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पढ़ाई का अंत नही,22 साल बाद दिव्यांग ने दी 10वीं की परीक्षा

दिव्यांग दलजीत कौर ने 22 साल बाद फिर शुरू की पढ़ाई, 10वीं की परीक्षा दी

करनाल. जब हौंसले बुलंद हो, मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी लक्ष्य आसानी से पाया जा सकता है. मुश्किल तो आती है पर उस लक्ष्य के प्रति ईमानदारी और संकल्प कभी आपको कमजोर नहीं पड़ने देते. ऐसी ही एक महिला हैं दलजीत कौर, जिनकी कहानी पढ़कर आपका भी आत्मविश्वास बढ़ जाएगा. दलजीत कौर दिव्यांग हैं लेकिन यह उनके लिए किसी भी तरह से बाधा नहीं है. आइए आपको इनके संघर्ष और हौसले की कहानी बताते हैं.

अक्सर कहा जाता है कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती. यह बात दलजीत की कहानी में भी चरितार्थ होती है. दलजीत के पति भी दिव्यांग हैं. पारिवारिक कारणों से बचपन में दलजीत की पढ़ाई सही से नहीं हो सकी थी. वर्तमान में उन पर अपने 13 साल के बच्चे के साथ और भी कई पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं. ऐसे में उन्होंने फिर से पढ़ाई करने का निर्णय लिया ताकि शिक्षा ग्रहण करके बेहतर जीवन यापन कर सकें. वे चाहती हैं कि उनका बच्चे को वे सब सुविधाएं मिल सकें जो उन्हें नहीं मिल सकीं.

यूं शुरू हुआ पढ़ाई का सिलसिला
दलजीत का कहना है कि वे जब भी किसी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए जाती थीं तो उनसे दसवीं का सर्टिफिकेट मांगा जाता था. कई बार ऐसा होने पर उन्हें लगा कि पढ़ाई बेहद जरूरी है. ऐसे में उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू करने का मन बनाया. चूंकि उन्हें पढ़ाई छोड़े हुए 22 साल से भी ज्यादा का समय हो गया था, तो उन्हें शुरुआत में काफी दिक्कत हुई. लेकिन उन्होंने ठान रखा था कि कैसे भी दसवीं करना है. अब दलजीत दसवीं की परीक्षा दे चुकी हैं और रिजल्ट का इंतजार कर रही हैं. दलजीत का कहना है कि पेपर अच्छे हुए हैं. यदि वे पास हो जाती हैं तो वे आगे कुछ और करने का प्रयास करेंगी. फिलहाल वह घर में सिलाई का काम करके कुछ रुपये कमाती हैं.

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