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साढ़े 17 करोड़ का लगा इंजेक्शन , अब बचेगी इस मासूम की जिंदगी

जयपुर: दुनिया का सबसे महंगा साढ़े सत्रह करोड़ का इंजेक्शन लाया गया जयपुर, अब बचेगी मासूम हृदयांश की जिंदगी

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर । स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉपी से पीड़ित हृदयांश अब आम लोगों की तरह जिंदगी जी सकेगा। अब उसे दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन जोलगेनेस्मा लगाया गया है। उसके लिए पेपर वर्क कंप्लीट किया जा रहा है। जेके लोन अस्पताल में आये इंजेक्शन को बच्चे को लगाया गया है। हृदयांश की मदद के लिए आमजन के साथ पुलिस विभाग भी आगे आया है।हृदयांश के चाचा स्वप्निल ने बताया कि इंजेक्शन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी ने भी हृदयांश के इलाज में काफी मदद की है। उन्होंने इंजेक्शन की 17.5 करोड़ रुपए की राशि को चार किश्तों में जमा कराने की छूट दी है। अब तक क्राउड फंडिंग से जमा हुए 9 करोड़ रुपए से इंजेक्शन की पहली किश्त जमा करा दी है। बाकी राशि को तीन किश्तों में एक साल में जमा कराया जाएगा

प्री-टेस्ट के बाद लगाया गया इंजेक्शन

अमेरिका से लाया गया जोलगेनेस्मा इंजेक्शन सोमवार को जयपुर के जेके लॉन हॉस्पिटल में पहुंच गया था। जिसे मंगलवार को हृदयांश के प्री-टेस्ट और पेपर वर्क कंप्लीट किया गया ।जिसकी रिपोर्ट आने के बाद कागजी कार्रवाई कर इंजेक्शन लगाया गया।

दो साल तक ही इलाज संभव

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक जेनेटिक बीमारी है। इसके कारण हृदयांश का कमर से नीचे का हिस्सा बिल्कुल भी काम नहीं करता है। इस बीमारी का इलाज 24 महीने की उम्र तक ही किया जाता है। इस बीमारी का समय पर इलाज नहीं हाेने पर यह पूरे शरीर में फैल जाती है। फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं। इससे जान का भी खतरा हाेता है। इसके लिए विदेश से विशेष प्रकार के इंजेक्शन की जरूरत होती है

इनका कहना हैं

हृदयांश को इंजेक्शन लगने के बाद बच्चा अब 24 घंटे डॉक्टर्स की निगरानी में रहेगा। इसके बाद दो महीने तक बच्चे के दवाईयां चलेगी। फिर बच्चा आम लोगों की तरह जीवन यापन कर सकेगा। इसमें डॉ प्रियांशु माथुर
एसएमए बीमारी के विशेषज्ञ, जयपुर का भी पूर्ण सहयोग रहा।

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