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अजमेर क्षेत्र को बिसलपुर से मिलना चाहिए 8 टीएमसी पानी वर्तमान में मिल रहा है 5 टीएमसी, सांसद चौधरी ने समीक्षा बैठक में अजमेर का रखा पक्ष

सांसद भागीरथ चौधरी ने जल जीवन मिषन की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में अजमेर संसदीय क्षेत्र योजनाओं की प्रशासनिक, तकनीकी एवं वितीय स्वीकृतियां धीमी गति से होने का मुद्दा उठाया

अजमेर क्षेत्र को बिसलपुर से मिलना चाहिए 8 टीएमसी पानी वर्तमान में मिल रहा है 5 टीएमसी, सांसद चौधरी ने समीक्षा बैठक में अजमेर का रखा पक्ष

जल वितरण परियोजना में पशु गणना को जोडकर लीटर प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति निर्धारित किया जाए ताकि पशुओं को भी पानी की पर्याप्त उपलब्धता हो – सांसद चौधरी

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर । पानी की सुव्यस्थित आपूर्ति हो इस हेतु बिसलपुर बांध में पानी के आवक एवं स्टोरेज को बढाने हेतु राज्य स्तरीय जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक में सांसद चौधरी ने रखी मांग । केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में होटल जल महल पैलेस, अजमेर पुलिया से पहले, सार्वनिर्माण विभाग कार्यालय के पास, जयपुर में राज्यस्तरी जलजीवन मिशन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई । जिसमें राजस्थान के सभी सांसदों ने भाग लिया । अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी ने जल जीवन मिशन की धीमी गति के बारे में अवगत कराया , साथ ही अजमेर संसदीय क्षेत्र में पानी की निर्बाध आपूर्ति हेतु किए जाने वाले कार्यो के बारे में भी महत्वपूर्ण सुझाव रखें। सांसद चौधरी ने कहा कि आज देश की महत्वपूर्ण ’’जल जीवन मिशन योजना’’ की सम्पूर्ण प्रदेश में चल रही क्रियान्विति को लेकर बैठक का आयोजन किया जा रहा हैं। आशा है इस बैठक के आयोजन से राजस्थान प्रदेश में जल जीवन मिशन की धीमी गति को तीव्रता मिलेगी। और राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण जन कल्याणकारी योजना का लाभ प्रदेश के हर घर को पहुचाने में मदद करेगी। जल जीवन मिशन के तहत अजमेर लोकसभा क्षेत्र में सकारात्मक कार्यवाही की सुनिश्चितता जल शक्ति मंत्रालय एवं प्रदेश के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग द्वारा सयुक्त रुप से किया जाता हैं। तो निश्चित ही उक्त योजना का लाभ आमजन की पहुच तक मिल सकेगा। वर्तमान में जल जीवन मिशन के तहत अजमेर जिले की 05 परियोजनाओं को तैयार कर उक्त योजना के सफल क्रियान्वयन के प्रयास किये जा रहें हैं। लेकिन उक्त योजनाओं की प्रशासनिक, तकनीकी एवं वितीय स्वीकृतियां धीमी गति से होने के कारण मेरे अजमेर क्षेत्र में कार्य सुचारु रुप से नहीं हो पा रहा हैं। इस हेतु ठोस क्रियान्विति आज की बैठक में सुनिश्चित करावें। गत 02वर्षों में केवल अजमेर-पींसागन परियोजना की वितीय स्वीकृति जारी होकर गत माह 16 मार्च 2022 को लगभग 256.57 करोड का कार्य आदेश जारी हुआ हैं। बाकि की 04 परियोजना जिसमें केकडी-सरवाड-सांवर परियोजना, अंराई-किशनगढ-सिलोरा परियोजना, श्रीनगर-नसीराबाद परियोजना एवं भिनाय-मसूदा परियोजना आज भी जयपुर-दिल्ली के बीच स्वीकृति हेतु प्रक्रियाधीन हैं। अजमेर क्षेत्र का प्रमुख जल स्त्रोत बीसलपुर बांध हैं। जिससे वर्तमान में अजमेर क्षेत्र को 05 टीएमसी पानी की मात्रा मिल रही हैं। जो भविष्य की मांग के अनुरुप काफी कम