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हुकमचंद कालेज में ITEP पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया

हुकमचंद कालेज में ITEP पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर । शिक्षा-पथ, दांता, बीर चौराहा नसीराबाद रोड स्थित हुकुमचन्द नोबल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी के अन्तर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका विषय “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम: चुनौतियाँ एवं अवसर” रखा गया। संगोष्ठी का आयोजन 2 सत्रों में किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. नगेन्द्र सिंह, संगोष्ठी अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश विद्यार्थी, मुख्य वक्ता प्रो. आयुष्मान गोस्वामी, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. रीता पारीक द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप- प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी की विधिवत् शुरुआत की गई। डॉ. वेद प्रकाश विद्यार्थी द्वारा प्रो. नगेन्द्र सिंह जी, डॉ. रीता पारीक द्वारा प्रो. आयुष्मान गोस्वामी जी, डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा द्वारा सर्वेश कुमार शर्मा का स्वागत किया गया। स्वागत के इसी क्रम के पश्चात् प्राचार्या डॉ. रीता पारीक द्वारा संगोष्ठी के विषय का प्रवर्तन किया और संगोष्ठी के उद्देश्यों को बताया। डॉ. वेद प्रकाश ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विद्यार्थियों को बताया कि शिक्षा एक तकनीकी शब्द है। भारतीय शिक्षा पद्धति में सभी विषय समाहित है। हम धीरे-धीरे नई शिक्षा नीति के द्वारा प्राचीन शिक्षा पद्धति की ओर बढ़ रहे हैं।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. आयुष्मान गोस्वामी (विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, R.I. E. अजमेर) ने बताया कि ITEP भारतीय परम्परा को समझने और कला से जोड़ने का एक माध्यम है। हमें नई दिक्षा नीति में आने वाली चुनौतियों को समझने की जरूरत है, तभी हम विद्यार्थियों और राष्ट्र निर्माण की बात कर सकते हैं। इसमें सभी भाषाओं को सम्मान मिलेगा। तकनीकी कौशल का ज्ञान NEP का अभिन्न हिस्सा है।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रो. नगेन्द्र सिंह (पूर्व डीन, शिक्षा विभाग महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर, पूर्व डीन, शोध विभाग, R.I.E. अजमेर) ने अपने उद्बोधन में कहा कि ITEP का उद्देश्य शिक्षक को आचार्य वाला बनाने का कार्य करना है। पुरानी शिक्षा पद्धति ने हमें बंधुआ मजदूर बना दिया है। जब शिक्षा तकनीकी से जुड़ जाएगी और व्यवहार में आएगी तब राष्ट्र का सम्पूर्ण विकास होगा। हमें प्रभावी और अनुकूल शिक्षा के बीच संतुलन, मानकीकरण बनाम अनुकूलन, संसाधनों का आवंटन आदि चुनौतियों को स्वीकार करना होगा। इसलिए हमें विद्यार्थी में “सम्प्रेषण कौशल” को उन्नत करना होगा।
द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. आयुष्मान गोस्वामी द्वारा की गई। डॉ. मीनाक्षी शर्मा (प्राचार्या आर्य नारायणी देवी टी.टी. कॉलेज), डॉ. सुनीता जांगीड़ (विभागाध्यक्ष, आर्य नारायणी देवी महाविद्यालय) संकलनकर्ता रहे। तकनीकी सत्र में लगभग 15 प्रतिभागियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। श्री अभिषेक सिंह द्वारा “Integrated Teacher Education Programme as a step towards Multidisciplinary Approach”, कविता गोठवाल द्वारा “एकीकृत शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रम शिक्षक-शिक्षा के क्षेत्र में, नवाचार के रूप में”, दक्षा माथुर द्वारा “Integrated Teacher Education Programme in Context with NEP 2020 Challanges, Concern and Benefits” , वृत्तिका शर्मा द्वारा “Provision for Inclusive Education in ITEP as per the Recommendation of NEP-2020”, डॉ. मीनाक्षी शर्मा द्वारा “Strategies for the Implementation of Integrated Teaher Education Programme in the Reference of NEP 2020” जैसे विषयों पर शोध पत्र एवं लेख प्रस्तुत किए गए।
मंच संचालन डॉ. निधि शर्मा द्वारा किया गया। डॉ. मृत्युंजय शर्मा एवं डॉ. मीनाक्षी शर्मा द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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