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दिव्यांग नर्सिंगकर्मी पूनम ने भरा मरीजो की जिन्दगी मे उजाला

विश्व विकलांग दिवस पर विशेष

दिव्यांग नर्सिंगकर्मी पूनम ने भरा मरीजो की जिन्दगी मे उजाला

अजमेर । कोराना महामारी मे अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल मे अलवर की दिव्यांग नर्सिंग कर्मी पूनम ने लगातार चौदह दिन तक बिना रुके ओर थके कोविड से जिन्दगी ओर मौत के बीच झुल रहे मरीजों का समय पर इलाज कर जान बचाई । एक दुर्घटना मे उनका पैर टुट गया था । पूनम एक पैर मे कैलीपर लगाती है । जिसके कारण वो ज्यादा चल नही पाती है । छोटी सी उम्र मे ही मां का देहांत होने पर छह भाई बहनो मे सबसे बडी पूनम पर ही घर की सारी जिम्मेदारी आ गई थी । इस वजह से पढाई भी बीच मे छोडनी पडी । पिता शिवदयाल ने टेंपो चलाकर घर संभाला । ऐसे समय मे उनकी हिम्मत पूनम ही थी । टयूशन पढाकर पूनम ने नर्सिंग की तैयारी की । फिर अजमेर मे ही पहली पोस्टिंग मिली ।

घंटो निकाले पीपीई किट मे
पूनम कहती है कि जब नोकरी मिली तो कोराना आ गया था । इस वजह से पहली पोस्टिंग ही आइसीयू मे लगी । जहां मरीज तडफते हुए आ रहे थे । मरीज की सेवा ही हर चिकित्साकर्मी का सबसे बडा धर्म है । इस मुश्किल घडी मे पूनम एक पैर के सहारे घंटो पीपीई किट पहनकर लोगों का जीवन बचाने का प्रयास कर रही थी ।

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