होली के पूर्व चंग के साथ होली के फाग गाकर कालबेलिया परिवार की महिलाएं करती है फाग उत्सव की शुरुआत
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर । फागण लगने के साथ जहां खेतो मे गेहूँ , जौ , चने व सरसो की फसले तैयार होने लगती है । चारो ओर फतझड के साथ पेडो पर नई कोपले , पत्ते नये आने लगते है । सरदी का अहसान कम होने लगता है , वही आधे फागुन के पश्चात होली की उमंग छाने लगती है । गांवो मे पूर्वजों से चली आ रही प्रथा को निभाते हुऐ कालबेलिया समाज के पुरुष एवं महिलाएं चंग पर घर घर जाकर होली के गीत गाकर व नाचकर होली की पहचान को बनाये रखने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है । इनके द्वारा चंग के साथ गाये होली फागण के गीतो को ग्रामीण भी बडे चाव से सुनते है । कई जगह ग्रामीण चोपालो पर बैठकर सामुहिक चंग की धापो पर फागण के गीत गाकर होली की मस्ती मे मस्त हो जाते है । फागुन लगने के साथ कालबेलिया समाज की महिलाएं भी चार चार , पांच पांच के समूह मे गांव गांव , शहरो मे भी जाकर चंग की धाप के साथ फागण के गीत गाकर जहां जैसा सहयोग मिले लेकर अपना गुजर बसर करती है । देरांठू हाईवे पर मिली जोताया गांव की विमला , ममता व कंचन ने बताया कि वो गांव से आती है , दिन मे दुकानदारों के साथ हाईवे पर गाडी डाईवरो के पास भी जाकर चंग के साथ फाग गाकर उनका मनोरंजन करती है । बदले मे जिससे जो बनता है वो इनको सहयोग राशि दे देता है । शाम को वापस घर चली जाती है । आने वाले परिवर्तन मे अब यह कला भी धीरे धीरे लुफ्त होने की कगार पर है ।