे सरकारी स्कूल में अतिथि शिक्षक की नौकरी थे, मगर विभाग की शर्त की वजह से नौकरी चली गई. इसके चलते वे काफी परेशानी से गुजर रहे हैं.
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दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रेजुएशन तक पढ़े धर्मदास गांव के सरकारी स्कूल में शिक्षक थे. जहां पर वे बीते 2 साल तक पैरों के सहारे बच्चों को पढ़ाते रहे. लेकिन स्कूल ने अतिथि शिक्षकों के लिए बीएड़ और डीएड करना जरूरी कर दिया. ऐसे में आर्थिक तंगी से जूझने के कारण वे बीएड नहीं कर पाए. इसलिए उन्हें उनके पद से हटा दिया गया. जिसके बाद से ही वे लगातार परिवार के आर्थिक संकट से घिर गए. वे इंदौर गए, जहां उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते रहे, लेकिन अगले 2 महीने पहले वो नौकरी भी चली गई. इस दौरान खेती किसानी से लेकर घरेलू काम और कम्प्यूटर में पारंगत होने के बावजूद दिव्यांग युवा बेरीजगारी से परेशान है.
शरीर की विकलांगता न बनके पैसों की कमी बनी परेशानी का सबब
वहीं, खबरों के अनुसार, धर्मदास के परिवार में माता पिता और दो बड़े भाई भी हैं. जहां पर दोनों भाई शहरों में रहकर मजदूरी करते हैं. ऐसे में धर्मदास पैरों की मदद से सभी घरेलू कामकाज कर लेते हैं. वहीं, धर्मदास ने अपने परिवार में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे युवा है, इसके साथ ही वे फ्री होकर रोजाना गांव के बच्चों को भी पढ़ाते हैं.
सरकार की ओर से नहीं मिली कोई मदद
बता दें कि धर्मदास ने बताया कि उन्होंने पिछले 3 साल तक अतिथि शिक्षक का काम कर चुका हूं.ऐसे में सरकार कहती है कि बीएड, डीएड फ्री में कराई जाती है, मगर मुझे सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली. जहां टेस्ट दिया वहां पास भी हो गया. मगर कॉलेज वाले फीस मांग रहे थे. इसलिए डीएड नहीं कर पाया. इस दौरान धर्मदास ने पंचायत से लेकर प्रधानमंत् तक को आवेदन भेज चुका हैं. इसके बाद भी उनको कोई मदद नहीं मिली. ऐसे में सरकार की योजनाओं का लाभ दिव्यांगों को नहीं मिल पा रहा है.
प्राइवेट कंपनी के खिलाफ श्रमकोर्ट में हक के लिए लड़ रहे लड़ाई
गौरतलब है कि इंदौर के पीथमपुर में स्थित एक प्राइवेट कंपनी में कम्प्यूटर ऑपरेटर की जॉब पर काम कर चुके धर्मदास को बिना वजह निकाल दिया गया था. ऐसे में वे कंपनी के फैसले के खिलाफ थे. जहां पर वे इंदौर की लेबर कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं. उधर, धर्मदास का कहना है कि मुझे ईश्वर के फैसले से तकलीफ नहीं हुई, मगर, समाज में हर तरीके से प्रताड़ित किया जा रहा है. ऐसे में कई बार पढ़ा-लिखा होने के बावजूद भी नौकरी की तलाश में दर-दर भटकता रहता हूं. वहीं, धर्मदास ने इस साल की शुरुआत में खंडवा की रहने वाली रश्मि से लव मैरिज की थी. जहां रश्मि भी दोनों पैरों से दिव्यांग है. इस दौरान प्रेम विवाह के बाद नौकरी चले जाने से दिव्यांग दंपती आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं.