सांस्कृतिक अहीरवाल अपनी सांस्कृतिक विरासत को विश्व में स्थापित करेगा -सत्यव्रत शास्त्री
सांस्कृतिक अहीरवाल अपनी सांस्कृतिक विरासत को विश्व में स्थापित करेगा -सत्यव्रत शास्त्री
महेन्द्रगड़ र्हारेयाणा /पंडित पवन भारद्वाज /दिव्यांग जगत
सांस्कृतिक अहीरवाल के निदेशक वम् वैदिक विद्वान सत्यव्रत शास्त्री ने महेन्द्रगढ़ खण्ड के गांव खेडकी मे आर्यसमाज के पाक्षिक यज्ञ के अवसर पर उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुये कहा कि अहीरवाल की संस्कृति का उद्गम महाभारत काल से है प्रचीन इतिहास व महाभारत में उल्लेखित आभीर संस्कृति ही आगे चलकर अहीरवाल संस्कृति के नाम से जानी गयी है उन्होंने कहा कि भारत के पराभव काल मे भी यह संस्कृति अपने आप मे विश्व प्रसिद्ध रही है परन्तु देश की आजादी के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के लिए नसीब पुर मे जो लडाई लडी गयी जिसमे अंग्रेजी सेना के बडे स्तर अफसरो व सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था और पांच हजार से अधिक अहीरवाल के सैनिक जिसमे शहीद हुए परन्तु उसके बाद भी युद्ध हार गये थे इसी युद्ध की हार बाद इस संस्कृति के पतन के काल शुरू होता है अंग्रेजो ने इस क्षेत्र को जीतने के बाद उन लोगो भेंट कर दिया जिन्होंने युद्ध मे अंग्रेज की मदद की थी. इसीलिये इस समस्त अहीरवाल क्षेत्र को अनेक टुकडो मे बांट कर नाभा, पटियाला जीन्द जयपुर अलवर आदि अनेक रियासतों को सौप दिया.90 वर्षो तक अंग्रेजी शासन ने इस क्षेत्र को नष्ट भृष्ट करने मे कोई कसर नही छोडी.सत्यव्रत शास्त्री ने कहा अहीरवाल क्षेत्र श्री माधोपुर से तावडू तथा विराट नगर से फरुखनगर तक फैला है सांस्कृतिक अहीरवाल इस क्षेत्र के समस्त गांवो एवम् शहरी क्षेत्रों का व्यापक व स्वतंत्र इतिहास लिखेगा जिस के लिये गांव और शहर मे समीतियां बनायेंगे.इस समस्त क्षेत्र को 50 ईकाइयों मे बांटा गया है
लेखन का यह कार्य नवम्बर मास से शुरू हो गया आज की कार्यशाला मे खेडकी व आसपास के प्रमुख लोगो ने भाग लिया जिनसे इतिहास लेखन के 24 बिन्दुओं पर चर्चा कर उनकी जानकारी सांझा की .कार्यशाला मे महाशय सोहनलाल ,रामसिंह आर्य, पूर्व सरपंच सुभाष चंद्र गडानिया, प्रकाश वीर ,बाबूलाल सोनी, यशवंत, महेंद्र सोनी पाल्ह, मास्टर जयसिंह गुलावला, मास्टर संजय मास्टर राजेश खेडकी सुरेन्द्र उपस्थित रहे

