माकपा ने पैट्रोल, डीजल, गैस व बिजली की दरों में वृद्धि के विरोध सहित विभिन्न समस्याओं को लेकर पी.एम.व सी.एम.के नाम सम्बोधित ज्ञापन सौंपा
मोदी- गहलोत की नीतियां जनविरोधी- ढाका
-नियामत जमाला –
भादरा, 21 अक्टूबर / भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ((मार्क्सवादी) राज्य कमेटी के आह्वान पर गुरुवार को भादरा तहसील कमेटी ने पैट्रोल, डीजल,गैस व बिजली की बढ़ती दरों के विरोध सहित विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री- प्रधानमंत्री के नाम सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा। माकपा कार्यकर्ताओं ने माकपा कार्यालय से एसडीएम कार्यालय तक नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला व वहाँ पहुंच कर प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए माकपा तहसील सचिव जेपी ढाका ने कहा कि पैट्रोल,डीजल,गैस, बिजली की बढ़ती कीमतों,कोरोना,बेरोजगारी के भयंकर दौर के बाद भी राज्य व केंद्र सरकार एक के बाद एक जनविरोधी फैसले ले रही है। जनता के नाम पर,एक- दूसरे पर आरोप – प्रत्यारोप लगाती है,लेकिन राहत के नाम पर कुछ नहीं है। माकपा पंचायत समिति सदस्य एडवोकेट सुरजीत बिजारणियां ने कहा कि देश का किसान पिछले 11 माह से सड़कों पर है,पर केंद्र सरकार पूंजीपतियों की भाषा बोल रही है। राज्य सरकार ने अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद शुरु नहीं की है। माकपा पंचायत समिति सदस्य जसवंत बेनीवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने बिजलों बिलों में भारी लूट कर रखी है। बिजली कंपनियां लगातार बड़े-बड़े बिल दे रही है। सरकार जनता को राहत नहीं दे रही है। बिजली क्षेत्र को अडानी के हवाले कर रही है। पार्षद दारासिंह सोनी ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार पैट्रोल,डीजल,गैस के दाम बढ़ा रही है वहीं राज्य सरकार ने उपकर लगा रखा है। केंद्र सरकार ने पैट्रोल,डीजल पर भारी टैक्स लगाकर 23 लाख करोड़ रुपये आम जनता से वसूल लिए है। आज हवाई जहाज का तेल सस्ता है,जबकि मोटरसाइकिल – गाड़ी का तेल महंगा है.माकपा तहसील कमेटी सदस्य राकेश थालोड़ ने कहा कि बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए मनरेगा के 100 दिन से 200 दिन किए जाए व शहरी क्षेत्र में मनरेगा को लागू किया जाए। केंद्र व राज्य सरकार के विभागो में 72 लाख पद खाली है। सरकारे पद भरने की बजाय सरकारी क्षेत्रों को बेचने में लगी है। माकपा सचिव मंडल सदस्य पारस डूडी ने प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि माकपा राज्य सम्मेलन में आंदोलन की व्यापक रणनीति बनाएगी। प्रदर्शन में जसवंत सहारण, पंचायत समिति प्रधान अनिल औलख, छोटूराम गोदारा, विनोद धुआ, मोहम्मद रफी, सरपंच प्रतिनिधि चरणसिंह झाझड़िया, प्रताप दहिया,ओमप्रकाश पूनियां, पंचांयत समिति सदस्य बंशीलाल बेनीवाल, रणधीर कड़वासरा, मनोज ढाका, सतवीर खीचड़, विशाल यादव, कमलेश भूकर, नवीन पूनियां, सुभाष गोदारा, लालचंद महला, इशाक खां, मुकेश सेवदा,रफीक फतेहखानी,भगतसिंह राजपूत, बलवान यादव, विशाल यादव, पवन बेनीवाल, प्रवीण छिम्पा, बलजीत शीला, महेंद्र कस्वां, दिनेश मोठसरा व सुरेश राखी समेत अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
ज्ञापन में की गई मांगे:-
पैट्रोल-डीजल और गैस पर केन्द्रीय एक्साइज ड्यूटी में की गई भारी बढ़ोत्तरी और राज्य सरकार द्वारा लगाए जा रहा वैट वापस लेने, बिजली कानून 2020 वापस लेने, राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा बिजली पानी की दरों में की गई भारी वृद्धि वापस लेने, मंहगाई पर रोक लगाने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने, तीनों कृषि-कानूनों को वापस लेने और किसानों की उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाने, राजस्थान में किसानों की पूरी उपज की समर्थन मूल्य पर खरीद तुरंत शुरू करने, मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड को रद्द करने, मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, राजस्थान सरकार राज्य में पहले से पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए मजदूर विरोधी कानूनों को रद्द करने, मनरेगा का विस्तार करते हुए साल में काम के दिनों बढ़ाकर 200 दिन किया जाने और मजदूरी को दोगुना किया जाने,शहरी रोजगार गारंटी कानून बनाया जाने, केन्द्र और राज्य सरकार की सभी नौकरियों में रिक्त स्थानों की पूर्ति की जाने, सभी बेरोजगारों को रोजगार देने और जब तक रोजगार नहीं मिले तब तक बेरोजगारी भत्ता देने, किसानों का सम्पूर्ण क़र्ज़ माफ़ करने, स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार एवं सुधार किया जाने, निजी अस्पताओं की लूट को बंद करने एवं चिकित्सा स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं का निजीकरण बंद करने की मांगे की गई है।