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अगर ऐसा हो जाए तो दिव्यांगो की किस्मत सबसे अच्छी

सरकार,दिव्यांगो की सुनो पुकार

क्या इस बजट में होगी लाखों दिव्यांगो की आस पूरी

जयपुर। राजस्थान के दिव्यांगो को बजट में क्या मिलेगा यह अभी भविष्य के गर्भ में हैं। अगर राजस्थान सरकार दिव्यांगो की निम्न मांगो को इस बजट में पूरा कर देती हैं तो दिव्यांगो जीवन काफी आसान हो जायेगा।

(1) पेंशन वृद्धि – वर्तमान में विशेष योग्यजनों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन 750/ रुपये प्रतिमाह प्रदान की जा रही है, जो पर्याप्त नहीं है. पिछले 05 सालों से पेंशन राशि में बढोतरी नहीं की गई है। विशेष योग्यजनों की शारीरिक और आर्थिक परेशानियों को मद्देनजर नजर रखते हुए न्यूनतम पेंशन राशि 1500/ रुपये तो होनी ही चाहिए.
कई राज्यों में पेंशन राशि 2500/ रुपये प्रतिमाह तक है। पड़ोसी राज्य हरियाणा इसका उदाहरण है।

(2) विकलांगता की एक श्रेणी ऐसी भी है जो शत प्रतिशत विकलांग है. जिन्हें 24 घंटे केयर गिवर की आवश्यकता होती है. हमेशा बिस्तर पर लेटे रहते हैं, स्वयं से उठ बैठ भी नहीं सकते.
जिन्होंने कभी घर की देहरी भी नहीं लांघी. डाक्टर को दिखाने जाना हो तो 2 लोग साथ चाहिए. ऐसी संतान की देखभाल करने में पेरेंट्स सक्षम नहीं हैं।
उनकी आर्थिक स्थिति बद से बदतर है। ऐसा वर्ग जो दिव्यांग सबलीकरण की बड़ी बड़ी योजनाओं का लाभ नहीं ले सकते,
इस तरह के विशेष योग्यजनों के लिए भरणपोषण भत्ता के रूप में कम से कम 3 हजार रुपये प्रतिमाह का प्रावधान किया जाए।

(3) रोजगार – विशेष योग्यजन वर्ग गरीबी- अशिक्षा- बेरोजगारी से त्रस्त है. इसी को ध्यान में रखते हुए आदरणीय सीएम साहब ने विशेष योग्यजन श्रमिकों को नरेगा में रोजगार में 100 अतिरिक्त कार्य दिवस की घोषणा पिछले बजट में की थी, लेकिन उनकी मंशा के अनुरूप विशेष योग्यजन श्रमिकों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। यदि नरेगा योजना में विशेष योग्यजन श्रमिकों को 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कर दिया जाए तो इसका बहुत बड़ा लाभ इनको मिल सकता है। वैसे भी दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 37(b) के तहत गरीबी उन्मूलन एवं विकासशील योजनाओं में विशेष योग्यजनों को 5 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए।

(4) कृषि विद्युत कनेक्शन – राजस्थान में एससी वर्ग के किसानों को तत्काल मांग के आधार पर बिजली के कृषि कनेक्शन न्यूनतम शुल्क में जारी किए जाते हैं। उसी पैटर्न पर विशेष योग्यजन किसानों को भी कनेक्शन जारी किये जाने का प्रावधान किया जाए। इस प्रावधान से कोई आर्थिक बोझ सरकार पर पडने वाला नहीं है।

(5) शिक्षा – सीनियर सेकेंडरी के बाद विशेष योग्यजन दिशाहीन होकर बेरोजगार घूमने को मजबूर हैं। हायर एजूकेशन एवं प्रोफेशनल कोर्स इनके लिए एक्ससेबल नहीं हैं और क्वालिटी स्किल्ड नहीं होने की बजह से प्राईवेट सैक्टर में जोब्स नहीं मिलता है। इसलिए इनको आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए जयपुर में एक स्पेशल आईटीआई सेंटर खोलने की आवश्यकता है।

(6) बीपीएल – पिछले बजट में दिव्यांग पेंशनधारी एवं उनके परिवार को बीपीएल परिवारों की तरह सभी सुविधाएं देने की घोषणा अभी तक लागू नहीं हुई है। उसे तत्काल क्रियांवित करवाया जाए।

