दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने से सम्बंधित रिट याचिका
हीमोफीलिया दिव्यांगो को सरकारी नौकरीयो मे आरक्षण देने से संबंधित रिट याचिका।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 34 को राजस्थान उच्च न्यायालय मे दी गई चुनौती।
उच्च न्यायालय ने विधि मंत्रालय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग भारत सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब।
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हीमोफीलिया दिव्यांगो को आरपीडब्लयुडी अधिनियम 2016 की धारा 34 मे शामिल करने से संबंधित एक रिट याचिका रामप्रकाश सिंह बनाम भारत संघ की सुनवाई के दौरान राजस्थान उच्च न्यायलय के न्यायधीश श्री विजय विश्नोई एवं न्यायधीश श्री मदन गोपाल व्यास की खंडपीठ ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
गौरतलब है कि हीमोफीलिया को आरपीडब्लयुडी अधिनियम 2016 के तहत एक निर्दिष्ट दिव्यांगता का दर्जा दिया गया लेकिन इसी कानुन धारा 34 के तहत नौकरीयो मे आरक्षण से वंचित रखा गया है। हीमोफीलिया एक दुर्लभ रक्त विकार है जिसमे चोट लगने पर रक्त का थक्का नही जमता और खून बहता रहता है। दिव्यांगता मुल्यांकन दिशानिर्देशो के जटिल होने के कारण इस बीमारी के केवल अति गंभीर रोगीयो का ही दिव्यांग प्रमाण बनाया जाता है। इस कारण देश मे बहुत कम संख्या मे इन रोगीयो को दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी हुए है और उस पर भी इनको आरक्षण नही दिया जा रहा।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हिमांशु चौधरी ने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 34 के तहत दिव्यांगो को सशक्त बनाने के लिए सरकारी नौकरीयो मे 4 प्रतिशत आरक्षण दिया गया लेकिन इसमे हीमोफीलिया दिव्यांग श्रेणी को दरकिनार करते हुए अन्य दिव्यांग श्रेणीयो को आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। हीमोफीलिया श्रेणी को दिव्यांग आरक्षण से वंचित करना संवैधानिक रूप से अनुचित है क्योकि यह आर्टिकल 14 के समान स्तर के वर्ग को समान लाभ का अधिकार देने का उल्लंघन है। इसी कानुन की धारा 32 के तहत सभी श्रेणीयो के लिए उच्च शिक्षा मे 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करना और धारा 34 के तहत सरकारी नौकरीयो मे आरक्षण के लिए किसी बेंमार्क दिव्यांग को श्रेणी विशेष के कारण वंचित रखना असंवैधानिक है।
मामले की अगली सुनवाई 10 मई 2022 निर्धारित की गई है।