हैं। वास्तविक रुप से देखा जाये तो वर्तमान परिपेक्ष्य में जल जीवन मिशन के प्रस्तावित कार्य पूर्ण करने हेतु अजमेर क्षेत्र को पानी की मात्रा लगभग 2.62 टीएमसी बढाने की महती आवश्यकता हैं। जिसे बढाकर 8 टीएमसी पानी की मात्रा बीसलपुर बांध से अजमेर क्षेत्र को दिलाने हेतु आवश्यक क्रियान्विति करावें। उन्होने कहा कि वर्तमान में जयपुर जिले को 11.2 टीएमसी पानी मिल रहा हैं। जबकि वहां भूमिगत जल स्त्रोंत अजमेर से अत्यधिक हैं। अजमेर क्षेत्र में भूमिगत जल स्त्रोत नगन्य सा हैं। जिसकी गुणवत्ता भी पीने योग्य नहीं हैं।बीसलपुर बांध में पानी की आवक की निरन्तरता बनी रहें इस हेतु ठोस योजना की क्रियान्विति कराई जावें। ताकि जयपुर के साथ-साथ अजमेर की जनता को पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति होती रहें। नोनेरा बांध से बीसलपुर बांध को जोडने के कार्य पर तीव्र गति से क्रियान्विति को मुर्त रुप दिलाया जायें। ईसरदा बांध योजना पर आवश्यक क्रियान्विति की जायें। चम्बल नदी को ब्रहामाणी नदी से जोडने की योजना क्रियान्वित कराई जावें। बीसलपुर बांध की ऊचाई 01 मीटर बढाने हेतु आवश्यक योजना क्रियान्वित कराई जावें। वर्तमान में बीसलपुर बांध का पानी प्रतिवर्ष 13.70 टीएमसी वाष्पीकरण के कारण उड जाता हैं। जो विचारणीय हैं। इसे रोकने हेतु राज्य एवं केन्द्र स्तर पर सयुक्त रुप से ठोस क्रियान्वयन की आवश्यकता हैं। वर्ष 2003 के आसपास बीसलपुर बांध में वाष्पीकरण को रोकने हेतु सिटायल एल्कोहल का छिडकाव प्रस्तावित किया गया था। लेकिन वाष्पीकरण को रोकने हेतु अभी तक ठोस क्रियान्वयन नहीं हो पाया हैं जो विचारणीय हैं। वर्तमान में नई-नई तकनीको का प्रयोग वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा हैं। उनका प्रयोग हमारे बीसलपुर बांध पर किया जायें इस हेतु आवश्यक स्वीकृति की महती आवश्यकता हैं। पशुधन हेतु भी जलापूर्ति हेतु पर्याप्त प्रावधान हो इस हेतु सांसद चौधरी ने बताया कि राजस्थान प्रदेश में गत वर्षो में विभिन्न जल वितरण परियोजनाओं में 40 लीटर एलपीसीडी अर्थात् लीटर प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति को आधार मानकर कार्य किया जा रहा हैं। जबकि पूर्व में राजस्थान प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन को दृष्टिगत रखते हुये 30 लीटर प्रतिदिन प्रति पशु को आधार मानकर जल वितरण योजनाओं का निर्माण किया जाता था। जिससे पशुधन को भी पर्याप्त जल आपूर्ति हो जाती थी। हालाकि वर्तमान मे इसे बढाकर 55 लीटर एलपीसीडी किया जा चुका हैं। जो कम हैं इसमे पशु गणना को जोडकर, इसे बढाकर 70 लीटर एलपीसीडी किया जायें।
सांसद ने कहा कि जल जीवन मिशन शहरी योजना को राजस्थान प्रदेश में शीघ्र लागु कराकर इसे मुर्तरुप दिलानें हेतु ठोस क्रियान्विति सुनिश्चित करावें। 15 वें वित आयोग के तहत प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आंवटित बजट से 60 प्रतिशत की राशि जल और स्वच्छता पर खर्च की जानी हैं। जो कि पंचायती राज क्षेत्र के अन्तर्गत हैं। लेकिन अत्यन्त खेद है कि राजस्थान प्रदेश के गांवों में उक्त पैसा मिल तो रहा हैं लेकिन उस पर कार्य नहीं हो रहा हैं। ग्रामीण क्षेत्र की जनता पानी की सुनिश्चित आपूर्ति एवं ठोस कचरा निस्तारण को लेकर परेशान हैं। इस पर मजबूत कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए ग्रामीण क्षेत्रों की यह बहुत बडी समस्या होती जा रही है।

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