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दिव्यांगो के लिए कितनी मुसीबत,कब सुधरेगा यह सिस्टम

सरकारी फरमान से अलवर जिले के दिव्यांग मुसीबत में:

किसी जंग से कम नहीं दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाना

सुखराम मीणा/दिव्यांग जगत
अलवर- सरकारी योजनाओं का लाभ लेना है तो प्रमाण पत्र जरूरी है, लेकिन अस्पताल जाओ तो वहां दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं बनता। ऐसे में दिव्यांगों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठा पाना बड़ी समस्या है। कुछ ऐसी ही समस्या से परेशान हैं जिले के दिव्यांग। अलवर के सामान्य चिकित्सालय में दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाए आ रहे लोगों को रुबरू होना पड़ रहा है।

दिव्यांग जगत पत्रिका की कहानी,स्वर्ण लाल पीड़ित की जुबानी-

अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में विकलांग प्रमाण पत्र बनवाना किसी जंग लडऩे से कम नहीं है। एक विकलांग तीन सप्ताह से प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहा है, लेकिन हर बार उसे कोई पेपर की कमी बताकर उसे वापस भेज दिया जाता है। जबकि वो चल फिर व बैठ नहीं पाता है। तीन से चार लोग उसे गाड़ी में लेटा कर अस्पताल लाते हैं व अस्पताल में भी वो लेटा रहता है। थानागाजी के गुडाचुरानी के रहने वाले स्वर्ण लाल मीणा पुत्र ग्यारसी लाल के सात साल पहले ११ हजार केवी की विद्युत लाइन से करंट लग गया था।
करंट से स्वर्ण लाल झुलस गया व छत से नीचे गिर गए था। इस घटना में उनकी रीड की हड्डी व कूल्हे की हड्डी भी टूट गई थी। ऐसे में वे ना तो चल पाते हैं व ना ही बैठ पाते हैं। 24 घंटे वो लेटे रहते हैं। कुछ समय पहले सरकार ने सभी विकलांग को प्रमाण पत्र बनवाना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद मीणा भी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल पहुंचे। लेकिन तीन सप्ताह से वो केवल चक्कर लगा रहे हैं। हर बार उनसे नए पेपर मांगे जाते हैं, ऐसे में उनको परेशान होना पड़ रहा है।

परिजनो का दर्द-
परिजनों का कहना है कि हर बार अस्पताल आने जाने के लिए एक वाहन करना पड़ता है। सोमवार को परिजन उसे गद्दा जमीन पर लेटाकर अपने नम्बर का इंतजार करते रहे। परिजनों ने कहा कि अभी डिस्चार्ज टिकट तो, कभी इलाज के पेपर मांगते हैं। अस्पताल में पेपर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। स्वर्ण लाल अकेले नहीं है इस के जैसे दर्जनों मरीज अस्पताल में इसी तरह से परेशान होते हैं।

अस्पताल बुरे है हालत-

अस्पताल खुलने से पहले विकलांगों की लम्बी कतार अस्पताल में लग जाती है। फार्म जमा कराने, डॉक्टर को दिखाने सहित प्रत्येक कार्य में खासा समय लगता है। अस्पताल के हडडी वार्ड में केवल दो डॉक्टर हैं। वो आउट डोर में मरीजों का इलाज करते है व ऑपरेशन भी करते हैं। सीएमएचओ की तरफ से एक हड्डी रोग विशेषज्ञ को अस्पताल के आउट डोर में लगाया गया है। वो केवल गुरूवार को आउट डोर में डयूटी देता है। इसके बाद भी डॉक्टर व स्टाफ की भारी कमी है।

150 के आसपास जमा होते हैं फार्म-

प्रत्येक सोमवार को १५० के आसपास विकलांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फार्म जमा करते हैं। दोपहर २ बजे तक इनमें से ६० से ७० प्रमाण पत्र बन पाते हैं। जबकि अन्य को आगे की तारीख दे दी जाती है। गुरूवार को भी प्रमाण पत्र बनना शुरू हो गए हैं, बीते गुरूवार को २१ प्रमाण पत्र बने थे।

समाधान की पहल-
अब होगा ई मित्र पर रजिस्ट्रेशन-

विकलांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब ई मित्र पर रजिस्ट्रेशन होगा। उसके बाद कैम्प के माध्यम से लोगों के प्रमाण पत्र बनाये जाएंगे। नए आदेश के बाद यह बदलाव किया गया है।

स्टाफ की कमी-

लैब में फार्म भरने व चैक करने के लिए स्टाफ की कमी है। एक कर्मचारी है, वह फार्म भरता है व चैक भी करता है। इस प्रक्रिया में खासा समय लगता है व लाइन में विकलांग परेशान होते हैं। सामान्य अस्पताल में विकलांग प्रमाण पत्र रिहैबलेटी सेंटर में बनते हैं। इसमें विकलांगों के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। सेंटर में खिड़की नहीं है। इसलिए अंदर घुटन होती है व विकलांग परेशान होते हैं। लोगाे की संख्या ज्यादा होने से गर्मी ज्यादा रहती है।

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