बायोमास से बने बायोकोल का लोकार्पण नसीराबाद में हुआ
बायोमास से बने बायोकोल का लोकार्पण नसीराबाद में हुआ
अन्नदाता बनेगा अब उर्जा दाता एवं रोजगारदाता- विजयवर्गीय
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर । बायोमास से बायो एनर्जी बनाने में जूटी कंपनी मीरा क्लीन फ्यूल्स लिमिटेड के प्रतिनिधि ने मगंलवार दशहरे के अवसर पर नसीराबाद रावण मैदान में नेपियर से बनने वाले कोयले और उसे जलाने वाले चूल्हे का लोकार्पण किया ।
भारतवर्ष का किसान परंपरागत खेती और मानसून पर निर्भर रहकर दयनीय स्थिति में पहुंच गया है परंतु अब यह स्थित बहुत ज्यादा दिन रहने वाली नहीं है । भारत का किसान अपने खेतों में ऊर्जा की खेती करने वाला है । विख्यात पर्यावरणविद एवं एमसीएल कंपनी के प्रतिनिधि एन जी विजयवर्गीय ने बायोफार्मिंग डिग्गी कल्याण मालपुरा प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा डिग्गी में आयोजित किसान संगोष्ठी में बताया कि हम भारत की प्रत्येक तहसील में बायोमास से सीएनजी और बाॅयो फर्टिलाइजर बनाने के प्लांट की स्थापना कर रहे हैं, इसके लिए कच्चा माल नेपियर या हाथी घास होता है जो गन्ना और बाजरे का संकर किस्म है । इसे एक बार बो देने पर सात से आठ साल तक लगातार फसल मिलती रहती है , उसको कम पानी की आवश्यकता होती है और यह पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है । इसकी प्रति वर्ष प्रति हेक्टेयर एक हजार टन तक फसल ली जा सकती है, इसे खरीदने की सुनिश्चितता है।
नसीराबाद के लिए इस संयंत्र की स्थापना का जिम्मा बुधराम जाट को दिया गया है।
इस हेतु सभी ग्राम पंचायतों में प्रतिनिधियों की नियुक्ति कर तहसील के सभी किसानो को जोडते हुए एक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी का गठन किया गया है । इस प्रोड्यूसर कंपनी को सीधे प्रोजेक्ट की लाभप्रदता से जोड़ा जाएगा ।
नैपियर घास से बायोकोल एवं साइलेज का निर्माण भी किया जायेगा।
जाट ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहसील में लगने से तहसील का समग्र विकास संभव होगा । एम सी एल कंपनी रासायनिक खेती को पूरी तरह से बंद कर जैविक खेती के उपर काम कर रही है । जिससे हमारी आने वाली पीढी को रसायन के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकेगा।
जाट ने बताया कि प्लांट लगाने की प्रारंभिक कार्यवाही शुरू कर दी गई है । इस कार्यक्रम के तहत राज्य की लगभग सभी ग्राम पंचायत तक नेपियर घास उगाने का संदेश पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है । राज्य सरकार ने अपने बजट में हर पंचायत में नेपियर का प्रदर्शनी लगाने का प्रावधान कर इसको बढ़ाने में अपना योगदान दिया है । नैपियर पूरे वर्ष हरा रहता है और यह मीठे चारे की तरह दुधारू पशुओं के काम आता है। इसे एक बार बोने पर 8 से 10 साल तक फसल काटी जा सकती है । इसमें ज्यादा प्रोटीन और ज्यादा फाइबर होता है। नेपियर का इसके अतिरिक्त बायो फ्यूल, बायो सीएनजी, बायो कॉल, कैटल फीड बनाने में भी बायोमास की तरह उपयोग होता है । इसके उत्पादन से किसानों की आय भी बढ़ेगी साथ ही साथ पर्यावरण में सुधार होगा । अतः एक अभियान चलाकर उसके आधिकारिक उत्पादन के प्रयास किया जा रहे हैं,
कार्यक्रम में टोडारायसिंह से महावीर धाकड़, केकड़ी से नारायण धाकड, भिनाय से लक्ष्मण सिंह, आनन्द वैष्णव देरांठू , कन्हैयालाल राव , करण चौधरी , ओमप्रकाश जाट , शिव लहरी वैष्णव , महेन्द्र चौधरी , कान्हा राम , सेठी सिह रावत , गणपत जाट , बाबूलाल जाट , सुल्तान खान , मंजीत सिह , शिव कुमार चौधरी , चम्पालाल जाट , श्योकरण चौधरी , दिनेश चौधरी , सोनू जैन , राजकुमार पाटोदी सहित कई गणमान्य लोग एवं किसान उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण के सुधार हेतु संकल्प लिया एवं ऑर्गेनिक खेती करने के लिए. अपने-अपने क्षेत्र में काम करने का वचन दिया।


