नसीराबाद छावनी परिषद प्रशासन के अव्यवहारिक और अदूरदर्शी निर्णयों के चलते होने वाले नुकसान का खामियाज़ा नगर के निरीह जनता को भुगतना पङ रहा है ,
नसीराबाद छावनी परिषद प्रशासन के अव्यवहारिक और अदूरदर्शी निर्णयों के चलते होने वाले नुकसान का खामियाज़ा नगर के निरीह जनता को भुगतना पङ रहा है , जब कि छावनी परिषद अपने अङियल रवैये पर कायम रहकर अभी भी आमजन की तकलीफों के प्रति आंखे मूंदे हुए है
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर । नसीराबाद छावनी परिषद के पूर्व मुख्य अधिशाषी अधिकारी अरविन्द कुमार नेमा ने दो वर्ष पूर्व नसीराबाद मे सोर्दयकरण और जीर्णोद्धार करने के बहाने फ्राम जी चौक स्थित लाल डिग्गी तालाब का जीर्णोद्धार जल मिशन योजना के कराया था। जिसके अन्तर्गत तालाब को गहरा किया गया , वाकिंग पाथ ,चौपाटी और सेल्फी प्वाइंट आदि बनाये गये और दावा किया गया ये पिकनिक स्पाट लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनेगा । लेकिन चौपाटी का पाथ वे दो -चार बरसाते भी नहीं झेल पाया और चोपाटी की जमीन धंस गई वह चौपाटी की दुकानें फिर एक बार सङक पर आ गई और छावनी परिषद द्वारा करवाए गए कामों की गुणवत्ता की कलई खुल भी गई । वही डिग्गी का काम पूरा होने के पहले ही श्री नगर रोड स्थित फूल सागर सरोवर की जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने और सोदर्यकरण का काम छेड दिया गया जिसमे सरकारी धन का जम कर दुरुपयोग कर विकास कार्य अधर मे ही छोड़कर पूर्व सी ई ओ नेमा का स्थानांतरण हो गया । उनके स्थान पर आये दुसरे सीईओ उमेश कुमार पारिक ने पूर्व अधिशाषी अधिकारी के काम करने के तरीके को ही तवज्जो दी और चंद खबर नवीशों को छोड़कर ज्यादातर पत्रकारों से दूरी बना कर मनमानी शुरू कर दी और नगर के किनारे उपेक्षित पडे सूर सागर तालाब की सुधि लेने का ढिढोरा पीटते हुए इस तालाब को जीर्णोद्धार करने के बहाने चारो तरफ से खोदकर बडा करने का निर्णय लिया और युद्ध स्तर पर काम शुरु करवा कर क्षेत्र का भूगोल और नक्शा ही बदल दिया । लेकिन वह भी अपने अव्यवहारिक निर्णय को अमलीजामा नहीं पहना सके और बारिश का मौसम शुरू हो गया और सैकडो वर्ष पुराने शहर के कुदरती आवक जावक के रास्ते को बन्द कर नये निर्माण किये जाने का नतीजा भी सामने आने लगा । जब जमीन के नीचे एकत्रित होकर बरसाती पानी ने नगर की पहचान के रूप में बने पुराने मकानों मन्दिरों और सार्वजनिक स्थानों को तबाह करना शुरू कर दिया । मकानों को सीलन ने कमजोर करना शुरू किया । वहीं अनेक स्थानों पर जमीन नीचे धंसने लगी । जिसका नतीजा यह हुआ कि नगर का सबसे पुराना घांसी वाले बालाजी जी के मन्दिर की छत,गुम्बद और दीवारें तक दरक गई । इस मन्दिर परिसर से होकर वह नाला सैकङो सालों से बह रहा है । जिस में पूरे शहर का बरसाती पानी बह कर नवल राम की बगीची के पीछे स्थित तालाब में जाता रहा है । परन्तु वह अब तक वह सुरक्षित था , लेकिन हाल ही में किये गये जीर्णोद्धार और सोर्दयकरण के साथ इस नाले के पास एक और नाला जोड दिया गया जिस में सैन्य क्षेत्र का बरसाती पानी भी बह कर आने से प्राचीन घांसी वाले बालाजी का मन्दिर टापू जैसा बन गया । जिसके दोनों ओर से जल भर जाने से बरसात के पानी ने मन्दिर की नींव हिला दी और जमीन धडकने से मन्दिर की छत क्रेक हो गई और दीवारें दरकने लगी । जिस से बालाजी मंदिर परिसर में रहने वाला मन्दिर पुजारी मोहन शर्मा का परिवार भी खतरे में आ गया है । गौरतलब है कि यह परिवार इस मन्दिर में कई पीढियों से रह रहा है और हमेशा से महफूज रहा है । परन्तु छावनी प्रशासन द्वारा जारी किए गए गलत फरमानो व कार्य के चलते बालाजी मंदिर और लाल डिग्गी तालाब के निकट के मकान असुरक्षित होने लगे है । जिससे आस पास मे रहने वाले आम जन कभी भी बडे हादसे का शिकार हो सकते है ।


