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भारत विकास परिषद की प्रांतीय पर्यावरण प्रकल्प कार्यशाला हुई संपन्न

भारत विकास परिषद की प्रांतीय पर्यावरण प्रकल्प कार्यशाला हुई संपन्न

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर । भारत विकास परिषद शाखा केकड़ी के द्वारा भारत विकास परिषद् राजस्थान मध्य प्रान्त की ‘प्रान्तीय पर्यावरण प्रकल्प कार्यशाला’ ‘समाधान’ का आयोजन विधिवत संपन हुआ । केकड़ी शाखा के पर्यावरण प्रकल्प प्रभारी किशन प्रकाश सोनी ने बताया प्रांतीय पर्यावरण कार्यशाला का शुभारंभ भारत माता एवं युगपुरुष स्वामी विवेकानंद के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर राष्ट्रगीत के साथ प्रारंभ हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांतीय उपाध्यक्ष पवन बांगड़ ,मुख्य अतिथि केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम, विशिष्ठ अतिथि केन्द्रीय मार्गदर्शक पवन कुमार अग्रवाल राष्ट्रीय पर्यावरण योजना सदस्य, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त ग्रीन मेंन विजय पाल बघेल अध्यक्ष ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया, पर्यावरणविद् प्रोफेसर डॉक्टर मधुरमोहन रंगा पूर्व विभागाध्यक्ष पर्यावरण विभाग , प्रांतीय महासचिव आनंद सिंह राठौड़ , शाखा पर्यावरण प्रकल्प प्रभारी कृष्ण प्रकाश सोनी मनचासी रहे ।
केकड़ी शाखा अध्यक्ष महेश मंत्री ने बताया कि प्रांतीय स्तर पर आयोजित पर्यावरण प्रकल्प कार्यशाला रविवार को प्रातः 10:15 से दिन में 1 बजे तक केकड़ी के अजमेर रोड़ स्थित पटेल आदर्श विद्या निकेतन विद्यालय में आयोजित हुई । जिसमे प्रांत के 18 शाखाओ के पधाधिकारियों ने भाग लिया । केकड़ी शाखा के सचिव दिनेश वैष्णव ने बताया कि पर्यावरण कार्यशाला कार्यक्रम के पूर्व ही केकड़ी शाखा की वर्ष 2024 – 25 की नवीन कार्यकारिणी का दायित्व ग्रहण किया । जिसमें अध्यक्ष पद हेतु महेश मंत्री, सचिव दिनेश वैष्णव एवं वित्तीय सचिव भगवान माहेश्वरी के साथ कार्यकारणीय सदस्यो एवं प्रकल्प प्रभारी सदस्यो ने शपथ ग्रहण की । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ग्रीन मैन विजय बघेल ने बताया कि मनुष्य को प्रकृति के साथ मजबूत सबन्ध स्थापित करना आवश्यक है। प्रथम वर्षा में स्नान नहीं करना चाहिए कोयले की राख से बर्तन साफ करना क्याकि वो जीवाणु नष्ट करती है ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे मधुर मोहन रंगा ने बताया कि चिकनी मिटटी में चार पांच बीज की बोल गेंद बना कर खाली वन स्थल में डालनी चाहिए
जिसे बारिश के मोसम में बीज अंकुरित होकर उग सके ।
जहा नमी हो वहा ज्यादा उपयोगी वर्षा ऋतु में उपयोगी है। जगली पहाडी क्षेत्र सर्वोतम है।घर में फलों के बीजों को समाल कर रखे घर से बाहर जाते समय रास्ते में जंगल क्षेत्र में डाल सकते है । सघन वन जापानी तकनीक उमी 15 मीटर मिट्टी खोद कर नजदीक 2 पेड़ लगाये जाते है। जामून – रसायनयुक्त जगह भी लगाये जा सकते है। पर्यावरण में पानी का बहुत अधिक महत्व है पानी को आवश्यकता अनुसार ही खर्च करना चाहिए जल ही जीवन है यह सोचकर हमें पानी का सदुपयोग करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने अपने उद्बोधन के दौरान कहा कि हमें शुद्ध पर्यावरण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाना चाहिए जिससे ऑक्सीजन की कमी नहीं हो प्रांतीय प्रकल्प प्रभारी दिलीप पारीक ने पौधरोपण और उनको लालन पालन के दौरान आने वाली कठिनाइयों के समाधान हेतु उचित प्रश्न पूछे गए जिनके समाधान कार्यशाला में आए पर्यावरण प्रेमी मुख्य वक्ताओं ने प्रस्तुत किए गए। समाजसेवी एवं परिषद कार्यकर्ता रामगोपाल सैनी ने जानकारी दी 21 पर्यावरण प्रेमी जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में लगभग 100 या 100 से अधिक पौधे लगाने वालों को इस कार्यशाला में प्रसस्ती पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया । प्रांतीय कार्यशाला में भारत विकास परिषद शाखा के कई सदस्य मौजूद रहे एवं मंच संचालन सर्वेश विजय ने किया ।

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