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सौर ऊर्जा आजीविका पोर्टल पर काम शुरू, अजमेर डिस्कॉम ने ली काश्तकारों व डवलपरों की बैठक

सौर ऊर्जा आजीविका पोर्टल पर काम शुरू, अजमेर डिस्कॉम ने ली काश्तकारों व डवलपरों की बैठक

किसानों की बंजर व अनुपयोगी भूमि पर स्थापित होंगे सौर ऊर्जा संयंत्र, अजमेर डिस्कॉम में 78 स्थान है चिन्हित, सर्वाधिक 38 नागौर में

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर । राज्य सरकार ने किसानों की बंजर एवं अनुपयोगी पड़ी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में मदद के लिए बनाये गए सौर कृषि आजीविका पोर्टल पर काम शुरू कर दिया है। अजमेर विद्युत वितरण निगम ने सोमवार को काश्तकारों तथा डवलपर्स की बैठक आयोजित कर उन्हें इस योजना तथा पोर्टल के बारे में विस्तृत जानकारी दी। प्रबन्ध निदेशक एन.एस निर्वाण ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में शुरू की गई सौर कृषि आजीविका योजना की बेहतर क्रियान्विति के लिए डिस्कॉम मुख्यालय पर काश्तकारों तथा डवलपर्स की बैठक पंचशील स्थित मुख्यालय पर आयोजित की गयी। उन्होंने बताया की इस पोर्टल के माध्यम से किसानों एवं डवलपर्स को संयंत्रों की स्थापना में बहुत सहायता मिलेगी। बैठक में डवलपर्स को इस योजना में आगे के प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से बताया गया। प्रबंध निदेशक ने डवलपर्स को आ रही समस्याओं के बारे में भी जाना तथा मौके पर ही समस्याओं के निदान के लिए संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए। प्रबन्ध निदेशक निर्वाण ने बताया कि अजमेर डिस्काॅम ने सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए 78 स्थान तय किए हुए है। प्रबंध निदेशक ने संबंधित अधिशासी अभियंता (प्रोजेक्ट) को निर्देश दिए है की चिन्हित स्थानों में से जहां से भी आवेदन कम आये है वहां पर काश्तकारों को इस योजना में और अधिक जागरूक करे। जिससे इस योजना का लाभ अधिक से अधिक काश्तकारों को मिल सके। अजमेर विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक एन.एस निर्वाण ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से कृषि भार वाले लोड सेन्टर पर पीएम-कुसुम कम्पोनेन्ट- सी (फीडर लेवल सोलराईजेशन) के तहत् विकसित किए जा रहे विकेन्द्रिकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों को बढावा देने के उद्धेश्य के लिए राज्य सरकार ने सौर कृषि आजीविका योजना तैयार की है। इस योजना के पोर्टल को लांच करने का उद्वेश्य यह है कि किसानों को सोलर के माध्यम से अपने नजदीक के 33/11 जीएसएस सेे दिन में बिजली प्राप्त हो सके। इसके साथ ही इस योजना के माध्यम से किसानों व भूमि मालिकों को सौर ऊर्जा संयंत्रा की स्थापना के लिए पूर्व निर्धारित राशि के आधार पर अपनी बंजर या अनुपयोगी भूमि को लीज पर देने का अवसर देकर राज्य के प्रचुर भूमि संसाधनों का उपयोग करना है। उन्होंने बताया कि इस आनॅलाईन पोर्टल पर किसी भी गांव में 33/11 केवी जीएसएस के आसपास के किसान सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए अपनी जमीन को लीज पर देने के लिए पंजीकृत कर सकते है। उन्हे बताना होगा कि हम अपनी जमीन को सोलर ऊर्जा के माध्यम से विद्युत उत्पादन के लिए लीज पर देना चाहते है और सौर ऊर्जा संयंत्र के विकासकर्ता भी पंजीकृत किसानों व भूमि मालिकों तक पहुंचने के लिए पोर्टल पर पंजीकृत कर सकते है। उन्होने बताया कि सोलर प्लांट की स्थापना के बाद 33/11 केवी जीएसएस के आस-पास के जितने भी कृषि उपभोक्ता है। उन सबको सोलर के माध्यम से दिन के समय अच्छी गुणवत्ता की बिजली मिलेगी और उनकी बिजली की समस्या का समाधान होगा। उन्होने बताया कि भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कुसुम कम्पोनेन्ट सी (फीडर लेवल सोलराईजेशन) के तहत् इस योजना में केन्द्रिय वित्तीय सहायता का भी प्रावधान है। उन्होने बताया कि www.skayrajasthan.org.in पोर्टल किसान एवं विकासकर्ता की सुविधा के लिए बनाया गया है। इस पर इच्छुक किसान व भूमि मालिक अपनी बंजर और अनुपयोगी भूमि को लीज पर देने के लिए पंजीकृत कर सकेंगें और विकासकर्ता किसानों द्वारा पोर्टल पर डाला गया भूमि का विवरण देख सकेंगे। जिससे राजस्थान डिस्काॅम के 33/11 केवी सब-स्टेशन के आस-पास के क्षेत्र में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में सुविधा मिलेगी। उन्होने बताया कि इस योजना में छोटे प्लान्ट लगेगें और इनसे उत्पादित बिजली का लाभ प्लांट के आस-पास के क्षेत्रो के किसानों को ही मिलेगा। योजना के तहत् जिन क्षेत्रों में कृषि बिजली का भार अधिक है उन जीएसएस को चिन्ह्ति करके पीएम-कुसुम योजना-सी में फीडर लेवल सौलराईजेशन के तहत् संयंत्र स्थापित किये जाएगें। उन्होंने बताया कि अजमेर डिस्काॅम क्षेत्र मे 78 जीएसएस चिन्हित किए गए हैं । जहां कृषि लोड ज्यादा है। उन्होने बताया कि इस पोर्टल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पोर्टल पर किसान द्वारा अपनी भूमि का पंजीकरण करने के पश्चात् विकासकर्ता देख पायेगा की कितनी भूमि सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिए काश्तकार ने पोर्टल पर पंजीकृत की है। सभी सूचनाऐं पोर्टल पर मिलने से सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा। उन्होने बताया कि किसानों को समय पर पूरी लीज राशि मिले, इसकी व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा निर्धारित कर दी है। इसके तहत् डिस्काॅम को दी जाने वाली बिजली का भुगतान विकासकर्ता को किये जाने वाले भुगतान में से डिस्काॅम द्वारा लीज राशि काट कर सीधे काश्तकार को भुगतान किया जायेगा व शेष राशि का भुगतान विकासकर्ता को किया जाएगा। बैठक के दौरान निगम मुख्यालय पर निदेशक तकनीकी ए.के. जागेटिया, मुख्य अभियंता अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
यह स्थान किए हुए है चिंहित

