प्रधानमंत्री आवास योजना का नही मिला लाभ, चक्कर काटने को मजबूर

प्रधानमंत्री आवास योजना का नही मिला लाभ, चक्कर काटने को मजबूर,
बारिश में कच्चा आशियाना ढहने से शिर छुपाने की भी नही जगह
जोबनेर॥ अणतपुरा के निकटतम चारणवास गांव में एक गरीब परिवार को मकान के अभाव में छप्पर में जीवन यापन करना पड़ रहा है। रामेश्वर नाथ (71) गरीब व्यक्ति है, जिसके पास रहने के लिए एक कच्चा घर था, पांच साल से इसी कच्चे घर में रहना, सोना ,खाना सहित समस्त कार्य करने पढ़ते है। लेकिन हर बार बारिश मे यह कच्चा घर ढह जाने से परिवार का रहना बहुत मुश्किल हो जाता है। मजदूरी कर के फिर आपना आशियाना तैयार करने में जुट जाते हैं, जिसमें करीब एक महिना लग जाता है। रामेश्वर नाथ सहित ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में बरसात के कारण उसका कच्चा घर था वह भी ढह गया। ऐसे मे उसके सामने सिर छुपाने के लिए भी जगह नहीं है। उसने घास फूस से तैयार कर एक छप्पर बनाया है, जिसमें उसका घरेलू सामान व परिवार रहता है। इतना ही नहीं रिश्तेदारों परिचितों को भी इसी छप्पर में ठहराना पड़ता है।
पंचायत प्रशासन ने भी कटवाए चक्कर
इस परिवार को पंचायत प्रशासन बीपीएल सूची में भी नामांकित नहीं कर रही है, रामेश्वर नाथ ने कई बार पंचायत समिति के भी चक्कर लगाए लेकिन जवाब आता है कि आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई है।
प्रधानमंत्री उज्जवल योजना का भी नहीं मिला लाभ
सरकार वादा बहुत कुछ कर रहीं है, लेकिन गांवों की तरफ़ देखे तो ना के बराबर योजना का लाभ मिल रहा है। रामेश्वर नाथ ने बताया कि इस योजना में कम से कम दस फार्म जमा करा चुका, लेकिन मेरा नाम नहीं आ रहा जबकि कई अन्य सक्षम लोगों तक को इस योजना का लाभ मिला है।
रामेश्वर नाथ का पेट भरना हुआ मुश्किल
केवल भृहत्री महाराज की पुजा करते हैं और कोई समाजसेवी की मदद से आटा दाल मिल जाता है जिससे रामेश्वर नाथ का गुजारा हो रहा है।
सरकारी योजना मात्र नाम, नही मिला लाभ
रामेश्वर नाथ ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रत्येक पंचायतों में बड़े पैमाने पर आवास योजना का लाभ जनता को मिला है, जिसमें आवासहीन या कच्चे मकानों में रहकर जीवन यापन कर रहे लोगों को योजना के तहत आवास बनवाए गए। लेकिन कई निर्धन परिवार कच्चे घर व झोपड़ी बनाकर अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं। जहां एक ओर केंद्र व राज्य सरकार हर गरीब परिवार को अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से पक्का मकान देने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं धरातल पर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से क्षेत्र के गरीब लोगों के पक्के आवासों में रहना केवल सपना ही रह गया है। जिले के जनपद पंचायत क्षेत्रों के गरीबों को अपना घर मुहैया कराने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जरूरतमंद और पात्र परिवारों को इस का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण यहां के कई पात्र परिवारों को अपने कच्चे और जर्जर हो चुके आवासों में ही गुजर बसर करना पड़ रहा है। क्षेत्र में अधिकांश लोग दैनिक मजदूरी कर अपने परिवार की आजीविका चलाते हैं। उनके पास वर्तमान में जर्जर हो रही झोपड़ी ही उनका आश्रय स्थल है। जिसमें वह अपने परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार पंचायत से अपने लिए आवास योजना का लाभ मांग चुके हैं। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई है। जिसके चलते ग्रामीणों ने अब आवास योजना का लाभ मिलने की आस ही छोड़ दी है।

