इस तरह परेशान हो रहा हैं यह दिव्यांग व्यक्ति,कुछ तो करो सरकारों
पास बनवाने के लिए गया से मुगलसराय जा रहे दिव्यांग, फिर भी नहीं हो रहा काम
गया। रेलवे के एक फरमान ने दिव्यांगों को परेशानियों में डाल दिया है। उसके फरमान की वजह से रेलवे गया जिले के दिव्यांगों का पास नहीं बन पा रहा। आलम ये है कि न तो दिव्यांग पंडित दीन दयाल उपाध्याय (मुगलसराय) स्टेशन जा रहे हैं और न ही उनका पास बन रहा है। यही नहीं जो जा भी रहे हैं उनका भी पास नहीं बन रहा है। कई दिव्यांगों की फाइल लंबे अरसे से लटकी हुई है। बता दें कि पूर्व में ही रेलवे को पास मुहैया करवाना था। लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो रहा है। अब पास बनवाने के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन यहां से जाना ही होगा तभी पास बनेंगे। लेकिन इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। क्यों कि जो व्यक्ति वहां गए उन्हें बताया गया कि फोन किया जाएगा लेकिन अब तक उन्हें फोन नहीं आया है।
रेलवे द्वारा दिव्यांग लोगों को रियायती पास मुहैया कराया जाता है। दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिया जाता है। इसके बाद वह रेलवे पास के लिए आवेदन करते हैं। जिसके आधार पर उन्हें रेलवे पास देते है।
दिव्यांगों की माने तो पूर्व में गया रेलवे कार्यालय ही इस काम को किया करता था। लेकिन बीते कुछ वर्षों से यह काम अब पंडित दीन दयाल उपाध्याय (मुगलसराय) रेलवे आफिस द्वारा किया जा रहा है। दिव्यांग गणेश रजक का कहना है कि उसने 2019 में मुगलसराय जा कर आवेदन किया था।
लेकिन अब तक उन्हें न तो कोई पत्र भेजा गया है और न ही पास। जबकि कहा गया था उन्हें फोन से सूचित किया जाएगा। गणेश रजक पूरी तरह दोनों पैर से दिव्यांग हैं। वह ट्राइ साइकिल से चलते हैं। उन्होंने बताया कि मुगलसराय में दिव्यांगों के लिए रेलवे का दफ्तर दूसरी मंजिल पर है। एक गया से मुगलसराय जाना और फिर दूसरी मंजिल पर दिव्यांगों को चढ़ना दोनो ही बहुत कठिन व खर्चीला काम है।
वहीं, परमानंद सिंह बताते हैं उन्होंने भी रेलवे के मुगलसराय दफ्तर में आवेदन दे रखा पर अब तक कोई लाभ नहीं मिल सका है। वहीं, दिव्यांगों के नेता डॉ विनोद कुमार मंडल का कहना है कि जिले कई हजार दिव्यांग हैं। उन दिव्यांगों की मांग के लिए आने वाले दिनों में संघर्ष किया जाएगा। रेलवे स्टेशन पर धरना देकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

