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भव्यता से समापन हुआ विश्व सारस्वत सम्मेलन मुंबई का, राजस्थान प्रतिनिधियों ने रखी अपनी बात

भव्यता से समापन हुआ विश्व सारस्वत सम्मेलन मुंबई का, राजस्थान प्रतिनिधियों ने रखी अपनी बात

पवन कुमार जोशी/दिव्यांग जगत

विश्व सारस्वत फेडरेशन एवं ऑल इंडिया सारस्वत कल्चरल ऑर्गनाइजेशन, मुंबई के संयुक्त तत्वाधान में नवी मुंबई में आयोजित एक दिवसीय सारस्वत संगम, विश्व सारस्वत सम्मेलन में काशी मठ के परम आदरणीय मठाधिपति परम पूज्य श्रीयुत सम्यामिंदा तीर्थ स्वामी जी व चित्रापुर सारस्वत मठ के परम आदरणीय मठाधिपति परम पूज्य श्रीमद् सद्योजात शंकराश्रम स्वामी जी के दर्शन करने व उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर यूपी पीडब्ल्यूडी मुख्य सचिव आदरणीय श्री नितिन रमेश गोकर्ण जी-IAS, सारस्वत बैंक लिमिटेड के चेयरमैन परम आदरणीय श्री गौतम ई ठाकुर जी, परम आदरणीय मेजर जनरल जी डी बक्शी साहब, शैफाली वैद्या, टाटा ग्रुप के श्री प्रवीण काडले जी सहित सारस्वत जगत की देश के नव निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं अनेक सुप्रसिद्ध हस्तियों ने सामाजिक सरोकार पर अपनी बात रखी और उनका बहुमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और सभी का संबोधन अत्यंत सारगर्भित एवं कल्याणकारी रहा । देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में सम्पन्न हुए इस भव्य तथा सफल आयोजन के लिए तीनों संस्थाओं (विश्व सारस्वत फेडरेशन, ऑल इंडिया सारस्वत क्लचरल आर्गेनाइजेशन, जीएसबी सभा) के सभी सम्मानित पदाधिकारियों की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है ।

राजस्थान प्रतिनिधियों के रूप में सारस्वत ब्राह्मण समाज के प्रबुद्धजन 50 सदस्यों के साथ मुंबई पहुंचे, सुबह गेटवे ऑफ इंडिया में घूमने के बाद सम्मेलन में शरीक हुए, आयोजन में सामाजिक सुरक्षा पर सम्पत सारस्वत बामनवाली ने मजबूती से अपनी बात रखते हुए पूरे विश्व में सामाजिक मजबूती पर जोर देने तथा आगवानी से सामाजिक व्यवस्था पर काम करने का जोर दिया, यात्रा का संचालन एससीएल फाउंडेशन भारत ने किया, दल के सदस्य पूनमचंद सारस्वत, हरिदत्त सारस्वत और बनवारी सारस्वत ने बताया कि ये पहली बार का मौका था जब सभी सारस्वत समाज के बंधु एक मंच पर शामिल हुए जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे, नवरतन ओझा ने बताया कि आगे नवंबर में पुन सम्मेलन में काफी संख्या में सारस्वत बंधु शामिल होंगे क्योंकि इस आयोजन से समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मुख्य वरिष्ठ व्यक्तियों में वैद्य लक्ष्मीनारायण ओझा, इशरराम सारस्वत, शंकरलाल सारस्वत, कन्हैयालाल सारस्वत, नारायण प्रसाद ओझा, भगवानाराम सारस्वत, द्वारकाप्रसाद सारस्वत आदि शामिल रहे।

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