(7) विकलांगता प्रमाण पत्र – किसी भी तरह की सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु विकलांग को प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।
दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 के तहत विकलांगता की श्रेणियाँ 7 से बढ़कर 21 हो गई हैं तथा अब विकलांगता प्रमाण पत्र online ही जारी किए जा सकते हैं offline नहीं. सभी 21श्रेणी के विकलांगता प्रमाण पत्र जारी के लिए सुदृढ आधारभूत ढांचे की आवश्यकता है ताकि सहज सुलभ तरीके से विकलांगता प्रमाण पत्र मिल सकें। अभी बड़ी तादाद में विकलांगता प्रमाण पत्रों की पेंडेंसी है
विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में अनेकों जांच की आवश्यकता होती है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों, जांच उपकरणों एवं टैक्निशियिन्स के पद रिक्त होने से यह पेंडेंसी बढ जाती है। इसके अलावा सरकारी हास्पिटलों में प्रमाण पत्र जारी होने वाले स्थान पर पेयजल, छाया, स्पेशल टायलेट्स, रैंप आदि की सुविधाएं विकसित करने की भी आवश्यकता है।
मेरा सुझाव है कि इसके लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया जाए एवं अलवर की तरह सक्षम अभियान चलाया जाए।

(8) नियोजन – सरकारी नौकरियों में सीमित अवसर हैं, इसलिए प्राईवेट सैक्टर में भी नियोजन में विशेष योग्यजनों को आरक्षण पर विचार किया जाना चाहिए। जिस व्यापारिक/औधोगिक संस्थान में बीस अथवा इससे अधिक का वर्क फोर्स है उनमें बीस में एक विशेष योग्यजन को जोब देना अनिवार्य किया जाना चाहिए। विशेष रूप से जिन औद्योगिक इकाइयों को राज्य सरकार द्वारा किसी भी तरह से छूट प्रदान की जाती है, उन संस्थानों में इस प्रावधान को आवश्यक किया जा सकता है।

(9) लोक प्रतिनिधित्व – राजस्थान में प्रत्येक शहरी निकाय में एक विशेष योग्यजन को पार्षद के रूप में मनोनीत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, लेकिन थ्री टायर पंचायती राज निकायों में यह प्रावधान लागू नहीं किया है। राजस्थान में भी प्रत्येक ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद में एक विशेष योग्यजन को सदस्य मनोनीत करने की घोषणा बजट में की जा सकती है। इससे विशेष योग्यजन का समाज में सम्मान बढेगा।

(10) यात्रा भत्ता – विशेष योग्यजन कार्मिकों का ट्रांसपोर्ट अलाउंस सन् 2012 से 600/ रुपये है, जो बिलकुल भी पर्याप्त नहीं है। विगत 10 साल में पेट्रोल की कीमतों में बेतहाशा बढोतरी हुई है जबकि भत्ता नहीं बढाया गया है। इसे बढाकर केन्द्र सरकार द्वारा प्रदत्त भत्ते के समान किया जाए।

(11) शिक्षा – राजस्थान में सरकारी अथवा प्राईवेट सैक्टर में दृष्टिबाधित विशेष योग्यजन छात्रों के अध्ययन के लिए एक भी महाविद्यालय नहीं है इसलिए जयपुर में इन छात्रों के लिए एक स्पेशल कालेज खोला जाए.

(12) मूकबधिर विशेष योग्यजन – मूक बधिर अन्य व्यक्तियों के साथ संवाद कायम नहीं कर पाते हैं इसलिए सार्वजनिक स्थलों, सरकारी कार्यालयों, पुलिस स्टेशनों आदि में भारतीय सांकेतिक भाषा के जानकार इंटरप्रिटर के पद नव सृजित किए जाएं।

(13) चिकित्सा सुविधा – सभी स्तर के सरकारी अस्पतालों में विशेष योग्यजन मरीजों को सभी तरह की जांच एवं दवा निशुल्क मिलने की सुविधा थी, लेकिन इस सुविधा को बंद कर दिया था। आपसे अनुरोध है कि इस सुविधा को फिर से शुरू किया जाए।

(14) टोल टैक्स – केन्द्र सरकार के अधीन टोल टैक्स के मामले में विशेष योग्यजन के वाहन को टोल टैक्स से मुक्त रखा गया है. आपसे अनुरोध है कि राजस्थान सरकार के अधीन टोल टैक्स बूथों पर भी विशेष योग्यजन के वाहन को टोल टैक्स से मुक्त रखा जाए।

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