अमृतसर से अजमेर आ रही ,सवा करोड़ की चरस के साथ आरोपी गिरफ्तार
—————————— अजमेर के दरगाह इलाके में होनी थी सप्लाई
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
—————————— अजमेर । राजधानी जयपुर के सीकर बीकानेर हाईवे पर टाटियावास टोल प्लाजा के पास सीआईडी सीबी क्राइम ब्रांच की टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है । सीआईडी सीबी की क्राइम ब्रांच टीम ने अमृतसर से चलकर आने वाली विजय ट्रैवर्स की एक बस को टोल पर रोक कर चेकिंग की तो एक युवक पुलिसकर्मियों को देखकर घबरा गया । पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पता चला कि युवक 5 किलो चरस लेकर अजमेर जा रहा था । पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 5 किलो चरस बरामद कर ली है । पकड़े गए आरोपी का नाम आरिफ खान बताया जा रहा है । जो अजमेर के कुम्हार मोहल्ले का रहने वाला है । पकड़ी गई शराब की कीमत बाजार में तकरीबन सवा करोड़ रुपए की जा रही है । पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चरस अमृतसर से अजमेर ले जाई जा रही थी । आरोपी ने पूछताछ में कई चौकाने वाले खुलासे किए है । आरोपी समुदाय विशेष के इलाकों में ही चरस की तस्करी का काम करता था । आरोपी ने इस बात को भी कबूल किया है कि आरोपी केवल बसों के जरिए ही इन मादक पदार्थों की तस्करी करता आया है । यह तरस भी अजमेर दरगाह में आने वाले जायरीनों को ही बेचनी थी ।
इससे पहले वह पंजाब से भी कई बार चरस की तस्करी कर चुका है । फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ करने में जुटी है । पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग से शब्बीर नाम के युवक ने अमृतसर में आरोपी आरिफ अली को चरस की डिलीवरी उपलब्ध कराई थी । बताया जा रहा है कि शब्बीर के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं । और यह सारा पैसा पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों में पहुंचाया जाता है । हालांकि यह जांच का विषय है । अब पुलिस अनंतनाग के शब्बीर नाम के युवक की भी तलाश कर रही है । सीआईडी सीबी क्राइम ब्रांच के निरीक्षक राम सिंह नाथावत ने इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया है । राम सिंह नाथावत ने बताया कि पिछले 2 साल से सीआईडी सीबी की टीम आरोपी के पीछे पड़ी थी । 2 साल बाद अब आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आया है । उन्होंने बताया कि आरोपी लंबे समय से अवैध मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा था ।
गौरतलब है कि राजस्थान रोडवेज और निजी बसों से किस तरह से तस्करी का खेल चलता है । इस तरह का स्टिंग ऑपरेशन कई बार पहले भी हो चुका है । चंद रुपयों के लालच में बसों के चालक और परिचालक एक पैकेट को दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाते हैं , और इन पैकेट्स में इस तरह से तस्कर हथियार और अवैध मादक पदार्थ भेजते है । जरूरत इस बात की है कि पुलिस की चौकसी और नजर इस तरह से बसों से तस्करी करने वाले लोगों पर भी होनी चाहिए । समय-समय पर एक चेकिंग अभियान चलाकर इन बसों की तलाशी लेनी चाहिए । कहीं कोई तस्कर तस्करी की वारदात को अंजाम नहीं दे रहा है । बसों के जरिए तस्करी करना बेहद आसान है। क्योंकि इन बसों की कहीं भी कोई चैकिंग नहीं होती है।