मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर। एलडीसी भर्ती-2013 के मामले में पंचायती राज विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार को विभाग के सचिव ने भर्ती के दौरान दिए गए दस्तावेजों की जांच कराने के आदेश जारी किए हैं। जांच के लिए जिलास्तर पर कमेटी गठित करने को भी कहा गया है।
एलडीसी भर्ती के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने जो दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, वे फर्जी निकले थे। इनमें 277 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों को तो कोर्ट तक ने फर्जी बताया था और उनके खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।
हालांकि इसके बावजूद विभाग ने एक्शन नहीं लिया और ऐसे कर्मचारियों को आज तक करोड़ों रुपए के वेतन का भुगतान कर दिया। अब विभाग के सचिव डॉ. जोगाराम ने कलेक्टरों को दिए गए आदेश में कहा है कि अपने-अपने जिलों में एलडीसी भर्ती 2013 के अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए कमेटी का गठन करें। इस कमेटी में पंचायती राज विभाग के अधिकारी शामिल नहीं किए जाएं।
विभाग ने माना अलग-अलग दस्तावेज दिए
आदेश में विभाग ने माना कि अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन में जो दस्तावेज दिए थे, उसके सत्यापन में प्रस्तुत दस्तावेज अलग-अलग हैं। ऐसी शिकायतें भी विभाग को मिली हैं। ऐसे में पुन: सत्यापन अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा पंचायती राज के सचिव ने एक अन्य आदेश में राज्यस्तरीय जांच कमेटी का भी गठन कर दिया है। यह कमेटी सभी अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाणपत्रों की जिलेवार जांच और सत्यापन करेगी।
यही नहीं, किसी अभ्यर्थी ने रेगुलर स्टडी और कार्य अनुभव प्रमाण पत्र की अवधि में ओवरलैपिंग तो नहीं, इस संबंध में भी दस्तावेजों की जांच करेगी। कमेटी विभाग के संयुक्त आयुक्त (जांच) अनिल सोनी की अध्यक्षता में बनाई गई है, जिसमें विभाग के दो लेखाधिकारी, तीन प्रशासनिक अधिकारी व दो सहायक लेखाधिकारी सहित कुल 10 सदस्य शामिल हैं। यह कमेटी भी 10 दिन में रिपोर्ट देगी।
2018 में सेवा से हटाने के आदेश भी दिए गए थे
डॉ. जोगाराम ने आदेश में 2018 के पत्र का हवाला भी दिया है। उसमें कहा गया है कि विभाग ने जून 2018 में एक परिपत्र के माध्यम से सभी जिला परिषदों के सीईओ को निर्देश दिए थे कि वे एलडीसी भर्ती-2013 में नियुक्ति पाए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का पुनरीक्षण करेंगे और पूर्ण विधिक प्रक्रिया अपनाकर ऐसे अभ्यर्थियों को सेवा से पृथक करेंगे। तब यह परीक्षा जिलेवार कलेक्टरों के निर्देशन में कराई गई थी।