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नामुमकिन में ही मुमकिन छिपा हुआ है, दिव्यांग लेखिका की प्रेम – विरह और काशी नामक पुस्तक का हुआ विमोचन

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर। देश की की सबसे कम उम्र की प्रेरणादायक लेखिका बनी, दिव्यांग
जीजीविषा सिखवाल, उसकी लिखी प्रेम विरह और काशी नामक पुस्तक का विमोचन हुआ।
“प्रेम विरह और काशी” पुस्तक के लोकार्पण समारोह में संत श्री राम दास जी त्यागी (खारी का लांबा) के सान्निध्य सहित शाहपुरा विधायक लालाराम बैरवा ,पूर्व पालिका चेयरमैन धनराज गुर्जर, पूर्व प्रधान कृष्ण सिंह राठौड़, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के भीलवाड़ा जिला उपाध्यक्ष नारायण गुर्जर, सत्यनारायण कुमावत, कन्हैयालाल धाकड़, पूर्व प्रधान शाहपुरा गोपाल गुर्जर, संजीव तिवारी (C.O.), राजेन्द्र बोहरा, बालाराम , कृष्ण पाल सिंह (CBEO, हुरड़ा), जेतगढ़ सरपंच प्रतिनिधि महावीर सिंह सिसोदिया,जीवन ज्योति रक्तदाता समूह के संस्थापक सदस्य, केशव माधव को उपचार केंद्र के गो भक्त, सहित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर युवा लेखिका जिजीविषा सिखवाल को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों पर हार्दिक शुभकामनाएँ एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।लेखिका सिखवाल गंभीर बीमारी से पीड़ित फिर भी आत्मविश्वास से बड़ी आगे अपने सपनों को किया पूरा, वह
ब्रेन ट्यूमर और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी बीमारी से लड़ते हुए लिखी किताबें, वो उठ नहीं सकती अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकती
जिजीविषा का संघर्ष एवं मां बनी सबसे बड़ी संबल । गुलाबपुरा उपखंड क्षेत्र की 18 वर्षीय बेटी जीजीविषा सिखवाल ने एक लेखक के रूप में अपने शहर गुलाबपुरा, भीलवाड़ा जिले व राजस्थान प्रदेश का नाम रोशन किया हे। स्वामी विवेकानंद विद्यालय में पढ़ने वाली बेटी का हौसला बढ़ाने वाली मां कल्पना जोशी जो ग्राम लांबा में एक शिक्षिका के रूप में कार्यरत है। एक मां ने त्याग ,समर्पण की भावना रखते हुए अपनी बेटी के सपनों को ऊंचाइयां प्रदान करने के लिए दिन-रात कोशिश की। कुछ दिनों पूर्व राष्ट्रीय स्तर पर इंडियन ग्लोरी अवार्ड और देश रत्न अवॉर्ड से उनको सम्मानित भी किया जा चुका है। व्हीलचेयर पर बैठकर ही कक्षा 12 वी उत्तीर्ण की व व्हीलचेयर से उठ नहीं सकती फिर भी लेखनी में मिले दो अवार्ड ।
वर्तमान में जिजीविषा यूपीएस की तैयारी कर रही है।

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