14 पदकों के साथ फिर चमका अजमेर, स्टेट स्पेशल ओलंपिक में दिव्यांग बच्चों ने रचा इतिहास

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर। अजमेर स्पेशल ओलंपिक्स भारत राजस्थान द्वारा 25-26 नवंबर को जयपुर मिलिट्री स्टेशन स्थित गांधी स्टेडियम में स्पेशल ओलंपिक्स स्टेट गेम्स एथलेटिक्स 2025 का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। यह प्रतियोगिता सप्तशती आर्मी वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) और स्पेशल ओलंपिक भारत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ राजस्थान की उपमुख्यमंत्री श्रीमती दिया कुमारी तथा स्पेशल ओलंपिक भारत की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती मल्लिका नड्डा ने संयुक्त रूप से किया । उद्घाटन समारोह में प्रदेशभर से आए विशेष एथलीट्स द्वारा आकर्षक मार्चपास्ट और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने अपने संदेश में कहा कि स्पेशल ओलंपिक्स विशेष खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचान देने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। संस्था मुख्य कार्यकारी श्रीमती क्षमा आर कौशिक ने जानकारी देते हुये बतया कि प्रतियोगिता में अजमेर के विशेष एथलीट्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 14 पदक अपने नाम किए, जिनमें छह स्वर्ण, छह रजत और दो काँस्य पदक शामिल हैं। यह उपलब्धि जिले के लिए गौरव का क्षण रही और यह साबित करती है कि विशेष खिलाड़ी अवसर और विश्वास मिलने पर किसी भी स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।
श्रीमती कौशिक के अनुसार संस्था द्वारा संचालित मीनू स्कूल चचियावास, अद्वैत अर्ली इंटरवेंशन सेंटर पंचशील, उम्मीद डे केयर सेंटर पुष्कर और संजय इंक्लूसिव स्कूल ब्यावर से कुल 18 बच्चों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया। सभी बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास और जोश के साथ खेल भावना का परिचय दिया। प्रतियोगिता में स्पेशल ओलंपिक्स भारत के स्पोर्ट्स डायरेक्टर डॉ. भगवान सहाय शर्मा की सक्रिय उपस्थिति और मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा ।
खिलाड़ियों की सफलता में उनके प्रशिक्षकों का योगदान भी उल्लेखनीय रहा। कोच विवेक कुमार यादव, नेहा राठौर, शरीफ मोहम्मद और मुकेश स्वामी ने खिलाड़ियों को निरंतर प्रशिक्षण, अनुशासन और मानसिक मजबूती प्रदान की, जिसके परिणामस्वरूप 14 पदकों की यह उल्लेखनीय उपलब्धि संभव हो सकी। यह सफलता न केवल विशेष बच्चों की प्रतिभा का प्रमाण है बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि समर्पण, प्रोत्साहन और सही अवसर मिलने पर दिव्यांग बच्चे किसी भी क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू सकते हैं।

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