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203 साल का हुआ नसीराबाद शहर

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

203 साल का हुआ नसीराबाद शहर

अजमेर । नसीराबाद शहर शनिवार को 203 साल का हो चुका है । नसीराबाद 20 नवंबर के दिन अंग्रेज जनरल सर डेविड ऑक्टरलोनी ने इसकी नींव रखी थी । इसे मुगल सम्राट शाह आलम नसरुद्दीन ओला की उपाधि से नवाजा था । इसी कारण इसका नाम आगे जाकर नसीराबाद पड़ा । अंग्रेज ब्रिगेडियर नॉक्स ने नगर में छावनी की स्थापना की । जिसमे स्वतंत्रता संग्राम में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी । कहा जाता है कि शुरुआती दौर में यहां अंग्रेज अफसरों का बोलबाला था । यहां के स्कूल , पोस्ट मास्टर , थानेदार , जज सभी अधिकारी अंग्रेज थे । जिसका असर नसीराबाद पर आज तक नजर आता है । लेकिन नसीराबाद छावनी 28 मई 1857 को उस समय चर्चा में आया । जब देश भक्तों ने छावनी में विद्रोह किया था । स्वतंत्रता संग्राम की याद मे बना कीर्ति स्तंभ आज भी उस विद्रोह की याद दिलाता है । विजय सिंह पथिक , चांद करण शारदा , हवलदार गोविंद कहार , मेजर अब्दुल हमीद के नाम से भी नसीराबाद को जाना जाएगा । 5665 दशमलव 42 एकड़ में फैले इस नसीराबाद क्षेत्र मे आज भी सैन्य छावनी ही है । अंग्रेजों ने ही गेंदघर , मिशन स्कूल , मार्टिन मेमोरियल चर्च का निर्माण कराया । जो आज भी नसीराबाद की पहचान है । बताया जाता है कि इस चर्च का निर्माण उस समय फैले बीमारी हेजे से बचने के लिए बिलियन मार्टिन ने कराया था । इसी तरह नसीराबाद की जामा मस्जिद भी अपनी स्थापत्य कला को लेकर अपनी अलग पहचान रखती है । जिसमें 8000 लोग एक साथ नमाज पढ़ सकते है । बाद में आजादी के बाद भी स्कूल , कॉलेज , B.Ed कॉलेज जैसी सुविधाओं में इजाफा हुआ है ।

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