  1. अजमेर जिलें में जमोला, गोडियाना एवं बांदनवाडा।
  2. बांसवाडा सर्किल में झापुरा एवं छोटी सेरवा।
  3. भीलवाडा सर्किल में हरपुरा, लाडपुर एवं महूआ।
  4. चित्तौगढ़ सर्किल में सडास, इन्दौरा, निम्बाहेडा, सुदडी, बूड, सहलवा, जालमपुरा, सावा, ठिकरीयां एवं रानीखेडा।
  5. झुंझुंनु सर्किल में घसेडा, बालोदा, कुलोठ खुर्द, बिन्जुसर, नुआ, गढला कलां, बकारा, भेरूंदा कलां, बांगोठरी एवं कुमावास।
  6. नागौर सर्किल में अकोडा, डिंडारपुरा, जोधियासी, श्यामसर, सोमाना, अरवर, बरसुना, गेलोली, बकालियां, सुनारी, बिंछवा, रोल, टूंकलिया, संगवो की ढाणी, डूकियों की ढाणी हरसोलाव, गुर्जरो की ढाणी, बसनी सेजा, टाडा की ढाणी, धनकोली, दौसर, पंचोटा, लिछाना, मूवाना, राजलिया, चितावा, गुगडवर, खोरडी, जेवलियावास, जेतपुरा, खाखोली, लाडरिया, मोलासर, चोसलद, देवली, मारोठ चांवडियां एवं मिंडा।
  7. प्रतापगढ़ सर्किल में छुपना।
  8. सीकर सर्किल में प्रीतमपुरी, ढ़ींगपुर, खोर, ठिकरीया, बखरवासी, सिहोट छोटी, एवं टोडिमपुरा।
  9. डूंगरपुर सर्किल में चूंदावाड़ा।
  10. राजसमंद सर्किल में पंचमाता।
  11. उदयपुर सर्किल में बाघपुरा।
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