DESH KI AAWAJ

भगवान नारायण सेवा संस्था (रजि.) द्वारा श्री कृष्णा ड्रामाटिक क्लब अनाज मंडी के मंच पर भव्य रामलीला का शुभारंभ हुआ

भगवान नारायण सेवा संस्था (रजि.) द्वारा श्री कृष्णा ड्रामाटिक क्लब अनाज मंडी के मंच पर भव्य रामलीला का शुभारंभ हुआ

रिपोर्टर भगवत शर्मा
दिव्यांग जगत न्यूज पेपर & चैनल

भगवान नारायण सेवा संस्था रजिस्टर्ड द्वारा श्री कृष्णा ड्रामेटिक क्लब अनाज मंडी के मंच पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य राम की लीला का मंचन प्रारंभ हुआ रामलीला के संरक्षक दयानंद सैनी( मंत्री) ने बताया कि रामलीला मे सुबह 11:00 बजे मुरारी लाल सैनी (धोलू) अपनी धर्मपत्नी सुमन सैनी के साथ गणेश पूजन तथा अनूप भाटा ने ड्राफ्ट पूजन किया रामलीला में रात्रि 9:00 बजे प्रथम दिन मुख्य अतिथि राकेश यादव मित्रपुरा चेयरमैन USSL एकेडमी तथा महंत बालक दास महाराज जी रविदास मंदिर द्वारा रिबन काटकर तथा दीप प्रज्वलित करके गणेश पूजन के साथ रामलीला का शुभारंभ किया रामलीला में पहले दिन शिव तलहटी, रावण वेदवती संवाद, और श्रवण की लीला का बड़ा ही सुंदर मंचन किया रामलीला में भगवान शंकर जी पार्वती जी को भगवान राम की लीला सुनाते हैं यहीं से रामलीला का प्रारंभ होता है रावण को घमंड हो जाता है कि मैं कैलाश पर्वत को उठाकर लंका ले जाता हूं तभी नंदी और रावण में संवाद होते हैं नंदी रावण को बार बार समझाता है कि आप ऐसा नहीं कर सकते उधर मारीच भी रावण को समझाते हैं लेकिन रावण नहीं मानता तब रावण कैलाश पर्वत को उठाने की कोशिश करता है लेकिन हिला नहीं पाता तब रावण को अपने गलती का एहसास होता है और रावण का घमंड चूर हो जाता है रावण भगवान शंकर से माफी मांगते हैं भगवान शंकर उन्हें खुश होकर चंद्रहास खड़ग देते हैं तथा जब रावण वन में जाता है तो रावण को कुस ध्वज ऋषि की कन्या वेदवती मिलती है रावण रावण उसे उठाने की कोशिश करता है वेदवती रावण को बार-बार समझाती है लेकिन रावण नहीं मानता वेदवती रावण को कहती है कि तूने मुझे बुरी चेष्टा से छू लिया है अब यह शरीर विष्णु भगवान के काबिल नहीं है मैं इस संसार को छोड़ कर जा रही हूं और अगले जन्म में राजा जनक के घर जन्म लूंगी और तेरी मौत का कारण बनूंगी ऐसा कहकर वेदवती अग्नि में अपने प्राण दे देती है तथा जब राजा दशरथ वन में शिकार करने जाते हैं तब राजा दशरथ शब्दभेदी बाण चलाते हैं तो यह बात श्रवण के लगता है श्रवण अपने अंधे माता पिता को तीरथ करवाने के लिए वन में जाते हैं रास्ते में माता पिता को प्यास लगती है तब श्रवण सरयू नदी में जल लेने चले जाते हैं दशरथ का शब्द भेदी बाण श्रवण को लगता है और श्रवण हे माता हे पिता कहकर जमीन पर गिर जाते हैं तभी राजा दशरथ मां आते हैं। और श्रवण के बाण लगा देखकर अफसोस करते हैं की दशरथ तूने यह क्या कर दिया तब श्रवण कहते हैं की है राजा आप है मेरे अंधे माता पिता को जल पिला देना मैं इस संसार को छोड़कर जा रहा हूं तब राजा दशरथ अपनी गलती पर विलाप करते हैं और बड़े दुखी मन से माता पिता के पास जल लेकर जाते हैं माता पिता दशरथ की आवाज सुनकर कहते हैं कि तुम मेरे श्रवण नहीं हो मेरा श्रवण कहां है तब राजा दशरथ कहते हैं कि आपका श्रवण स्वर्ग सिधार गया तब माता पिता राजा दशरथ को श्राप देते हैं कि जिस प्रकार पुत्र वियोग में हम तड़प तड़प कर मर रहे हैं तुम उसी प्रकार पुत्र वियोग में तड़प तड़प कर मरोगे लीला को यहीं पर विराम दिया जाता है रावण -डब्बू कमानिया, मारीच -जगदीश बिल्ला, नंदी- मनोज तायल, शिव शंकर- नवीन सिंघल ,पार्वती -अरविंद सैनी, वेदवती -मनोज निर्मल, श्रवण- प्रवीण शर्मा ,दशरथ -नरेश तायल, शांतनु -सतनारायण भगत जी, मंच संचालक- भारत भूषण तायल आदि कलाकारों ने अपनी कला से सबका मन मोह लिया रामलीला मंचन में पार्थ कंछल, ध्रुव वर्मा ,जगदीश बिल्ला द्वारा रामलीला स्टेज को बड़े ही सुंदर तरीके से सजाया गया रामलीला मंचन में विजय जैन, सुशील चौटाला, जोगिंदर शर्मा, संजय वर्मा ,संजय दुलगच, विष्णु , योगेश कौशिक, मोनू भाटा, होशियार, संजय गौड़, सिंघल, तायल, भारत भूषण कंछल, वासुदेव, दीपक सेन, राहुल वर्मा, महावीर, ईशान मित्तल, पप्पी छक्कड़, मुकेश आनंद (शाकाल), किशन सेठ जी चक्की वाले उप प्रधान रामलीला कमेटी, आदि सदस्यों का सहयोग रहा

admin
Author: admin